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कुंडली बॉर्डर पर बूंदाबांदी के बीच भी डटे हैं किसान, बोले-आंदोलन को नहीं पड़ने देंगे कमजोर
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सिंघु बॉर्डर पर लंगर में किसानों को मिस्सी रोटी, सरसों का साग व मक्खन वितरित करते युवा।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। किसान कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। शुक्रवार देर रात बूंदाबांदी के बाद बढ़ी ठंड के बावजूद किसान डटे हुए हैं। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे अन्नदाता ने डेरा डाल रखा है। रात को बूंदाबांदी के बीच भी किसान बैठे रहे। किसानों को ठंड से बचाने के लिए जहां गर्म दूध दिया जा रहा है तो कहीं गर्म कॉफी में देशी घी मिलाकर पिलाया गया। किसानों के लिए गर्मागर्म सकरकंदी की चाट भी बांटी गई।
शुक्रवार रात को ही आसमान में बादल छा गए थे। जिसके चलते देर रात बूंदाबांदी भी शुरू हो गई। ऐसे में खुले आसमान के नीचे कुंडली बॉर्डर के पास धरना दे रहे किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। किसान जगमिंद्र सिंह ने बताया कि पूरी रात रुक-रुक बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। लेकिन हम अन्नदाता है और बिना कानून रद्द कराए वापस नहीं जाएंगे। सरकार को चाहिए कि वह जल्द किसानों की मांगों को पूरा कर दें। धरने पर बैठी मामकौर ने बताया कि अन्नदाता सड़कों पर हैं उसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार है। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सोने को मजबूर हैं। अब चाहे बारिश आए, आंधी आए या तूफान आए। हम अपने हक के लिए यहां डटे रहेंगे।
दूध-पकौड़े और घी डालकर दी गई कॉफी
ठंड बढ़ने के साथ ही किसानों को ठंड से निजात के लिए भी पहल शुरू हो गई है। किसानों के लिए जहां गर्मागर्म दूध बांटा जा रहा है, वहीं गर्मागर्म पकोड़े भी परोसे जा रहे हैं। किसानों को ठंड से निजात के लिए कॉफी में देसी घी डालकर दिया जा रहा है। जिससे शरीर को गर्म रखने में मदद मिल सके। बुजुर्ग किसानों को ट्रैक्टर-ट्राली के अंदर बनाए गए टेंट में ही गर्म खाद्य पदार्थ परोसे गए।
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सकरकंदी की चाट व सरसों के साग के साथ खिलाई मक्की की रोटी
किसानों को शनिवार को लंगर में सकरकंदी की चाट खिलाई गई। किसानों को गर्मागर्म चाट बांटी, जिससे सर्दी से राहत मिल सके। वहीं किसानों के लिए लंगर में सरसों का साग व मक्की की रोटी परोसी गई। किसानों ने मक्खन के साथ ही लंगर का आनंद लिया।
आग तापते रहे बुजुर्ग
इसके साथ ही बुजुर्ग किसानों के लिए जगह-जगह अलाव जलाया गया। जिससे वह अपने शरीर को गर्म रख सके। किसान अलाव जलाकर आग से शरीर को तापते रहे। लंबर बनाने के लिए बनाए गए चूल्हों पर भी किसान आग तापते नजर आए। इनमें बुजुर्गों की संख्या ज्यादा था।
ट्राली में बनाए वॉटरप्रूफ टेंट
किसानों ने कुंडली धरनास्थल पर अपने टेंटों को वॉटरप्रूफ बनाना शुरू कर दिया है। किसानों ने उनके ऊपर पॉलिथीन डालकर बूंदों को अंदर जाने से रोकने का प्रबंध कर दिया है। इसके साथ ही कुंडली धरना स्थल पर वाटरप्रूफ टेंट भी लगातार पहुंच रहे हैं।
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शुक्रवार रात को ही आसमान में बादल छा गए थे। जिसके चलते देर रात बूंदाबांदी भी शुरू हो गई। ऐसे में खुले आसमान के नीचे कुंडली बॉर्डर के पास धरना दे रहे किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। किसान जगमिंद्र सिंह ने बताया कि पूरी रात रुक-रुक बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। लेकिन हम अन्नदाता है और बिना कानून रद्द कराए वापस नहीं जाएंगे। सरकार को चाहिए कि वह जल्द किसानों की मांगों को पूरा कर दें। धरने पर बैठी मामकौर ने बताया कि अन्नदाता सड़कों पर हैं उसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार है। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सोने को मजबूर हैं। अब चाहे बारिश आए, आंधी आए या तूफान आए। हम अपने हक के लिए यहां डटे रहेंगे।
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दूध-पकौड़े और घी डालकर दी गई कॉफी
ठंड बढ़ने के साथ ही किसानों को ठंड से निजात के लिए भी पहल शुरू हो गई है। किसानों के लिए जहां गर्मागर्म दूध बांटा जा रहा है, वहीं गर्मागर्म पकोड़े भी परोसे जा रहे हैं। किसानों को ठंड से निजात के लिए कॉफी में देसी घी डालकर दिया जा रहा है। जिससे शरीर को गर्म रखने में मदद मिल सके। बुजुर्ग किसानों को ट्रैक्टर-ट्राली के अंदर बनाए गए टेंट में ही गर्म खाद्य पदार्थ परोसे गए।
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सकरकंदी की चाट व सरसों के साग के साथ खिलाई मक्की की रोटी
किसानों को शनिवार को लंगर में सकरकंदी की चाट खिलाई गई। किसानों को गर्मागर्म चाट बांटी, जिससे सर्दी से राहत मिल सके। वहीं किसानों के लिए लंगर में सरसों का साग व मक्की की रोटी परोसी गई। किसानों ने मक्खन के साथ ही लंगर का आनंद लिया।
आग तापते रहे बुजुर्ग
इसके साथ ही बुजुर्ग किसानों के लिए जगह-जगह अलाव जलाया गया। जिससे वह अपने शरीर को गर्म रख सके। किसान अलाव जलाकर आग से शरीर को तापते रहे। लंबर बनाने के लिए बनाए गए चूल्हों पर भी किसान आग तापते नजर आए। इनमें बुजुर्गों की संख्या ज्यादा था।
ट्राली में बनाए वॉटरप्रूफ टेंट
किसानों ने कुंडली धरनास्थल पर अपने टेंटों को वॉटरप्रूफ बनाना शुरू कर दिया है। किसानों ने उनके ऊपर पॉलिथीन डालकर बूंदों को अंदर जाने से रोकने का प्रबंध कर दिया है। इसके साथ ही कुंडली धरना स्थल पर वाटरप्रूफ टेंट भी लगातार पहुंच रहे हैं।