किसानों के आंदोलन ने शांति-व्यवस्था में पेश की नजीर, मददगार भी खूब बन रहे
कृषि कानूनों को रद्द कराने की माग को लेकर सिंघु बार्डर पर डटे पंजाब के किसानों ने शांति और व्यवस्था बनाए रखने के मामले में नजीर पेश की है। केवल शांति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि किसान मददगार भी साबित हो रहे हैं और जाम में फंसने वाले वाहन चालकों को खाना तक खिला रहे हैं।
पंजाब के हजारों किसानों ने जब नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाला तो वहां आसपास रहने वालों के साथ ही आम लोगों के अंदर एक डर था। क्योंकि किसी जगह इतनी ज्यादा भीड़ जमा होकर आंदोलन करे तो बवाल का डर होना भी स्वाभाविक है। ऐसे में आंदोलन जब लंबा खिंचने लगे तो उस आंदोलन में शामिल हर किसी का धैर्य टूटने लगता है और उस हालात में बवाल शुरू हो जाता है। ऐसा पहले अधिकतर आंदोलन में हरियाणा के अंदर हुआ है, जब धरने से शुरुआत हुई और उसके बाद बवाल हो गया। लेकिन सिंघु बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को 11 दिन बीत चुके हैं और किसानों का यह आंदोलन शांति पूर्वक जारी है।
सिंघु बॉर्डर पर धरने में किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां पहले करीब 15 हजार किसान सिंघु बॉर्डर पर जमा थे, वहीं अब वह बढ़कर दोगुने 30 हजार तक पहुंच गए हैं। इसके बाद भी किसान लगातार पहुंच रहे हैं, जिससे करीब 7 किमी लंबा तक पड़ाव हो गया है और आंदोलन को 11 दिन बीत चुके हैं। इसके बाद भी जिस तरह से किसान शांति व्यवस्था बनाए हुए है, उसकी हर कोई तारीफ कर रहा है। क्योंकि पहले दिन इतनी भीड़ देखकर कुंडली में रहने वाले लोगों के साथ ही उद्यमी व व्यापारी तक भी डरे हुए थे। उनको डर था कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो किसान उग्र हो जाएंगे और यहां बवाल हो सकता है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है और किसान साफ कहते हैं कि वह खुद शांति बनाए रखना चाहते हैं। वहां कोई शरारती तत्व शामिल होकर माहौल नहीं बिगाड़ सके, उसके लिए खुद ही युवाओं की टोलियों की ड्यूटी लगाई हुई है। इस तरह से किसानों का आंदोलन शांति व्यवस्था में नजीर पेश करता दिख रहा है।
भूखों को खाना खिला रहे, आपात सेवा में गाड़ी निकलवा रहे
किसानों का पड़ाव करीब सात किमी लंबा है और उस पड़ाव के बीच से वाहन निकालना मुश्किल है। ऐसे में कुछ ट्रक वहां शुरुआती दिन से फंसे हुए हैं। उसके बावजूद उन ट्रक चालकों को किसी तरह की परेशानी किसान नहीं होने देते है। उनको अपने साथ खाना खिलाते हैं तो अन्य खाने का सामान भी देते हैं। इनके अलावा कोई आपात सेवा का वाहन उनको दिखाई देता है तो उसको खुद ही निकलवाते हैं। इसके लिए जगह-जगह युवाओं की ड्यूटी लगाई गई है। इस तरह से आंदोलन में पूरी व्यवस्था की गई है, जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं हो सके।
प्रदेश में आंदोलन में होता रहा है बवाल
हरियाणा में पहले कई आंदोलन की शुरुआत इस तरह ही धरना देकर होती है, लेकिन उसके बाद वह उग्र हो जाते हैं। जिसमें काफी जान माल का नुकसान हो चुका है। सतनाली का किसान आंदोलन, कंडेला का आंदोलन, एचएसआईएसएफ कर्मी आंदोलन, गेस्ट टीचर आंदोलन आदि में काफी नुकसान हुआ है। जिनमें जान व माल दोनों की हानि हुई है। इनके अलावा चार साल पहले हुआ जाट आरक्षण आंदोलन सबसे बड़ा बवाल वाला रहा। जिसमें काफी लोगों की जान चली गई थी और करोड़ों की संपत्ति तोड़फोड़ व जलने से नष्ट हो गई थी। जबकि किसान आंदोलन में ज्यादा भीड़ होने के बाद भी किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना देकर अपनी बात मनवाने पर अड़े हुए हैं। किसानों ने यह भी साफ कर दिया है कि वह किसी तरह का बवाल नहीं चाहते है।
किसान आंदोलन काफी शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और हमारे इस आंदोलन में कोई शरारती तत्व आकर किसी तरह का बवाल नहीं करा दे। इसका डर हम लोगों को खुद रहता है और इसके लिए ही दिन व रात में अलग-अलग युवाओं की टोलियां इस पर नजर रखती है। आंदोलन शांतिपूर्ण था और आगे भी शांतिपूर्ण ही रहेगा। बल्कि कोई परेशानी में होता है तो उसकी मदद की जाती है।
- दर्शनपाल, सदस्य अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति
हम पहले ही दिन से कह रहे हैं कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलने वाला है। हम शांतिूपर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते थे। सरकार ने रोकने का प्रयास किया तो हमने केवल आगे बढ़ने का प्रयास किया था। किसी को कोई नुकसान करने का प्रयास न पहले किया और न किया जाएगा। बल्कि हमारे लंगर में हर कोई प्रसाद चख रहा है और कोई आपात सेवा वाली गाड़ी होती है तो उसे निकलवा दिया जाता है।
- गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा