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मन की बातः पीएम मोदी ने पद्मश्री किसान कंवल सिंह की खेती से समझाया कृषि कानून का फायदा
Mon, 28 Sep 2020 03:21 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 03:21 PM IST
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किसान कंवल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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जहां कृषि कानून को लेकर किसानों के साथ ही किसान संगठन और विपक्षी पार्टियां आंदोलन कर रही हैं। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात में सोनीपत के अटेरना गांव के किसान कंवल सिंह चौहान की खेती से यह समझाया कि किस तरह से कृषि कानून किसानों को फायदा पहुंचाने वाला है।
पद्मश्री किसान कंवल सिंह ने परंपरागत खेती को छोड़कर स्वीटकार्न, बेबीकार्न, मशरूम आदि की खेती शुरू करने के साथ ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई और फसलों को कंपनी व बाजार में बेचने लगे। जिससे उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया तो गांव व आसपास के किसानों ने उनके तरीके को अपनाया।
किसान कंवल सिंह भी पीएम मोदी के उत्साहवर्धन से काफी खुश हैं और वह कृषि सुधार के लिए कानून को जरूरी मानते हैं। इसके साथ ही वह चाहते हैं कि एमएसपी व मंडी सिस्टम भी जरूर रहे। कंवल सिंह ने पिता के देहांत के बाद लगभग 1978 में खेती शुरू कर दी थी। उनको पहले काफी परेशानी और खेती की अधिक जानकारी नहीं होने के कारण वह कर्ज में डूबते चले गए थे।
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लेकिन कभी हार नहीं मानी और खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करते रहे। कंवल सिंह चौहान ने वर्ष 1998 में परंपरागत खेती को छोड़कर सबसे पहले मशरूम और बेबी कॉर्न की खेती शुरू की थी। दोनों फसलों से अच्छी आमदनी होने लगी और वह अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए।
जिसके बाद अन्य किसानों को अपने साथ जोड़कर उन्हें बेबी कॉर्न, मशरूम, स्वीट कॉर्न, मधुमक्खी पालन के लिए जागरूक करने लगे। जिससे दूसरे किसानों ने उनकी राह पकड़ी और वह भी इन खेती की ओर रुख करने लगे। उनके सहारे ही गांव व आसपास के किसान खेती से कई गुना तक फायदा ले रहे हैं।
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पद्मश्री किसान कंवल सिंह ने परंपरागत खेती को छोड़कर स्वीटकार्न, बेबीकार्न, मशरूम आदि की खेती शुरू करने के साथ ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई और फसलों को कंपनी व बाजार में बेचने लगे। जिससे उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया तो गांव व आसपास के किसानों ने उनके तरीके को अपनाया।
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किसान कंवल सिंह भी पीएम मोदी के उत्साहवर्धन से काफी खुश हैं और वह कृषि सुधार के लिए कानून को जरूरी मानते हैं। इसके साथ ही वह चाहते हैं कि एमएसपी व मंडी सिस्टम भी जरूर रहे। कंवल सिंह ने पिता के देहांत के बाद लगभग 1978 में खेती शुरू कर दी थी। उनको पहले काफी परेशानी और खेती की अधिक जानकारी नहीं होने के कारण वह कर्ज में डूबते चले गए थे।
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लेकिन कभी हार नहीं मानी और खेती को बढ़ावा देने का प्रयास करते रहे। कंवल सिंह चौहान ने वर्ष 1998 में परंपरागत खेती को छोड़कर सबसे पहले मशरूम और बेबी कॉर्न की खेती शुरू की थी। दोनों फसलों से अच्छी आमदनी होने लगी और वह अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए।
जिसके बाद अन्य किसानों को अपने साथ जोड़कर उन्हें बेबी कॉर्न, मशरूम, स्वीट कॉर्न, मधुमक्खी पालन के लिए जागरूक करने लगे। जिससे दूसरे किसानों ने उनकी राह पकड़ी और वह भी इन खेती की ओर रुख करने लगे। उनके सहारे ही गांव व आसपास के किसान खेती से कई गुना तक फायदा ले रहे हैं।
200 से ज्यादा को दिया रोजगार, विदेशों तक उत्पाद हो रहे सप्लाई
कंवल सिंह चौहान ने बताया कि जब गांव में बेबी कॉर्न व स्वीट कॉर्न का उत्पादन बढ़ा तो किसानों को बाजार की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए वर्ष 2009 में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगा दी। उस समय करीब दो एकड़ में उस यूनिट में बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न, अनानास, फ्रूट कॉकटेल, बटन मशरूम, मशरूम स्लाइस आदि आठ तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस यूनिट से करीब डेढ़ टन बेबी कॉर्न व अन्य उत्पाद इंग्लैंड व अमेरिका में निर्यात होता है। इसके साथ ही लगभग 200 लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार भी दिया जा रहा है, जिनमें महिलाएं भी शामिल है।
ऐसे समझाया कंवल सिंह का उदाहरण देकर कृषि कानून का फायदा
कंवल सिंह चौहान को वर्ष 2019 में खेती के कारण ही पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने उनका उदाहरण देते हुए कहा कि कंवल सिंह चौहान को मंडी से बाहर सब्जियां व फल बेचने में दिक्कत आती थी और उनकी कई बार गाड़ियां जब्त हो जाती थी। लेकिन 2014 में सब्जी व फल को एपीएमसी कानून से बाहर कर दिया गया तो उनको व आसपास के किसानों को काफी फायदा हुआ।
वहां किसानों ने मिलकर उत्पादक समूह की स्थापना की। आजादपुर मंडी, बड़े होटलों व दुकानों में उनकी फसल सीधी जाती है तो वहां के 60 से अधिक किसान नेट हाउस व पॉली हाउस बनाकर खेती कर रहे है। वहां के किसान परंपरागत खेती छोड़कर हर साल प्रति एकड़ 10 से 12 लाख की खेती करते है।
कंवल सिंह मन की बात में उदाहरण देने से काफी खुश
कंवल सिंह चौहान ने कहा कि वह काफी खुश हैं, क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी ने उनकी खेती का उदाहरण देकर कृषि कानून का फायदा समझाया। कंवल सिंह कहते हैं कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कानून जरूरी है और वह कानून किसानों के फायदे के लिए होने चाहिए। सरकार काफी समय से इस ओर प्रयास कर रही थी और इसका फायदा भी जरूर मिलेगा। इसके साथ ही कंवल सिंह ने कहा कि एमएसपी व मंडी व्यवस्था भी पहले की तरह जरूर रहनी चाहिए और वह किसानों की जरूरत है।
ऐसे समझाया कंवल सिंह का उदाहरण देकर कृषि कानून का फायदा
कंवल सिंह चौहान को वर्ष 2019 में खेती के कारण ही पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने उनका उदाहरण देते हुए कहा कि कंवल सिंह चौहान को मंडी से बाहर सब्जियां व फल बेचने में दिक्कत आती थी और उनकी कई बार गाड़ियां जब्त हो जाती थी। लेकिन 2014 में सब्जी व फल को एपीएमसी कानून से बाहर कर दिया गया तो उनको व आसपास के किसानों को काफी फायदा हुआ।
वहां किसानों ने मिलकर उत्पादक समूह की स्थापना की। आजादपुर मंडी, बड़े होटलों व दुकानों में उनकी फसल सीधी जाती है तो वहां के 60 से अधिक किसान नेट हाउस व पॉली हाउस बनाकर खेती कर रहे है। वहां के किसान परंपरागत खेती छोड़कर हर साल प्रति एकड़ 10 से 12 लाख की खेती करते है।
कंवल सिंह मन की बात में उदाहरण देने से काफी खुश
कंवल सिंह चौहान ने कहा कि वह काफी खुश हैं, क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी ने उनकी खेती का उदाहरण देकर कृषि कानून का फायदा समझाया। कंवल सिंह कहते हैं कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कानून जरूरी है और वह कानून किसानों के फायदे के लिए होने चाहिए। सरकार काफी समय से इस ओर प्रयास कर रही थी और इसका फायदा भी जरूर मिलेगा। इसके साथ ही कंवल सिंह ने कहा कि एमएसपी व मंडी व्यवस्था भी पहले की तरह जरूर रहनी चाहिए और वह किसानों की जरूरत है।