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शिक्षा केवल नौकरी पाने की जरिया नहीं, खोलती है भविष्य का रास्ता : प्रो. नेहरा
Wed, 18 Feb 2026 07:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 18 Feb 2026 07:04 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय स्वावलंबन केंद्र की ओर से उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका आयोजन भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय की ईएसडीपी योजना के तहत किया गया।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. विजय नेहरा ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं है बल्कि इससे भविष्य बनाने के कई रास्ते खुलते हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यवसायिक समझ बढ़ाते हैं।
मुख्य वक्ता निदेशक नवाचार अनुसंधान एवं प्रशिक्षण डॉ. विवेक शुक्ला ने कहा कि छात्राओं की क्षमता को पहचानना और उसे सही दिशा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका अहम है। शिक्षकों व अभिभावकों को मिलकर बच्चों की प्रतिभा को निखारना चाहिए।
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डॉ. श्रुति शंकर गौर ने व्यवसाय और उद्यमिता के अंतर को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता की शुरुआत समस्या पहचानने से होती है और नवाचार के जरिए उसका समाधान किया जाता है। कार्यक्रम का संचालन तनीषा ने किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. वरुणा तेहलान दहिया ने कहा कि शिक्षकों को केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि विद्यार्थियों को नई दुनिया के लिए तैयार करना भी समय की जरूरत है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुशील कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनु बल्हारा, अंशु भारद्वाज, प्रो. प्रिया ढींगरा, प्रो. सरला, प्रो. रीना सहित सभी संकाय सदस्य और छात्राएं मौजूद रहीं।
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गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय स्वावलंबन केंद्र की ओर से उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका आयोजन भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय की ईएसडीपी योजना के तहत किया गया।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. विजय नेहरा ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं है बल्कि इससे भविष्य बनाने के कई रास्ते खुलते हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यवसायिक समझ बढ़ाते हैं।
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मुख्य वक्ता निदेशक नवाचार अनुसंधान एवं प्रशिक्षण डॉ. विवेक शुक्ला ने कहा कि छात्राओं की क्षमता को पहचानना और उसे सही दिशा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका अहम है। शिक्षकों व अभिभावकों को मिलकर बच्चों की प्रतिभा को निखारना चाहिए।
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डॉ. श्रुति शंकर गौर ने व्यवसाय और उद्यमिता के अंतर को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता की शुरुआत समस्या पहचानने से होती है और नवाचार के जरिए उसका समाधान किया जाता है। कार्यक्रम का संचालन तनीषा ने किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. वरुणा तेहलान दहिया ने कहा कि शिक्षकों को केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि विद्यार्थियों को नई दुनिया के लिए तैयार करना भी समय की जरूरत है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुशील कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनु बल्हारा, अंशु भारद्वाज, प्रो. प्रिया ढींगरा, प्रो. सरला, प्रो. रीना सहित सभी संकाय सदस्य और छात्राएं मौजूद रहीं।