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Sonipat News: पुरानी पेंशन नीति लागू करने सहित अन्य मांगों के लिए कल ज्ञापन देंगे कर्मचारी
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रोडवेज कर्मचारी यूनियन केडिपो कार्यालय में बैठक के दौरान मौजूद पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा की डिपो कार्यालय में बैठक हुई। जिसमें यूनियन के पदाधिकारियों व सदस्यों ने पुरानी पेंशन नीति सहित अन्य मांगों को लेकर चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता डिपो प्रधान रामपत गोरड़ ने की, जबकि संचालन अनिल बड़ौली ने किया। बैठक में पुरानी पेंशन नीति सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम 9 जनवरी को प्रदेश भर में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।
डिपो प्रधान रामपत गोरड़ ने बताया कि प्रदेश सरकार निरंतर कर्मचारी व जनता से जुड़े विभागों में जन विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं। इन विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेशभर के कर्मचारियों में रोष है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2004 व हरियाणा सरकार ने वर्ष 2006 में कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बंद कर नई पेंशन नीति को लाया गया था। जिसे राजनेताओं व सरकार ने कर्मचारियों के हित में बताया था। कर्मचारियों को बताया था कि कर्मचारी के वेतन से 10 फीसदी अंश काटा जाएगा और इतना ही अंश सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने पर बहुत पैसा और पेंशन भी मिलेगी। सरकार ने कर्मचारियों का पैसा शेयर मार्केट में लगा रखा है, जिससे कर्मचारियों को नाममात्र की पेंशन मिल रही हैं। कर्मचारियों के पैसों से शेयर मार्केट मालामाल हो रही हैं। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन नीति लागू करने सहित अन्य मांगों को लागू करने की मांग की।
बैठक में मंजीत पहल, बालकराम देशवाल, राकेश दहिया, सोमबीर दहिया, जमील, नरेश शर्मा, दिनेश, अमित सरोहा, संदीप मलिक, बलवान, अशोक सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
-पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
-हरियाणा कौशल रोजगार विभाग को भंग किया जाए।
-सरकार की तरफ से लागू शर्तों पर आधारित एक्सग्रेसिया योजना को रद्द कर 1995 की पुरानी एक्सग्रेसिया नीति लागू की जाए।
-सभी बीमारियों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू की जाए।
-सभी विभागों में निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
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डिपो प्रधान रामपत गोरड़ ने बताया कि प्रदेश सरकार निरंतर कर्मचारी व जनता से जुड़े विभागों में जन विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं। इन विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेशभर के कर्मचारियों में रोष है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2004 व हरियाणा सरकार ने वर्ष 2006 में कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बंद कर नई पेंशन नीति को लाया गया था। जिसे राजनेताओं व सरकार ने कर्मचारियों के हित में बताया था। कर्मचारियों को बताया था कि कर्मचारी के वेतन से 10 फीसदी अंश काटा जाएगा और इतना ही अंश सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी को सेवानिवृत्त होने पर बहुत पैसा और पेंशन भी मिलेगी। सरकार ने कर्मचारियों का पैसा शेयर मार्केट में लगा रखा है, जिससे कर्मचारियों को नाममात्र की पेंशन मिल रही हैं। कर्मचारियों के पैसों से शेयर मार्केट मालामाल हो रही हैं। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन नीति लागू करने सहित अन्य मांगों को लागू करने की मांग की।
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बैठक में मंजीत पहल, बालकराम देशवाल, राकेश दहिया, सोमबीर दहिया, जमील, नरेश शर्मा, दिनेश, अमित सरोहा, संदीप मलिक, बलवान, अशोक सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
-पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
-हरियाणा कौशल रोजगार विभाग को भंग किया जाए।
-सरकार की तरफ से लागू शर्तों पर आधारित एक्सग्रेसिया योजना को रद्द कर 1995 की पुरानी एक्सग्रेसिया नीति लागू की जाए।
-सभी बीमारियों के लिए मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू की जाए।
-सभी विभागों में निजीकरण पर रोक लगाई जाए।