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किसानों ने जंतर-मंतर पर चलाई किसान संसद
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बस में सवार होते किसान नेता राकेश टिकैत।
- फोटो : Sonipat
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों के नेता व सदस्य वीरवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे। वहां किसान संसद चलाकर कृषि कानूनों पर चर्चा की गई। किसानों को दिल्ली में पहुंचने के बाद रोकने का प्रयास भी किया गया, लेकिन वहां काफी देर तक बातचीत के बाद पुलिस उनको जंतर-मंतर पर लेकर पहुंची। किसान संसद भी मानसून सत्र चलने तक लगातार चलाई जाएगी। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार जब चाहे बातचीत शुरू कर सकती है। वहीं भाकियू चढूनी गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को मिशन पंजाब के बयान पर कायम रहने के बावजूद संयुक्त मोर्चा को बहाल करना पड़ा।
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने संसद कूच का एलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस के साथ बैठक के बाद उनकी जंतर-मंतर पर जाकर किसान संसद लगाने की सहमति बनी थी। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने जहां पहले सभी संगठनों के पांच-पांच सदस्यों को शामिल करते हुए 200 किसानों के दिल्ली जाने की योजना बनाई थी। वहीं उनको वीरवार सुबह अचानक यह योजना बदलनी पड़ी और किसान संगठन ज्यादा होने के कारण हर संगठनों से केवल तीन-तीन सदस्यों को लेकर जाने की योजना बनाई गई। जंतर-मंतर पर जाने के लिए गाजीपुर व टीकरी बॉर्डर के किसान संगठनों के नेता भी कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए। इनमें भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, जगजीत सिंह दल्लेवाल, योगेंद्र यादव, हरेंद्र सिंह लखोवाल समेत अन्य सभी शामिल रहे। वहां सभी को पहचान पत्र दिए गए, जिसपर उनके संगठन के अध्यक्ष व संयुक्त किसान मोर्चा की कमेटी के सदस्य के हस्ताक्षर थे। वहां से सभी किसान नेता व सदस्य पांच बसों व करीब 5 निजी वाहनों में सवार होकर सिंघु गांव के रास्ते से होते हुए दिल्ली में प्रवेश कर गए। उनको दिल्ली की सीमा तक कुंडली थाना पुलिस लेकर पहुंची तो दिल्ली में पहुंचते ही वहां की पुलिस ने उन सभी की चेकिंग की और उसके बाद वह उन सभी को लेकर जंतर-मंतर पर लेकर गई। जहां किसानों ने अपनी संसद चलाई और कृषि कानूनों पर चर्चा करने के बाद वीरवार शाम को सभी किसान वापस लौट गए।
सरकार जब चाहे शुरू कर सकती है बातचीत : राकेश टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक संसद का मानसून सत्र चलेगा, तभी तक किसानों की संसद भी बाहर चलेगी। किसान तभी वापस जाएंगे, जब कृषि कानूनों को रद्द किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि अब सरकार की मर्जी है, वह जब चाहे बातचीत शुरू कर सकती है। किसान बातचीत से कभी पीछे नहीं हटे थे और वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और इस तरह ही चलता रहेगा। 15 अगस्त को लेकर भी कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं और किसान उस दिन तिरंगा फहराएंगे। तिरंगा किस जगह पर फहराया जाएगा, इसको लेकर सभी बैठकर तय कर लेंगे।
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मैं बॉर्डर पर आया हूं, अगर लेकर जाएंगे तो चला जाऊंगा : चढूनी
मिशन पंजाब के बयान पर एक सप्ताह पहले संयुक्त किसान मोर्चा से सस्पेंड किए गए भाकियू चढूनी गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी वीरवार सुबह कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए। चढूनी खुद को सस्पेंड किए जाने के बाद से लगातार अपनी बात पर अड़े हुए हैं कि वह मिशन पंजाब के अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन उसके बाद भी संयुक्त किसान मोर्चा को उनको बहाल करना पड़ा। उनको बुधवार की रात को ही बहाल कर दिया गया। जिसके बाद चढूनी ने कहा कि वह बॉर्डर पर पहुंच गए हैं और उनको संयुक्त किसान मोर्चा लेकर जाता है तो वह चले जाएंगे। जिसके बाद चढूनी खुद भले ही नहीं गए, लेकिन उनके संगठन के तीन सदस्य भी जंतर-मंतर पर किसान संसद में शामिल होने के लिए चले गए।
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कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने संसद कूच का एलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस के साथ बैठक के बाद उनकी जंतर-मंतर पर जाकर किसान संसद लगाने की सहमति बनी थी। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने जहां पहले सभी संगठनों के पांच-पांच सदस्यों को शामिल करते हुए 200 किसानों के दिल्ली जाने की योजना बनाई थी। वहीं उनको वीरवार सुबह अचानक यह योजना बदलनी पड़ी और किसान संगठन ज्यादा होने के कारण हर संगठनों से केवल तीन-तीन सदस्यों को लेकर जाने की योजना बनाई गई। जंतर-मंतर पर जाने के लिए गाजीपुर व टीकरी बॉर्डर के किसान संगठनों के नेता भी कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए। इनमें भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, जगजीत सिंह दल्लेवाल, योगेंद्र यादव, हरेंद्र सिंह लखोवाल समेत अन्य सभी शामिल रहे। वहां सभी को पहचान पत्र दिए गए, जिसपर उनके संगठन के अध्यक्ष व संयुक्त किसान मोर्चा की कमेटी के सदस्य के हस्ताक्षर थे। वहां से सभी किसान नेता व सदस्य पांच बसों व करीब 5 निजी वाहनों में सवार होकर सिंघु गांव के रास्ते से होते हुए दिल्ली में प्रवेश कर गए। उनको दिल्ली की सीमा तक कुंडली थाना पुलिस लेकर पहुंची तो दिल्ली में पहुंचते ही वहां की पुलिस ने उन सभी की चेकिंग की और उसके बाद वह उन सभी को लेकर जंतर-मंतर पर लेकर गई। जहां किसानों ने अपनी संसद चलाई और कृषि कानूनों पर चर्चा करने के बाद वीरवार शाम को सभी किसान वापस लौट गए।
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सरकार जब चाहे शुरू कर सकती है बातचीत : राकेश टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक संसद का मानसून सत्र चलेगा, तभी तक किसानों की संसद भी बाहर चलेगी। किसान तभी वापस जाएंगे, जब कृषि कानूनों को रद्द किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि अब सरकार की मर्जी है, वह जब चाहे बातचीत शुरू कर सकती है। किसान बातचीत से कभी पीछे नहीं हटे थे और वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और इस तरह ही चलता रहेगा। 15 अगस्त को लेकर भी कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं और किसान उस दिन तिरंगा फहराएंगे। तिरंगा किस जगह पर फहराया जाएगा, इसको लेकर सभी बैठकर तय कर लेंगे।
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मैं बॉर्डर पर आया हूं, अगर लेकर जाएंगे तो चला जाऊंगा : चढूनी
मिशन पंजाब के बयान पर एक सप्ताह पहले संयुक्त किसान मोर्चा से सस्पेंड किए गए भाकियू चढूनी गुट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी वीरवार सुबह कुंडली बॉर्डर पर पहुंच गए। चढूनी खुद को सस्पेंड किए जाने के बाद से लगातार अपनी बात पर अड़े हुए हैं कि वह मिशन पंजाब के अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन उसके बाद भी संयुक्त किसान मोर्चा को उनको बहाल करना पड़ा। उनको बुधवार की रात को ही बहाल कर दिया गया। जिसके बाद चढूनी ने कहा कि वह बॉर्डर पर पहुंच गए हैं और उनको संयुक्त किसान मोर्चा लेकर जाता है तो वह चले जाएंगे। जिसके बाद चढूनी खुद भले ही नहीं गए, लेकिन उनके संगठन के तीन सदस्य भी जंतर-मंतर पर किसान संसद में शामिल होने के लिए चले गए।

दिल्ली कूच करने से पहले कुंडली बॉर्डर पर खड़े पंजाब के किसान नेता।- फोटो : Sonipat