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किसानों को आज ड्राफ्ट सौंपेगी सरकार, फिर भी 8 दिसंबर को भारत बंद करेंगे, एंबुलेंस व शादी की गाडिय़ों को छूट
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सोनीपत। किसानों से पांच दौर की बातचीत के बाद सरकार सोमवार को कृषि कानूनों में बदलाव का ड्राफ्ट सौंपेगी। उस ड्राफ्ट पर पंजाब के साथ ही देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधि आपस में चर्चा करेंगे। अगर ड्राफ्ट में उनकी मांग पूरी हो जाती है तो 9 दिसंबर की बैठक की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं ड्राफ्ट मिलने के बाद भी 8 दिसंबर का भारत बंद जरूर रहेगा, क्योंकि उसका आह्वान किसान संगठन पहले ही कर चुके हैं। इस भारत बंद में दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रखा जाएगा तो एंबुलेंस व शादी की गाड़ियों को निकलने की छूट दी जाएगी। वहीं भारत बंद में भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों से बिना झंडे के समर्थन मांगा है तो शरारती तत्वों को नहीं घुसने देने की बात कही गई है।
किसान संगठनों के प्रतिनिधियों बलदेव सिंह ननिहालगढ़, अशोक धावले महाराष्ट्र, तजेन्द्र सिंह विर्क, जगमोहन सिहं, मनजीत सिंह नथवान, शिवकुमार कक्का, योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार से बातचीत की 9 दिसंबर की तारीख किसानों ने रखी है। जबकि सरकार ने प्रस्ताव रखा था कि 7 दिसंबर को बातचीत के अनुसार एक ड्राफ्ट तैयार करके देंगे और इसके बाद अगली चर्चा होगी। इस सरकार की ओर से आठ दिसंबर को बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था। इसे किसानों ने यह कहकर खारिज कर दिया कि वह पहले ही भारत बंद का आह्वान कर चुके हैं। ऐसे में सरकार से बातचीत के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की गई। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार का ड्राफ्ट आने के बाद सभी संगठन इस पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के बाद ही यह तय होगा कि 9 दिसंबर को बैठक में जाने की जरूरत है या नहीं। अगर ड्राफ्ट में सरकार बात मान लेती है तो बैठक में जाने की जरूरत ही नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसान का शौक नहीं है, बल्कि वह मजबूरी में सड़क पर बैठे हैं। जितना सरकार देर करेगी, उतना आंदोलन तेज होगा।
भाजपा को छोड़ सभी दलों का बिना झंडे के बंद में मांगा समर्थन
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि 8 दिसंबर को बंद जरूर किया जाएगा और देश का हर किसान, उनका परिवार, भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दल समर्थन के लिए अपील की गई है। राजनीतिक दलों से आह्वान किया गया है कि यह किसान आंदोलन है, इसलिए वह अपने झंडे व चिह्न लेकर नहीं आएं। कहा कि किसी भी हालत में आंदोलन को खराब नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए सभी को शरारती तत्वों पर नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अब समझ गई है कि किसान झुकने वाला नहीं है। इसलिए बंद के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देनी है।
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किसान संगठनों के प्रतिनिधियों बलदेव सिंह ननिहालगढ़, अशोक धावले महाराष्ट्र, तजेन्द्र सिंह विर्क, जगमोहन सिहं, मनजीत सिंह नथवान, शिवकुमार कक्का, योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार से बातचीत की 9 दिसंबर की तारीख किसानों ने रखी है। जबकि सरकार ने प्रस्ताव रखा था कि 7 दिसंबर को बातचीत के अनुसार एक ड्राफ्ट तैयार करके देंगे और इसके बाद अगली चर्चा होगी। इस सरकार की ओर से आठ दिसंबर को बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था। इसे किसानों ने यह कहकर खारिज कर दिया कि वह पहले ही भारत बंद का आह्वान कर चुके हैं। ऐसे में सरकार से बातचीत के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की गई। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार का ड्राफ्ट आने के बाद सभी संगठन इस पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के बाद ही यह तय होगा कि 9 दिसंबर को बैठक में जाने की जरूरत है या नहीं। अगर ड्राफ्ट में सरकार बात मान लेती है तो बैठक में जाने की जरूरत ही नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसान का शौक नहीं है, बल्कि वह मजबूरी में सड़क पर बैठे हैं। जितना सरकार देर करेगी, उतना आंदोलन तेज होगा।
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भाजपा को छोड़ सभी दलों का बिना झंडे के बंद में मांगा समर्थन
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि 8 दिसंबर को बंद जरूर किया जाएगा और देश का हर किसान, उनका परिवार, भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दल समर्थन के लिए अपील की गई है। राजनीतिक दलों से आह्वान किया गया है कि यह किसान आंदोलन है, इसलिए वह अपने झंडे व चिह्न लेकर नहीं आएं। कहा कि किसी भी हालत में आंदोलन को खराब नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए सभी को शरारती तत्वों पर नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अब समझ गई है कि किसान झुकने वाला नहीं है। इसलिए बंद के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देनी है।
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