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मांगों को लेकर किसानों ने निकाला विरोध मार्च
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सोनीपत। किसानों ने बुधवार को अपनी मांगों को लेकर छोटूराम धर्मशाला से लघु सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला। लघु सचिवालय पहुंचने पर दो घंटे तक धरना देते हुए मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। जिसमें पिछले वर्ष विधानसभा में पारित हुए भूमि अधिग्रहण बिल पर किसानों ने सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। साथ ही मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा मांगा है।
प्रदर्शनकारी किसानों का नेतृत्व भारतीय किसान नौजवान यूनियन के प्रमुख एवं संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कुहाड़ ने किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। किसान नेताओं ने बताया कि बेमौसम बारिश के कारण रबी सीजन में फसलों का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। हालात यह है कि किसानों को अबकी बार अपने घर के लिए भी गेहूं खरीदना पड़ेगा। हजारों एकड़ जमीन जलमग्न है, जिनमें बिजाई भी नहीं हो पाई। किसानों को अभी तक खरीफ सीजन में खराब हुई फसलों का मुआवजा भी नहीं मिला है। किसानों ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में स्पेशल गिरदावरी करवाकर खराब फसलों के मुआवजे का एलान किया जाए। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष विधानसभा में भूमि अधिग्रहण कानून पारित किया गया जो मूल रूप से किसान विरोधी है। नए कानून में पीपीपी मॉडल के तहत जमीन अधिग्रहण करते समय किसानों की सहमति लेने व सेक्शन 4 व 6 के नोटिस देने के प्रावधानों को हटा दिया गया है। मनमाने ढंग से किसानों की जमीन हथियाने की साजिश रची जा रही है। किसानों ने मांग की है कि प्रदेश के नए भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द किया जाए, सभी गांवों का सर्किल रेट बढ़ाया जाए और किसानों के साथ गलत व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
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प्रदर्शनकारी किसानों का नेतृत्व भारतीय किसान नौजवान यूनियन के प्रमुख एवं संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कुहाड़ ने किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। किसान नेताओं ने बताया कि बेमौसम बारिश के कारण रबी सीजन में फसलों का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। हालात यह है कि किसानों को अबकी बार अपने घर के लिए भी गेहूं खरीदना पड़ेगा। हजारों एकड़ जमीन जलमग्न है, जिनमें बिजाई भी नहीं हो पाई। किसानों को अभी तक खरीफ सीजन में खराब हुई फसलों का मुआवजा भी नहीं मिला है। किसानों ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में स्पेशल गिरदावरी करवाकर खराब फसलों के मुआवजे का एलान किया जाए। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष विधानसभा में भूमि अधिग्रहण कानून पारित किया गया जो मूल रूप से किसान विरोधी है। नए कानून में पीपीपी मॉडल के तहत जमीन अधिग्रहण करते समय किसानों की सहमति लेने व सेक्शन 4 व 6 के नोटिस देने के प्रावधानों को हटा दिया गया है। मनमाने ढंग से किसानों की जमीन हथियाने की साजिश रची जा रही है। किसानों ने मांग की है कि प्रदेश के नए भूमि अधिग्रहण कानून को रद्द किया जाए, सभी गांवों का सर्किल रेट बढ़ाया जाए और किसानों के साथ गलत व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
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