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उपभोक्ताओं तक सीधे उपज पहुंचाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं किसान : डॉ. परमिंद्र
Sat, 21 Feb 2026 06:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 21 Feb 2026 06:09 PM IST
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फोटो : सोनीपत के गांव जैनपुर में आयोजित शिविर में किसानों को प्रशिक्षण देते कृषि वैज्ञानिक।
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत व हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण केंद्र जींद की तरफ से जैनपुर गांव में प्राकृतिक खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को दूसरे दिन जिले के 55 किसानों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. परमिंद्र सिंह ने बताया कि जो किसान जींद या कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रशिक्षण में भाग नहीं ले सके वह अब सोनीपत में ही यह प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती के तहत मिलने वाले अनुदान का लाभ लेने के लिए यह प्रशिक्षण जरूरी है।
उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सीधी बिक्री के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान बिचौलियों से बचकर सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज पहुंचाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं।
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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से आए डॉ. जयराम चौधरी ने मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में सूक्ष्म जीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंचुआ खाद उत्पादन की विधि समझाई। इसके लाभ बताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
डॉ. राकेश कुमार ने प्राकृतिक खेती में धान, गेहूं व सब्जियों में लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सब्जियों में फल मक्खी की रोकथाम के लिए फिरोमोन ट्रैप के प्रयोग पर जोर दिया। इसे कम लागत में प्रभावी उपाय बताया।
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सोनीपत। कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत व हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण केंद्र जींद की तरफ से जैनपुर गांव में प्राकृतिक खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। शनिवार को दूसरे दिन जिले के 55 किसानों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. परमिंद्र सिंह ने बताया कि जो किसान जींद या कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रशिक्षण में भाग नहीं ले सके वह अब सोनीपत में ही यह प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती के तहत मिलने वाले अनुदान का लाभ लेने के लिए यह प्रशिक्षण जरूरी है।
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उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सीधी बिक्री के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान बिचौलियों से बचकर सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज पहुंचाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं।
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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से आए डॉ. जयराम चौधरी ने मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में सूक्ष्म जीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंचुआ खाद उत्पादन की विधि समझाई। इसके लाभ बताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है।
डॉ. राकेश कुमार ने प्राकृतिक खेती में धान, गेहूं व सब्जियों में लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सब्जियों में फल मक्खी की रोकथाम के लिए फिरोमोन ट्रैप के प्रयोग पर जोर दिया। इसे कम लागत में प्रभावी उपाय बताया।