टोक्यो ओलंपिक: मेडल के लिए नई रणनीति के तहत अभ्यास कर रहीं महिला पहलवान, समय भी बढ़ाया
ओलंपिक के लिए पहलवान 26 जुलाई को रवाना होंगे। इस तरह से पहलवानों के पास प्रैक्टिस के लिए अभी पूरा एक सप्ताह है। ऐसे में महिला पहलवानों ने अभ्यास का समय बढ़ा दिया है।
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टोक्यो ओलंपिक में हरियाणा के पहलवानों से पदक की बड़ी उम्मीद जताई जा रही है। इन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए महिला पहलवानों ने मेडल जीतने को कुछ अलग रणनीति बनाई है। उस रणनीति के तहत ही एक सप्ताह तक महिला पहलवानों की प्रैक्टिस चल रही है। इसमें जिन मजबूत देशों की पहलवानों से उनकी भिड़ंत होने की उम्मीद है, उनके दांव देखकर प्रैक्टिस हो रही है तो अपने दांव भी बेहतर किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा उनके कमजोर पहलुओं पर नजर रखी जा रही है तो उनकी मजबूती की काट भी निकाली जा रही है। इसके साथ ही महिला पहलवानों ने प्रैक्टिस को एक घंटा तक बढ़ा दिया है, क्योंकि महिला इस बार पिछले रिकार्ड को तोड़ने का सपना लेकर टोक्यो रवाना होंगी।
कोरोना के कारण पहलवानों की पिछले कई महीनों से प्रैक्टिस प्रभावित रही थी और वह अपने स्तर पर ही प्रैक्टिस कर रहे थे। अब टोक्यो जाने से पहले उनको जितना भी समय प्रैक्टिस के लिए मिल रहा है, वह उसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। इस समय पहलवानों का सोनीपत के बहालगढ़ में साई सेंटर में कैंप चल रहा है। ओलंपिक भले ही पहले शुरू हो जाए, लेकिन पहलवान यहां से 26 जुलाई को रवाना होंगे। इस तरह से पहलवानों के पास प्रैक्टिस के लिए अभी पूरा एक सप्ताह है।
महिला पहलवानों विनेश फौगाट, सोनम मलिक, अंशु मलिक, सीमा बिस्ला को कोच कुछ अलग रणनीति के साथ प्रैक्टिस करा रहे हैं। ताकि उन देशों की पहलवानों को पटखनी दी जा सके, जिनसे भारत की पहलवानों को कड़ी चुनौती मिलती है और उन पहलवानों से अधिकतर जगह हार मिली है। इसलिए जापान, चीन, बुल्गारिया, अमेरिका के पहलवानों के दांव देखे जा रहे हैं और उनके कमजोर व मजबूत दांव दोनों पर नजर रखकर प्रैक्टिस कराई जा रही है।
इनके साथ रोमानिया व अजरबेजान की कई भार वर्गों की पहलवान बेहतर हैं तो उन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इनके अलावा महिला पहलवान जहां पहले करीब 5-6 घंटे प्रैक्टिस कर रही थीं, वहीं अब इसे करीब 7 घंटे कर दिया गया है। इसमें वह अपने स्टेमिना को बढ़ाने के साथ ही स्पीड पर ध्यान देती है। ओलंपिक में भारत को अभी तक केवल एक कांस्य पदक रियो ओलंपिक में मिला था और इस बार उस रिकार्ड को तोड़ने की उम्मीद लेकर पहलवान टोक्यो जाएंगी।
यह अच्छा है कि प्रैक्टिस के लिए ज्यादा समय मिल रहा है, क्योंकि यहां से पहलवान 26 जुलाई को जाएंगे। ऐसे में प्रैक्टिस की कुछ रणनीति भी बदली गई है और उसके तहत ही महिला पहलवानों को प्रैक्टिस कराई जा रही है। उम्मीद है कि उसका बड़ा फायदा ओलंपिक में मिलेगा और इस बार पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर मेडल जीतकर लाएंगे। - कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती