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Sonipat News: कथूरा में नहरी पानी के अभाव में सूखे पड़े तालाब और डिग्गियां, उड़ रही धूल
Fri, 05 Jun 2026 09:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 05 Jun 2026 09:04 PM IST
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गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। कथूरा गांव में पीने के पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। जोहड़ों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के पानी की उचित व्यवस्था नहीं होने से भी रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गांव में दो डिग्गियां और नहरी पानी के भंडारण के लिए करीब पांच तालाब बनाए गए थे। इनमें नहरी पानी का भंडारण करके गांव में सप्लाई की जानी थी लेकिन नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण तालाब सूखे पड़े हैं। इससे धूल उड़ रही है। इससे गांव में ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई की जा रही है। इस पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक है जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
महिलाओं ने बताया कि पीने के पानी के लिए पड़ोसी गांव छिछड़ाना और केहल्पा तक जाना पड़ता है। उन्हें बहुत दूर से पानी लाने में काफी समय लग जाता है। गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था होना जरूरी है। दूसरी ओर गांव के जोहड़ों की खुदाई को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि खुदाई का कार्य सही तरीके से नहीं किया जा रहा। जोहड़ों में ताजा पानी भरने और गंदा पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
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इसके अलावा कई स्थानों पर लोगों ने जोहड़ों की जमीन पर अतिक्रमण कर उन्हें ढक दिया है जिससे उनका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है और जल संरक्षण की क्षमता भी कम हो गई है।
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गांव में पीने के पानी की सप्लाई खराब है। दूषित पानी के कारण बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। साफ पानी की व्यवस्था न होने से गांव की महिलाओं को पास के छिछड़ाना और केहल्पा गांव के नलकूपों से पीने का पानी भरकर लाना पड़ता है।-करमपती
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गांव में सप्लाई के माध्यम से जो पानी आता है वह केवल कपड़े और बर्तन धोने जैसे घरेलू कार्यों के लिए ही उपयोगी है। पीने के लिए पानी उपयुक्त नहीं है। इस पानी को पशु भी नहीं पीते। वर्तमान में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।-जगवंती
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गांव में नहरी पानी के भंडारण के लिए दो डिग्गियां और पांच से छह तालाब बनाए गए थे ताकि नहरी पानी को संग्रहित कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने से यह व्यवस्था सफल नहीं हो पाई।-सत्यवान, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष
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गांव के जोहड़ों की हालत खराब है। इन दिनों जोहड़ों की खुदाई का कार्य चल रहा है लेकिन सफाई और चहारदीवारी का काम सही तरीके से नहीं किया जा रहा। जो घाट बनाए जा रहे हैं, वे बहुत संकरे हैं। -अशोक, पशुपालक
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गांव में पीने के पानी की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है क्योंकि नहरी पानी नहीं आ रहा। उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान होगा। जहां तक जोहड़ों की खुदाई का सवाल है, कार्य जारी है, लेकिन यह गांव की जरूरतों के अनुसार नहीं हो रहा। -नवीन, सरपंच के पति
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कथूरा सब माइनर में पानी कम आने के कारण गांव को पर्याप्त नहरी पानी नहीं मिल पा रहा है। समस्या के समाधान के लिए 823.07 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। योजना के तहत कहानौर सब ब्रांच से रॉ वाटर को उच्च स्तर पर लाने के लिए वाटर पंप लगाने का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित कार्यालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद गांव में नहरी पानी की नियमित आपूर्ति शुरू हो सकेगी जिससे पेयजल की गुणवत्ता में सुधार होगा और ग्रामीणों को बेहतर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।-नरेंद्र लाठर, लोक निर्माण विभाग के उपमंडल अधिकारी
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गोहाना। कथूरा गांव में पीने के पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। जोहड़ों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के पानी की उचित व्यवस्था नहीं होने से भी रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गांव में दो डिग्गियां और नहरी पानी के भंडारण के लिए करीब पांच तालाब बनाए गए थे। इनमें नहरी पानी का भंडारण करके गांव में सप्लाई की जानी थी लेकिन नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण तालाब सूखे पड़े हैं। इससे धूल उड़ रही है। इससे गांव में ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई की जा रही है। इस पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक है जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
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महिलाओं ने बताया कि पीने के पानी के लिए पड़ोसी गांव छिछड़ाना और केहल्पा तक जाना पड़ता है। उन्हें बहुत दूर से पानी लाने में काफी समय लग जाता है। गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था होना जरूरी है। दूसरी ओर गांव के जोहड़ों की खुदाई को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि खुदाई का कार्य सही तरीके से नहीं किया जा रहा। जोहड़ों में ताजा पानी भरने और गंदा पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
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इसके अलावा कई स्थानों पर लोगों ने जोहड़ों की जमीन पर अतिक्रमण कर उन्हें ढक दिया है जिससे उनका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है और जल संरक्षण की क्षमता भी कम हो गई है।
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गांव में पीने के पानी की सप्लाई खराब है। दूषित पानी के कारण बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। साफ पानी की व्यवस्था न होने से गांव की महिलाओं को पास के छिछड़ाना और केहल्पा गांव के नलकूपों से पीने का पानी भरकर लाना पड़ता है।-करमपती
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गांव में सप्लाई के माध्यम से जो पानी आता है वह केवल कपड़े और बर्तन धोने जैसे घरेलू कार्यों के लिए ही उपयोगी है। पीने के लिए पानी उपयुक्त नहीं है। इस पानी को पशु भी नहीं पीते। वर्तमान में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।-जगवंती
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गांव में नहरी पानी के भंडारण के लिए दो डिग्गियां और पांच से छह तालाब बनाए गए थे ताकि नहरी पानी को संग्रहित कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आने से यह व्यवस्था सफल नहीं हो पाई।-सत्यवान, भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष
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गांव के जोहड़ों की हालत खराब है। इन दिनों जोहड़ों की खुदाई का कार्य चल रहा है लेकिन सफाई और चहारदीवारी का काम सही तरीके से नहीं किया जा रहा। जो घाट बनाए जा रहे हैं, वे बहुत संकरे हैं। -अशोक, पशुपालक
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गांव में पीने के पानी की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है क्योंकि नहरी पानी नहीं आ रहा। उम्मीद है कि जल्द इसका समाधान होगा। जहां तक जोहड़ों की खुदाई का सवाल है, कार्य जारी है, लेकिन यह गांव की जरूरतों के अनुसार नहीं हो रहा। -नवीन, सरपंच के पति
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कथूरा सब माइनर में पानी कम आने के कारण गांव को पर्याप्त नहरी पानी नहीं मिल पा रहा है। समस्या के समाधान के लिए 823.07 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। योजना के तहत कहानौर सब ब्रांच से रॉ वाटर को उच्च स्तर पर लाने के लिए वाटर पंप लगाने का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित कार्यालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद गांव में नहरी पानी की नियमित आपूर्ति शुरू हो सकेगी जिससे पेयजल की गुणवत्ता में सुधार होगा और ग्रामीणों को बेहतर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।-नरेंद्र लाठर, लोक निर्माण विभाग के उपमंडल अधिकारी

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद

गोहाना के गांव कथूरा में नहरी पानी ना आने के चलते जलघर के सूखे पड़े तालाब। संवाद