{"_id":"697677d1f44298f4c600b0cf","slug":"dr-jyotiraj-created-a-garden-of-greenery-beauty-and-environmental-balance-sonipat-news-c-197-1-snp1001-148722-2026-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: डॉ. ज्योतिराज ने तैयार की हरियाली, सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन की बगिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: डॉ. ज्योतिराज ने तैयार की हरियाली, सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन की बगिया
Mon, 26 Jan 2026 01:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:36 AM IST
विज्ञापन
फोटो :06: सोनीपत की एल्डिको काउंटी सिटी में अपने घर पर सहेजी बगिया में डॉ. ज्योतिराज। संवाद
सोनीपत। कुमासपुर के पास स्थित एल्डिको काउंटी सिटी में मुरथल स्थित राजकीय महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर एवं राष्ट्रपति अवॉर्डी डॉ. ज्योतिराज ने अपने आवासीय परिसर में करीब एक वर्ष पहले सुंदर बगिया तैयार की है जो हरियाली, सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाती है।
डॉ. ज्योतिराज ने अपनी बगिया में बांस, अजवाइन, बटन बेल, तुलसी, कैक्टस, ऐलोवेरा, चमेली और सदाबहार जैसे करीब 70 पौधे लगाए गए हैं। इनमें औषधीय, सजावटी और पर्यावरण के लिए लाभकारी पौधों का संतुलित संयोजन देखने के लिए मिला है। यह बगिया न केवल आसपास के वातावरण को शुद्ध रखती है बल्कि लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
डॉ. ज्योतिराज बताती हैं कि बगिया लगाने का उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। तुलसी, ऐलोवेरा और अजवाइन के पौधे जहां स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी हैं वहीं, बांस और कैक्टस जैसे पौधे वातावरण में ऑक्सीजन संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। चमेली और सदाबहार जैसे फूलों ने इस बगिया को आकर्षक रूप भी प्रदान किया है।
विज्ञापन
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता केवल भाषणों तक सीमित न रहकर जब व्यवहार में उतरती है तभी उसका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। वह अपनी इसी सोच को साकार कर रही है। उनके पति राजबीर सिंह मुरथल विवि से सेवानिवृत्त हुए तो सालभर पहले ही एल्डिको काउंटी में आसियाना बनाया।
डॉ. ज्योतिराज की मुरथल विवि में बनाई गई बगिया में करीब 300 पौधे थे। अब एल्डिको में भी पहले की तरह बेहतरीन बगिया बनाने में लगी हैं। शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ. ज्योतिराज की यह पहल समाज के लिए एक संदेश है कि थोड़े से प्रयास और लगन से हर व्यक्ति अपने आसपास हरियाली की एक छोटी दुनिया बसा सकता है।
विज्ञापन
डॉ. ज्योतिराज ने अपनी बगिया में बांस, अजवाइन, बटन बेल, तुलसी, कैक्टस, ऐलोवेरा, चमेली और सदाबहार जैसे करीब 70 पौधे लगाए गए हैं। इनमें औषधीय, सजावटी और पर्यावरण के लिए लाभकारी पौधों का संतुलित संयोजन देखने के लिए मिला है। यह बगिया न केवल आसपास के वातावरण को शुद्ध रखती है बल्कि लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
विज्ञापन
डॉ. ज्योतिराज बताती हैं कि बगिया लगाने का उद्देश्य केवल सौंदर्य बढ़ाना नहीं बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। तुलसी, ऐलोवेरा और अजवाइन के पौधे जहां स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी हैं वहीं, बांस और कैक्टस जैसे पौधे वातावरण में ऑक्सीजन संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। चमेली और सदाबहार जैसे फूलों ने इस बगिया को आकर्षक रूप भी प्रदान किया है।
विज्ञापन
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता केवल भाषणों तक सीमित न रहकर जब व्यवहार में उतरती है तभी उसका वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। वह अपनी इसी सोच को साकार कर रही है। उनके पति राजबीर सिंह मुरथल विवि से सेवानिवृत्त हुए तो सालभर पहले ही एल्डिको काउंटी में आसियाना बनाया।
डॉ. ज्योतिराज की मुरथल विवि में बनाई गई बगिया में करीब 300 पौधे थे। अब एल्डिको में भी पहले की तरह बेहतरीन बगिया बनाने में लगी हैं। शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ. ज्योतिराज की यह पहल समाज के लिए एक संदेश है कि थोड़े से प्रयास और लगन से हर व्यक्ति अपने आसपास हरियाली की एक छोटी दुनिया बसा सकता है।