फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Farmer's movement: Refusal to return home, five-member committee formed to negotiate with the government, now meeting on December 7

किसान आंदोलन : घर वापसी से इनकार, सरकार से बातचीत के लिए बनाई पांच सदस्यीय कमेटी, अब 7 दिसंबर को बैठक

Sat, 04 Dec 2021 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 11:48 PM IST
विज्ञापन
Farmer's movement: Refusal to return home, five-member committee formed to negotiate with the government, now meeting on December 7
कुंडली बॉर्डर पर बैठक करते एसकेएम के सदस्य। - फोटो : Sonipat
तीन कृषि कानून वापसी के बाद अन्य मांगों को पूरा कराने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान वापस नहीं जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एलान किया है कि एमएसपी की गारंटी के लिए सार्थक प्रयास और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापसी समेत अन्य मांगों पर सहमति के बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा।
विज्ञापन

एसकेएम ने सरकार से बातचीत के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का भी गठन कर दिया है। इस कमेटी से ही सरकार किसी भी मुद्दे पर बातचीत कर सकेगी। साथ ही गठित की गई कमेटी ही यह फैसला लेगी कि किस राज्य सरकार से कौन सा किसान नेता बातचीत करेगा। इसके अलावा मोर्चा ने तय किया है कि दो दिन तक सरकार का रवैया देखने के बाद 7 दिसंबर को फिर से कुंडली बॉर्डर पर एसकेएम की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार होगा।
विज्ञापन

कुंडली बॉर्डर पर शनिवार को करीब चार घंटे तक चली एसकेएम की मैराथन बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बैठक में मोर्चा ने 5 लोगों के नाम तय किए हैं। यही सदस्य भविष्य में हर मुद्दे पर सरकार से बातचीत करने के लिए अधिकृत होंगे। कमेटी में बलबीर सिंह राजेवाल, गुरनाम सिंह चढूनी, शिवकुमार कक्का, युद्धवीर सिंह व अशोक धवले शामिल हैं। राकेश टिकैत ने साफ कहा कि जब तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होंगे, तब तक आंदोलन वापस लेने के बारे में नहीं सोच सकते। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर गारंटी कानून, किसानों को मुआवजा, शहीद किसानों के स्मारक के लिए जमीन, लखीमपुर खीरी मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त की मांगें पूरी होने तक किसान सभी मोर्चों पर डटे रहेंगे। इसके अलावा हर राज्य सरकारों से बातचीत के लिए हर राज्य में कमेटियों का गठन किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का संसद में किसानों की मौत से संबंधित रिकॉर्ड न होने से संबंधित बयान शर्मनाक है। नेशनल रिकॉर्ड ब्यूरो संस्था के पास हर मौत का रिकॉर्ड होता है। उन्होंने कहा कि 21 नवंबर को किसानों ने जो पत्र सरकार को लिखा था, उसका कोई जवाब आज तक उनको नहीं मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed