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किसान आंदोलन : सरकार के रवैये से नाराज किसान बोले- अभी ट्रेलर दिखाया है, पूरी फिल्म बाकी है

Sat, 09 Jan 2021 12:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sat, 09 Jan 2021 12:17 AM IST
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Farmers are not happy with central government attitude over farm laws
धरने पर बैठे किसान। - फोटो : फाइल फोटो

कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों में सरकार के रवैये से नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों ने साफ कहा है कि सरकार को अभी ट्रैक्टर मार्च से केवल ट्रेलर दिखाया गया है और अब पूरी फिल्म दिखाई जाएगी। इसके बाद ही सरकार को किसानों की ताकत का अहसास होगा। 

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किसानों और सरकार के बीच लगातार बातचीत के बावजूद कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है और किसानों पर कानून में संशोधन के लिए मानने का दबाव बनाया जा रहा है। इसलिए किसान अब आंदोलन को बढ़ाने में जुट गए है और गणतंत्र दिवस की किसान परेड की सफलता के लिए पूरा जोर लगाया जाएगा।
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कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर किसान बैठे हुए हैं। ठंड व बारिश के बावजूद 44 दिन से किसानों का आंदोलन चल रहा है लेकिन इतने दिन बीतने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। सरकार से आठ दौर की बातचीत अभी तक हो चुकी है वहीं एक बार गृहमंत्री अमित शाह तक से किसान मिल चुके हैं। 

हर बार किसानों को आश्वासन दिया जाता है कि इस बार बैठक में कोई न कोई फैसला जरूर होगा और किसान भी कोई हल निकलने की उम्मीद के साथ जाते हैं। हर बार सरकार और किसानों की बैठक उसी जगह आकर खत्म हो जाती है, जहां कई महीने पहले शुरू हुई थी। वहीं किसान नेताओं के अनुसार अभी तक सरकार के मंत्री कानूनों को लेकर कोई हल निकालने का आश्वासन देते थे। इस बार मंत्रियों ने साफ कह दिया कि वह कानून रद्द करने की जगह संशोधन की बात करें। इस पर किसान नेताओं ने भी साफ कर दिया है कि सरकार भी संशोधन की जगह केवल कानून रद्द करने पर बात करे। 

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किसान व सरकार के बीच गतिरोध बढ़ रहा है तो किसानों की नाराजगी भी सरकार के प्रति ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए अब किसान नेताओं ने फैसला किया है कि सरकार को आंदोलन तेज करके दिखाया जाएगा। उसके बाद ही सरकार को पता चलेगा कि किसान किस हद तक जा सकते हैं। किसान नेताओं ने यहां तक कहा कि जिस तरह से आंदोलन लंबा हो रहा है, ऐसे में अगर युवा किसानों का धैर्य जवाब दे गया तो उनको वह खुद भी नहीं रोक सकेंगे। इसलिए सरकार को ऐसा होने से पहले ही कोई फैसला करना होगा।

अगर युवाओं का धैर्य टूट गया तो कोई उनको संभाल नहीं पाएगा

यूपी के किसान नेता धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के मंत्रियों को साफ बोल दिया गया है कि जितनी भी शहादत चाहते हो, उतनी शहादत देने के लिए तैयार है। हमारा धैर्य लंबे समय तक नहीं बनाकर रख सकते हो, अगर युवाओं का धैर्य टूट गया तो कोई उनको संभाल नहीं सकता है। किसानों को कमर कसनी पड़ेगी और इसमें लंबे समय तक लगना पड़ेगा। किसान ने अपनी ताकत को झोंक दिया है और हर कोई दिल्ली के बॉर्डर पर पड़ा है। अब कानून रद्द कराकर ही वापस जा सकते है।

शहादत से भी पीछे नहीं हटेंगे
हरियाणा के किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि ट्रेलर देखने के बाद भी सरकार को समझ नहीं आ रहा है और अब सरकार को फिल्म दिखानी पड़ेगी। अगर अब हम लोगों को शहादत भी देनी पड़ी तो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन कृषि कानूनों को रद्द कराकर ही रहेंगे। सरकार संशोधन की बात न करे तो बेहतर होगा, क्योंकि उसको कोई भी नेता मानने को तैयार नहीं है।

सरकार का रवैया ठीक नहीं, अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है केंद्र
पंजाब के किसान नेता कृपा सिंह ने कहा कि सरकार का रवैया बड़ा गलत है। कानून रद्द करने से इनकार किया जा रहा है और कानून में संशोधन कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर किसान बिगड़ गए तो उनको कोई नहीं संभाल सकेगा। इस तरह का रवैया अपनाकर सरकार खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है।

आंदोलन बढ़ाने के फैसलों पर अमल होगा
उत्तराखंड के किसान नेता गुरसेवक ने कहा कि अगर यह कानून वापस नहीं होते हैं, तो किसान भी यहां डटे रहेंगे। अगर सरकार अपनी जिद पर अड़ी है तो किसान भी जिद पर अड़े रहेंगे। अब किसानों को बढ़ाया जाएगा और आंदोलन को तेज किया जाएगा। किसान संगठन बैठक में जैसा भी निर्णय लेंगे, अमल किया जाएगा।

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