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चुनावी राज्यों में किसानों के बड़े 22 नेता, सीमाओं पर आंदोलन की अन्य नेताओं के हाथों में कमान

Tue, 16 Mar 2021 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 16 Mar 2021 01:49 AM IST
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kishan andolan : 22 leaders of farmers in electoral states
किसान आंदोलन का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला

सरकार के साथ डेढ़ महीने से बंद बातचीत के रास्ते को किसी भी हालत में खोलना चाहते हैं और इसके लिए ही किसानों के बड़े 22 नेताओं ने चुनावी राज्यों का रुख कर लिया है। वहीं दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन की कमान को दूसरी पंक्ति में रहने वाले नेता संभाल रहे है। यह किसी एक सीमा पर नहीं किया गया है, बल्कि कुंडली, टीकरी व गाजीपुर तीनों ही सीमाओं के यह हालात है। किसान नेताओं का मानना है कि धरनास्थलों की जगह चुनावी राज्यों में भाजपा का विरोध करने के अलावा महापंचायतों के सहारे ही सरकार पर ज्यादा दबाव डाला जा सकता है। हालांकि इसका आने वाले दिनों में पता चलेगा कि आखिर किसान नेताओं की यह योजना कितनी कामयाब रही है और सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुलता है या नहीं।

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कृषि कानून रद्द कराने के लिए साढ़े तीन महीने से ज्यादा से किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए है। किसानों व सरकार के बीच जहां अभी तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी किसानों की वार्ता हुई। इसके बावजूद कोई हल अभी तक नहीं निकल सका है, लेकिन पहले सरकार व किसानों के बीच बैठक का दौर लगातार जारी था। किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है।
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पहले सरकार चाहती थी कि किसान बातचीत के लिए खुद पहल करें तो किसान भी सरकार से पहले की तरह प्रस्ताव की उम्मीद रखे हुए थे। इस तरह आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा है और सरकार का रुख देखते हुए किसान नेताओं को लग रहा था कि वह बातचीत करने के लिए कोई पहल नहीं करेगी। इसको देखते हुए ही किसानों के बड़े 22 नेताओं ने बंगाल समेत पांचों चुनावी राज्यों का रुख किया हुआ है, जिनमें राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, गुरनाम सिंह चढूनी, मेधा पाटकर आदि शामिल है। यह सभी नेता वहां भाजपा का विरोध कर रहे है। उसमें भी बंगाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि भाजपा वहां ज्यादा जोर लगा रही है तो किसान नेता भी वहीं ज्यादा विरोध कर रहे है। इसके पहले चरण में बैठक व पंचायत किसान नेता कर चुके है तो अन्य चरण की योजनाएं भी तैयार हो चुकी है।
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जिन राज्यों में चुनाव है, वहां किसान नेता पहुंचकर बैठक व पंचायत कर रहे हैं। वहां किसानों को बताया जा रहा है कि किस तरह से कानून उनके लिए नुकसानदायक है तो आम लोगों के लिए कानून से क्या नुकसान होंगे। इसलिए ही भाजपा को वोट नहीं देने की अपील की जा रही है। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन पूरी मजबूती के साथ चल रहा है और बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी में अन्य नेता व्यवस्था को संभाल रहे है।

दर्शनपाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा

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