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सरकार कानून रद्द करने का प्रस्ताव देगी तो किसान बातचीत के लिए तैयार
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कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार पर गुमराह करने का आरोप लगाया। किसान संगठन प्रतिनिधियों ने कहा कि जब वह सरकार के संशोधन प्रस्ताव को नामंजूर कर चुके हैं तो ऐसे में बातचीत के लिए तारीख तय करने का कोई मतलब नहीं होता है। यह जरूर है कि सरकार अगर कानून रद्द करने का प्रस्ताव देती है तो वह बातचीत के लिए तुरंत तैयार हैं। ऐसा नहीं होता है तो सरकार अपनी जिद कायम रखे, किसान आंदोलन को जारी रखेंगे। किसान संगठन प्रतिनिधियों ने तय किया कि अभी तक करीब 20 किसान आंदोलन में शहीद हो चुके हैं और उनको 20 दिसंबर को सुबह 11 बजे देशभर में जिला, तहसील व गांव स्तर पर श्रद्धांजलि दी जाएगी।
किसान नेता दिल्ली से युद्धबीर सिंह, यूपी से ऋषिपाल अंबावता, पंजाब से जगजीत सिंह व लखवीर सिंह, महाराष्ट्र से संदीप दांगे, हरियाणा से इंद्रजीत सिंह आदि ने कहा कि 20 किसान शहीद हो गए और हजारों लोग ठंड में धरने पर बैठे हैं, लेकिन आज तक सरकार के लोगों के मुंह से इनके लिए एक शब्द तक नहीं निकला। यह अहंकार है कि किसानों से बात करने के लिए पीएम के पास समय नहीं है और वह चाहते हैं कि उनके मन की बात सब सुनते रहें। यह जरूर है कि सरकार किसानों से डर चुकी है और इसलिए ही संसद का सत्र रद्द किया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि लोगों और आंदोलन को भ्रमित करने के लिए भाजपा समर्थित चुनिंदा किसानों को बुलाकर बैठक करने की बात कही जा रही है। जबकि यह तीनों कृषि कानून किसान के लिए डेथ वारंट से कम नहीं हैं। अब तक 20 की जान ले चुके हैं और पता नहीं कितनों को शहादत देनी होगी। किसानों ने साफ कहा कि जब तक कानून वापस नहीं हो जाते हैं, वह यहां से जाने वाले नहीं हैं।
चिल्ला बॉर्डर आज फिर जाम करेंगे, दिल्ली के सभी रास्ते चार दिन में जाम होंगे
यूपी से ऋषिपाल अंबावता व महाराष्ट्र से संदीप दांगे के संगठन भी किसान आंदोलन से जुड़ गए है। ऋषिपाल अंबावता ने कहा कि चिल्ला बॉर्डर से एक संगठन सरकार के पक्ष में भाग गया था, जिससे चिल्ला बॉर्डर खुल गया था। लेकिन उस चिल्ला बॉर्डर को बुधवार से फिर जाम कर दिया जाएगा। इसके अलावा कहा कि चार दिन में दिल्ली के सभी रास्ते जाम कर दिए जाएंगे।
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किसान नेता दिल्ली से युद्धबीर सिंह, यूपी से ऋषिपाल अंबावता, पंजाब से जगजीत सिंह व लखवीर सिंह, महाराष्ट्र से संदीप दांगे, हरियाणा से इंद्रजीत सिंह आदि ने कहा कि 20 किसान शहीद हो गए और हजारों लोग ठंड में धरने पर बैठे हैं, लेकिन आज तक सरकार के लोगों के मुंह से इनके लिए एक शब्द तक नहीं निकला। यह अहंकार है कि किसानों से बात करने के लिए पीएम के पास समय नहीं है और वह चाहते हैं कि उनके मन की बात सब सुनते रहें। यह जरूर है कि सरकार किसानों से डर चुकी है और इसलिए ही संसद का सत्र रद्द किया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि लोगों और आंदोलन को भ्रमित करने के लिए भाजपा समर्थित चुनिंदा किसानों को बुलाकर बैठक करने की बात कही जा रही है। जबकि यह तीनों कृषि कानून किसान के लिए डेथ वारंट से कम नहीं हैं। अब तक 20 की जान ले चुके हैं और पता नहीं कितनों को शहादत देनी होगी। किसानों ने साफ कहा कि जब तक कानून वापस नहीं हो जाते हैं, वह यहां से जाने वाले नहीं हैं।
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चिल्ला बॉर्डर आज फिर जाम करेंगे, दिल्ली के सभी रास्ते चार दिन में जाम होंगे
यूपी से ऋषिपाल अंबावता व महाराष्ट्र से संदीप दांगे के संगठन भी किसान आंदोलन से जुड़ गए है। ऋषिपाल अंबावता ने कहा कि चिल्ला बॉर्डर से एक संगठन सरकार के पक्ष में भाग गया था, जिससे चिल्ला बॉर्डर खुल गया था। लेकिन उस चिल्ला बॉर्डर को बुधवार से फिर जाम कर दिया जाएगा। इसके अलावा कहा कि चार दिन में दिल्ली के सभी रास्ते जाम कर दिए जाएंगे।
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