{"_id":"60d4d2de8ebc3e2d47799dba","slug":"embezzlement-of-rs-2-95-crore-in-murthal-co-operative-bank-branch-sonipat-news-rtk614520023","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुरथल को-आपरेटिव बैंक शाखा में 2.95 करोड़ रुपये का गबन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुरथल को-आपरेटिव बैंक शाखा में 2.95 करोड़ रुपये का गबन
विज्ञापन
गांव मुरथल स्थित को-आपरेटिव बैंक की शाखा में धोखाधड़ी से बोगस दस्तावेज तैयार कर ऋण देने के नाम पर दो करोड़ 95 लाख 90 हजार रुपये का गबन करने का मामला सामने आया है। बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में मामले का खुलासा होने पर मुरथल शाखा के तत्कालीन प्रबंधक समेत 18 लोगों के खिलाफ अमानत में खयानत, गबन, धोखाधड़ी, रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
को-आपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक संजय हुड्डा ने एसपी सोनीपत को शिकायत दी कि बैंक की मुरथल शाखा में बड़ा गबन हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने व गन्नौर के विकास अधिकारी ने 26 जुलाई, 2019 को शाखा मुरथल में एनपीए (फंसा हुआ) ऋण की वसूली के लिए दौरा कर निजी ऋण की फाइलों की जांच की तो गड़बड़ी मिली थी। इसकी रिपोर्ट तैयार कर 29 जुलाई 2019 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को दी गई। इसी जांच के लिए चार बैंककर्मियों की कमेटी बनाई गई। उन्हें मुरथल सहित शाखाओं के एनपीए हो चुके ऋण की जांच की जिम्मेदारी दी गई। कमेटी ने 2 दिसंबर 2019 को अपनी रिपोर्ट दे दी थी। जिस पर इस वर्ष तीन फरवरी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक हुई, जिसमें गड़बड़ी को लेकर मुरथल शाखा के तत्कालीन प्रबंधक व वर्तमान में निलंबित कनिष्ठ लेखाकार फरमाणा शाखा मनोज कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए महाप्रबंधक को नियुक्त किया गया। जिस पर महाप्रबंधक ने सेक्टर-15 सोनीपत फिलहाल वर्धमान सोसायटी सोनीपत निवासी मनोज कुमार के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि वह मुरथल शाखा में फरवरी 2010 से शाखा प्रबंधक थे। वहीं वर्ष 2015 में उन्हें एनएफएफ सेक्शन मुख्यालय में इंचार्ज का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। वह 13 अक्तूबर 2015 से 21 अक्तूबर 2016 तक एनएफएफ सेक्शन इंचार्ज रहे। जांच में सामने आया है कि उन्होंने मुरथल शाखा में प्रबंधक व एनएफएफ शाखा इंचार्ज रहते हुए स्वयं के पांच लाख सहित 51 लोगों को 2 करोड़ 52 लाख 90 हजार रुपये का व्यक्तिगत ऋण बोगस दस्तावेज के आधार पर दिया। ऋण की राशि बोगस बचत खाते में ट्रांसफर की गई। बाद में फर्जी हस्ताक्षर से राशि नकद और आरटीजीएस व चेक से सुमित, सतेंद्र, सुरेंद्र, मनोज, वीना कुमारी, विनोद कुमार, हंस मलिक, अनूप मैसर्ज, संदीप पोल्ट्री फार्म, अंगुरी देवी, प्रियंका, नीरू मलिक मैसर्ज हेयदान मोटर्स, धर्मवीर, दिनेश शर्मा आदि के खातों में ट्रांसफर की गई। इसकी वसूली नहीं होने पर भौतिक स्तर पर जांच हुई तो ऋण फाइल में मौजूद पते के अनुसार वह वहां पर नहीं रहते मिले। अधिकतर को सरकारी कर्मचारी दर्शाकर बोगस दस्तावेज तैयार कर ऋण दिया गया। ऋण में से 40 व्यक्तियों की तरफ 1 करोड़ 81 लाख से अधिक ऋण बकाया है। यह ब्याज सहित वसूला जाना है। पुलिस ने मामले में मनोज सहित 18 लोगों को नामजद कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
व्यक्तिगत ऋण फर्जी व अधूरे पते पर देने का आरोप
नवंबर 2015 से जनवरी 2019 के बीच दिया गया व्यक्तिगत यह ऋण सिर्फ सरकारी व अर्ध सरकारी कर्मचारियों को दिया जाना था और उनका भी सोनीपत का स्थायी निवासी होना जरूरी था। जिसकी वसूली प्रति माह ब्याज सहित करनी होती थी। आरोप है कि प्रबंधक ने ऋण शाखा में कार्यरत कर्मचारियों की आईडी और स्वयं की आईडी से वाउचर पास कर दिए गए। ऋण की राशि बोगस बचत खाते में ट्रांसफर की गई।
विज्ञापन
कंपोजिट ऋण में गड़बड़ी का आरोप
आरोप है कि वर्ष 2009-15 में 26 व्यक्तियों को 13 लाख कंपोजिट ऋण देने के लिए कागजात बनाए गए। शाखा स्तर पर पंजीकृत डाक से 19 कर्जदारों को राशि जमा कराने का नोटिस दिया तो 16 कर्जदारों के पते अधूरे मिले। सात को नोटिस जारी नहीं किए जा सके। उनके ऋण खातों में पिता व गांव का नाम नहीं दर्शाया गया था। इसमें से 12 लाख 69 हजार 705 रुपये वसूलने हैं।
जेएलजी ग्रुप को 20 लाख देने की फाइल नहीं भेजी मुख्यालय, सेवानिवृत्त और मृत कर्मियों के हस्ताक्षर
महाप्रबंधक का आरोप है कि 14 दिसंबर 2015 को जेएलजी के 10 ग्रुप को 20 लाख का ऋण दिया गया। इसकी फाइल स्वीकृति को मुख्यालय तक नहीं भेजी गई। मनोज कुमार ने महाप्रबंधक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वयं महाप्रबंधक के फर्जी हस्ताक्षर कर गलत तरीके से ऋण देकर अपने चहेतों के खातों में जमा करवा दिया। ऋण नकद दिया गया और इसके लिए 31 अक्तूबर 2015 को सेवानिवृत्त हो चुकीं संतोष देवी की आईडी लगाई गई। इतना ही नहीं ऋण फाइल में विकास अधिकारी भीम सिंह के हस्ताक्षर है, जिनका निधन हो चुका था। उस समय सुरेंद्र हुड्डा विकास अधिकारी गन्नौर थे। दिसंबर 2015 में दीपालपुर की सरस्वती देवी, सतेंद्र, रवीन के खातों से क्रमश: छह लाख, साढ़े सात लाख व छह लाख रुपये जमा कराए। बचत खाते में जमा रसीद पर कैशियर के हस्ताक्षर नहीं और न ही नोटों का विवरण है। इसमें 19 लाख 60 हजार रुपये ऋण बकाया है।
वाहन, क्रेडिट व मिनी डेयरी के नाम पर भी गड़बड़ी
महाप्रबंधक का आरोप है कि तत्कालीन प्रबंधक ने सतेंद्र को दोपहिया वाहन के लिए एक लाख का ऋण बिना फाइल के लिए दिया, सुमित को 5 लाख रुपये कैश क्रेडिट लिमिट का ऋण दिया, जिसमें 82 हजार 488 रुपये बकाया है। नरेश कुमार को एक लाख रुपये मिनी डेयरी के नाम पर दिया। यह राशि सतेंद्र के खाते में ट्रांसफर की। इसी ऋणी के नाम कंपोजिट ऋण लिया था, उसने यह राशि जमा करा दी और शाखा सोनीपत में लिखित बयान दिया है कि उसने शाखा मुरथल से कोई ऋण नहीं लिया है। दीपक के नाम पर 3 लाख रुपये मिनी डेयरी का ऋण लेकर सुरेंद्र के खाते में पैसे भेजे गए। सुदेश के नाम पर 5 लाख का ऋण दर्शाया गया है। इसकी राशि भी सुरेंद्र के खाते में भेजी गई।
विज्ञापन
को-आपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक संजय हुड्डा ने एसपी सोनीपत को शिकायत दी कि बैंक की मुरथल शाखा में बड़ा गबन हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने व गन्नौर के विकास अधिकारी ने 26 जुलाई, 2019 को शाखा मुरथल में एनपीए (फंसा हुआ) ऋण की वसूली के लिए दौरा कर निजी ऋण की फाइलों की जांच की तो गड़बड़ी मिली थी। इसकी रिपोर्ट तैयार कर 29 जुलाई 2019 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को दी गई। इसी जांच के लिए चार बैंककर्मियों की कमेटी बनाई गई। उन्हें मुरथल सहित शाखाओं के एनपीए हो चुके ऋण की जांच की जिम्मेदारी दी गई। कमेटी ने 2 दिसंबर 2019 को अपनी रिपोर्ट दे दी थी। जिस पर इस वर्ष तीन फरवरी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक हुई, जिसमें गड़बड़ी को लेकर मुरथल शाखा के तत्कालीन प्रबंधक व वर्तमान में निलंबित कनिष्ठ लेखाकार फरमाणा शाखा मनोज कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए महाप्रबंधक को नियुक्त किया गया। जिस पर महाप्रबंधक ने सेक्टर-15 सोनीपत फिलहाल वर्धमान सोसायटी सोनीपत निवासी मनोज कुमार के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि वह मुरथल शाखा में फरवरी 2010 से शाखा प्रबंधक थे। वहीं वर्ष 2015 में उन्हें एनएफएफ सेक्शन मुख्यालय में इंचार्ज का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था। वह 13 अक्तूबर 2015 से 21 अक्तूबर 2016 तक एनएफएफ सेक्शन इंचार्ज रहे। जांच में सामने आया है कि उन्होंने मुरथल शाखा में प्रबंधक व एनएफएफ शाखा इंचार्ज रहते हुए स्वयं के पांच लाख सहित 51 लोगों को 2 करोड़ 52 लाख 90 हजार रुपये का व्यक्तिगत ऋण बोगस दस्तावेज के आधार पर दिया। ऋण की राशि बोगस बचत खाते में ट्रांसफर की गई। बाद में फर्जी हस्ताक्षर से राशि नकद और आरटीजीएस व चेक से सुमित, सतेंद्र, सुरेंद्र, मनोज, वीना कुमारी, विनोद कुमार, हंस मलिक, अनूप मैसर्ज, संदीप पोल्ट्री फार्म, अंगुरी देवी, प्रियंका, नीरू मलिक मैसर्ज हेयदान मोटर्स, धर्मवीर, दिनेश शर्मा आदि के खातों में ट्रांसफर की गई। इसकी वसूली नहीं होने पर भौतिक स्तर पर जांच हुई तो ऋण फाइल में मौजूद पते के अनुसार वह वहां पर नहीं रहते मिले। अधिकतर को सरकारी कर्मचारी दर्शाकर बोगस दस्तावेज तैयार कर ऋण दिया गया। ऋण में से 40 व्यक्तियों की तरफ 1 करोड़ 81 लाख से अधिक ऋण बकाया है। यह ब्याज सहित वसूला जाना है। पुलिस ने मामले में मनोज सहित 18 लोगों को नामजद कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
विज्ञापन
व्यक्तिगत ऋण फर्जी व अधूरे पते पर देने का आरोप
नवंबर 2015 से जनवरी 2019 के बीच दिया गया व्यक्तिगत यह ऋण सिर्फ सरकारी व अर्ध सरकारी कर्मचारियों को दिया जाना था और उनका भी सोनीपत का स्थायी निवासी होना जरूरी था। जिसकी वसूली प्रति माह ब्याज सहित करनी होती थी। आरोप है कि प्रबंधक ने ऋण शाखा में कार्यरत कर्मचारियों की आईडी और स्वयं की आईडी से वाउचर पास कर दिए गए। ऋण की राशि बोगस बचत खाते में ट्रांसफर की गई।
विज्ञापन
कंपोजिट ऋण में गड़बड़ी का आरोप
आरोप है कि वर्ष 2009-15 में 26 व्यक्तियों को 13 लाख कंपोजिट ऋण देने के लिए कागजात बनाए गए। शाखा स्तर पर पंजीकृत डाक से 19 कर्जदारों को राशि जमा कराने का नोटिस दिया तो 16 कर्जदारों के पते अधूरे मिले। सात को नोटिस जारी नहीं किए जा सके। उनके ऋण खातों में पिता व गांव का नाम नहीं दर्शाया गया था। इसमें से 12 लाख 69 हजार 705 रुपये वसूलने हैं।
जेएलजी ग्रुप को 20 लाख देने की फाइल नहीं भेजी मुख्यालय, सेवानिवृत्त और मृत कर्मियों के हस्ताक्षर
महाप्रबंधक का आरोप है कि 14 दिसंबर 2015 को जेएलजी के 10 ग्रुप को 20 लाख का ऋण दिया गया। इसकी फाइल स्वीकृति को मुख्यालय तक नहीं भेजी गई। मनोज कुमार ने महाप्रबंधक की शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वयं महाप्रबंधक के फर्जी हस्ताक्षर कर गलत तरीके से ऋण देकर अपने चहेतों के खातों में जमा करवा दिया। ऋण नकद दिया गया और इसके लिए 31 अक्तूबर 2015 को सेवानिवृत्त हो चुकीं संतोष देवी की आईडी लगाई गई। इतना ही नहीं ऋण फाइल में विकास अधिकारी भीम सिंह के हस्ताक्षर है, जिनका निधन हो चुका था। उस समय सुरेंद्र हुड्डा विकास अधिकारी गन्नौर थे। दिसंबर 2015 में दीपालपुर की सरस्वती देवी, सतेंद्र, रवीन के खातों से क्रमश: छह लाख, साढ़े सात लाख व छह लाख रुपये जमा कराए। बचत खाते में जमा रसीद पर कैशियर के हस्ताक्षर नहीं और न ही नोटों का विवरण है। इसमें 19 लाख 60 हजार रुपये ऋण बकाया है।
वाहन, क्रेडिट व मिनी डेयरी के नाम पर भी गड़बड़ी
महाप्रबंधक का आरोप है कि तत्कालीन प्रबंधक ने सतेंद्र को दोपहिया वाहन के लिए एक लाख का ऋण बिना फाइल के लिए दिया, सुमित को 5 लाख रुपये कैश क्रेडिट लिमिट का ऋण दिया, जिसमें 82 हजार 488 रुपये बकाया है। नरेश कुमार को एक लाख रुपये मिनी डेयरी के नाम पर दिया। यह राशि सतेंद्र के खाते में ट्रांसफर की। इसी ऋणी के नाम कंपोजिट ऋण लिया था, उसने यह राशि जमा करा दी और शाखा सोनीपत में लिखित बयान दिया है कि उसने शाखा मुरथल से कोई ऋण नहीं लिया है। दीपक के नाम पर 3 लाख रुपये मिनी डेयरी का ऋण लेकर सुरेंद्र के खाते में पैसे भेजे गए। सुदेश के नाम पर 5 लाख का ऋण दर्शाया गया है। इसकी राशि भी सुरेंद्र के खाते में भेजी गई।