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किसान आंदोलन : राष्ट्रीय राजमार्ग व केजीपी-केएमपी चार दिन रहे जाम, 2000 करोड़ से ज्यादा का लगा फटका

Thu, 28 Jan 2021 01:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो रविंद्र कौशिक, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
रविंद्र कौशिक, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Thu, 28 Jan 2021 01:18 AM IST
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Kisan Andolan News: Loss to industries in Haryana due to NH and KGP-KMP Closed
केजीपी-केएमपी का गोल चक्कर खाली। - फोटो : अमर उजाला

किसान आंदोलन के कारण पहले ही उद्योग और व्यापार चौपट हो चुके थे, वहीं पिछले चार दिन तक नेशनल हाईवे के साथ ही केजीपी-केएमपी जाम रहने से हालात बदतर हो गए हैं। इन चार दिनों में करीब 2000 करोड़ रुपये का फटका उद्योग व व्यापार जगत को लगा है। औद्योगिक क्षेत्रों में माल नहीं आने-जाने से यह नुकसान हुआ है। 

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जहां सोनीपत में आंदोलन के कारण पहले हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, वहीं अब केवल चार दिन में सोनीपत में अलग से करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान तो आसपास के जिलों झज्जर, रोहतक, पानीपत समेत अन्य में भी भारी नुकसान हुआ है। इस तरह से उद्योगों की हालत खराब होती जा रही है।
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कृषि कानून रद्द कराने के लिए किसानों ने नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर पिछले 60 दिन से डेरा डाला है। इस तरह प्रदेश के बड़े व राष्ट्रीय राजधानी से सटे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल कुंडली पूरी तरह से बंद है। इसके साथ ही नाथूपुर सबौली औद्योगिक क्षेत्र के भी सभी रास्ते बंद हैं तो राई, मुरथल व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरी आंशिक रूप से चल रही हैं। 
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सोनीपत जिले में उद्योग को अभी तक करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान रोजाना हो रहा था। लेकिन पिछले चार दिन से नेशनल हाईवे 44 पूरी तरह से बंद रहा तो केजीपी-केएमपी भी चार दिन तक बंद रहा। इस तरह सोनीपत में वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया तो केजीपी-केएमपी से होकर अन्य राज्यों में जाने वाले प्रदेश के दूसरे जिलों के वाहनों के पहिये भी थम गए थे। जिससे इन चार दिन के अंदर ही करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान सोनीपत के साथ ही आसपास के झज्जर, पानीपत, रोहतक के उद्योगों को हुआ है। क्योंकि इन जगहों पर चार दिन से कच्चा माल पहुंच नहीं रहा था तो सामान की सप्लाई भी बंद हो गई थी। 

अब नेशनल हाईवे 44 पर पहले की तरह स्थिति होने के साथ ही केजीपी-केएमपी खुलने से जहां अन्य जिलों को राहत मिल गई है। वहीं सोनीपत के लिए स्थिति पहले की तरह रहेगी और यहां कुछ औद्योगिक क्षेत्र में ही फैक्टरियां चल सकेंगी। जबकि कुंडली के उद्यमियों को अभी राहत नहीं मिलेगी। 

आंदोलन के कारण व्यापार भी हो रहा प्रभावित  
दिल्ली से सटे जिलों सोनीपत, बहादुरगढ़, झज्जर, रोहतक, पानीपत आदि का व्यापार पूरी तरह से दिल्ली के साथ जुड़ा हुआ है। इन जगहों के व्यापारी कपड़ा, जूते, रेडीमेड कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी आदि को दिल्ली से लाकर यहां बेचते हैं। लेकिन दिल्ली बॉर्डर पहले से जाम है तो पिछले चार दिनों से हालात खराब हो रहे थे। शहर के बाजारों से सामान भी खत्म होने लगा और व्यापारियों के लिए परेशानी होने लगी। हालांकि अब कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। 

जिस तरह से किसान आंदोलन में बवाल हो रहा है, उससे फैक्टरी मालिकों की हालत खराब होती जा रही है। कुंडली औद्योगिक क्षेत्र को पहले ही नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं चार दिन से स्थिति ज्यादा खराब हो गई थी। जिले के औद्योगिक क्षेत्र में पिछले चार दिन में एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस तरह से उद्यमी फंस गए हैं, जिसका सरकार को कोई समाधान करना चाहिए।  - सुभाष गुप्ता, अध्यक्ष कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन।

 

हमारे यहां बाजार में अधिकतर सामान दिल्ली से आता है और दिल्ली के सभी रास्ते पूरी तरह से बंद होने से परेशानी होती है। किसान आंदोलन का व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इसलिए इसका सरकार को कोई समाधान करना चाहिए। ऐसे ही सबकुछ चलता रहा तो स्थिति ज्यादा खराब हो जाएगी। - संजय सिंगला, अध्यक्ष जिला व्यापार मंडल।

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