{"_id":"5fce7aec8ebc3ecfda6480a1","slug":"farmers-protest-bharat-band-draft-sonipat-news-rtk5854541192","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को नहीं मिला ड्राफ्ट, आज भारत बंद, समर्थन बढ़ रहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को नहीं मिला ड्राफ्ट, आज भारत बंद, समर्थन बढ़ रहा
विज्ञापन
सोनीपत। किसान संगठन के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच 5 दिसंबर की बैठक में बातचीत के बाद किसानों के पास सोमवार को ड्राफ्ट भेजने के लिए कहा गया था। किसान उस ड्राफ्ट का इंतजार करते रहे और सरकार ने वह ड्राफ्ट नहीं भेजा। वहीं किसान संगठन प्रतिनिधियों की सोमवार को दिनभर भारत बंद को लेकर बैठक चलती रही। जिसमें तय हुआ कि भारत बंद व्यापक स्तर पर किया जाएगा, लेकिन यह बंद शांतिपूर्ण तरीके से होगा। किसी को बंद में जबरन शामिल नहीं कराया जाएगा। किसानों ने यह जरूर साफ कर दिया कि वह घर छोड़कर आए हैं और अपना हक लेकर ही वापस जाएंगे। ड्राफ्ट मंगलवार को आने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
किसान नेता बलदेव सिंह, दर्शनपाल, दलबीर सिंह, नर्मदा आंदोलन की अगवा रही मेधा पाटकर, राकेश टिकैत, नेशनल फेडरेशन ऑफ वीमेन की एनी राजा, ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन के शिगोपाल मिश्रा आदि ने संयुक्त रूप से कहा कि केंद्र सरकार को जिद छोड़कर किसानों की मांग को मानना चाहिए और इन कानूनों को जल्द से जल्द रद्द किया जाना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि वह कभी यह नहीं चाहते हैं कि आम जनता को उनकी वजह से परेशानी उठानी पड़े, लेकिन सरकार उनको आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। किसानों ने दिल्ली को पूरी तरह से घेर लिया है और सरकार ने जल्द ही मांग नहीं मानी तो अब किसान दिल्ली के बीच में भी पहुंच जाएंगे।
किसान नेताओं ने कहा कि देशभर में उनकी बातचीत हुई है और विभिन्न संगठन, राजनीतिक दल व आम लोग आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि एंबुलेंस, शादी के वाहनों को नहीं रोका जाए तो दूध, पानी व सब्जी के वाहन बंद रहेंगे। दिल्ली में किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने देंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसी तरह आंदोलन चलता रहा तो यह इस स्तर पर पहुंच जाएगा, फिर सरकार को भारी पड़ जाएगा। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द किसानों की मांग मान लेनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसान नेता बलदेव सिंह, दर्शनपाल, दलबीर सिंह, नर्मदा आंदोलन की अगवा रही मेधा पाटकर, राकेश टिकैत, नेशनल फेडरेशन ऑफ वीमेन की एनी राजा, ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन के शिगोपाल मिश्रा आदि ने संयुक्त रूप से कहा कि केंद्र सरकार को जिद छोड़कर किसानों की मांग को मानना चाहिए और इन कानूनों को जल्द से जल्द रद्द किया जाना चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि वह कभी यह नहीं चाहते हैं कि आम जनता को उनकी वजह से परेशानी उठानी पड़े, लेकिन सरकार उनको आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। किसानों ने दिल्ली को पूरी तरह से घेर लिया है और सरकार ने जल्द ही मांग नहीं मानी तो अब किसान दिल्ली के बीच में भी पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
किसान नेताओं ने कहा कि देशभर में उनकी बातचीत हुई है और विभिन्न संगठन, राजनीतिक दल व आम लोग आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि एंबुलेंस, शादी के वाहनों को नहीं रोका जाए तो दूध, पानी व सब्जी के वाहन बंद रहेंगे। दिल्ली में किसी वाहन को प्रवेश नहीं करने देंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसी तरह आंदोलन चलता रहा तो यह इस स्तर पर पहुंच जाएगा, फिर सरकार को भारी पड़ जाएगा। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द किसानों की मांग मान लेनी चाहिए।
विज्ञापन