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उम्मीद की मशाल: जरूरतमंद छात्राओं के जीवन में शिक्षा की लौ जला रहीं डॉ. अनीता सिंह, कर रही यह काम

Mon, 01 Aug 2022 06:57 PM IST
भूपेंद्र सिंह विष्णु कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
विष्णु कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 01 Aug 2022 06:57 PM IST
सार

अनीता सिंह 1992 से अब तक 500 जरूरतमंद छात्राओं के कॉलेज और स्कूल की फीस जमा करा चुकी हैं। चालू शैक्षणिक सत्र में भी 21 छात्राओं की फीस का भुगतान कर रहीं है। उनके 12 शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। 

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Dr Anita Singh is providing education to needy girl students in Sonipat
पौधों में पानी देतीं डॉ. अनीता सिंह। इनरव्हील क्लब के कार्यक्रम में डॉ. सिंह को पुरस्कृत करते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जरूरतमंद इंसान की मदद करना ही भगवान की सच्ची भक्ति है। आप जब उसके बंदों व प्रकृति की सेवा करते हो तो आपकी ईश्वर पूरी मदद करता है। आपको पता भी नहीं चलता और आप जो करना चाहते थे वह सहजता से हो जाता है। इसलिए हम सभी को जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। यह कहना है टीकाराम कन्या महाविद्यालय की सेवानिवृत्त उप प्राचार्य एवं इनरव्हील क्लब की पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनीता सिंह का। डॉ. अनीता सिंह 30 सालों से जरूरतमंद छात्राओं की आर्थिक रूप से सहायता करती आ रही हैं। वे अब तक ऐसी करीब 500  छात्राओं की फीस का भुगतान कर चुकी हैं। 

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डॉ. अनीता सिंह का कहना है कि ईश्वर ने अगर उन्हें इतना सक्षम बनाया है कि उसकी बनाई प्रकृति जिसमें इंसान भी शामिल हैं कि मदद कर सकें, तो हमें अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। यह मदद आर्थिक रूप से ही नहीं, किसी भी रूप में हो सकती है। बशर्ते उसे निस्वार्थ भावना से किया जाए।
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व्यस्तता के कारण मैं बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाती थी। ईश्वर ने उस कमी को पूरा किया, मेरा बड़ा बेटा विनित खर्ब मुंबई रेलवे में सीनियर डिविजनल कमिश्नर है। छोटा बेटा विक्रम खर्ब वायु सेना में विंग कमांडर है। पति डॉ. रणबीर वर्ष 2012 में पशुपालन विभाग से बतौर उप निदेशक सेवानिवृत्त हुए और मैं वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुई।
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अब मैं अपना पूरा समय ध्यान व पर्यावरण संरक्षण को दे रही हूं। साथ कई सामाजिक व पर्यावरण संरक्षण में जुटी संस्थाओं से जुड़ी हुई हूं। पैसों की कमी के कारण कोई भी छात्रा पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके लिए हमेशा उनकी सहायता के लिए तत्पर रहती हूं। 

Dr Anita Singh is providing education to needy girl students in Sonipat
सांकेतिक तस्वीर

विरासत में मिले सेवाभाव के गुण
डॉ. अनीता सिंह मूलरूप से गांव रिंढाणा की रहने वाली हैं। वह बताती हैं कि उनका परिवार शुरू से ही रोहतक में रहा है। दादा कुंजाराम व पिता किशन लाल नरवाल हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। वे पढ़ाई का महत्व जानते थे। जिस समय लड़कियों की पढ़ाई को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी, उस समय उन्होंने तीन बहनों व एक भाई को उच्चतर शिक्षा दिलवाई।

मैंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एम फिल व पीएचडी की। भाई नरेश नरवाल वर्ततान में करनाल में नगर निगम कमिश्नर हैं। अच्छे पदों पर आसीन होने के बावजूद भी जरूरतमंदों की मदद करने से कभी पीछे नहीं रहे। लोगों की सेवा करने का भाव हमें विरासत में मिला है। डॉ. सिंह कहती हैं कि जब तक सांस रहेगी, तब तक प्रकृति की सेवा करती रहेंगी। 

ऐसे शुरू हुआ सेवा का सफर
डॉ. अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 1988 में सीआरए कॉलेज मेें बतौर सहायक प्रोफेसर भूगोल ज्वाइन किया था। वर्ष 1992 में वह टीकाराम कन्या महाविद्यालय में आ गई। इसी साल अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें एक लड़की ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उस लड़की की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन वह आगे पढ़ना चाहती थी। बस मन में उस लड़की के लिए कुछ करने का मन किया और उसे अपने कॉलेज में दाखिला दिलवाया।

उसकी फीस खुद वहन की। उसके बाद से जब भी किसी लड़की के बारे में पता लगता कि वह आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित है तो उसकी मदद करती हूं। 30 सालों से यह सिलसिला बरकरार है और जीवन पर्यंत चलता रहेगा। सेवाभाव के साथ ही डॉ. अनीता सिंह के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक 12 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. अनीता सिंह को 2021-22 में आध्यात्मिक उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। वहीं 28 जून को दिल्ली में आयोजित इनर व्हील क्लब के वार्षिक समारोह में 21 पुरस्कार जीते। 

30 सालों से ध्यान और योग का दे रहीं प्रशिक्षण 
डॉ. अनीता सिंह ने बताया कि वह साल 1992 में श्रीरामचंद मिशन के साथ जुड़ीं, जो 163 देशों में ध्यान लगाने की निशुल्क सेवा दे रहा है। यहां ध्यान लगाना सीखा और पता लगा कि ध्यान हमारे शरीर, मन व आत्मा का पोषण करता है। उसके बाद महाविद्यालय में अध्यापिकाओं व छात्राओं को ध्यान व योग कराती थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी निशुल्क ध्यान व योग का सिलसिला जारी है।

डॉ. अनीता सिंह वर्तमान में इनरव्हील क्लब एनसीआर जोन की पर्यावरण कमेटी की को-चेयरपर्सन हैं। मानव अधिकार संरक्षण संघ, सारथी जन चेतना, जनहित फाउंडेशन, सशक्त नारी संगठन, रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य होने के साथ ही पर्यावरण संगठनों के साथ जुड़कर सामाजिक कार्यों में लगी रहती हैं। उनका कहना है कि जब हमें इस धरती को छोड़ना ही है तो क्यों न भावी पीढ़ी के लिए कुछ न कुछ करके जाएं।

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