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Sonipat News: जच्चा की मौत पर चिकित्सक की तय होगी जवाबदेही
Tue, 07 Jul 2026 05:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 07 Jul 2026 05:49 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। प्रदेश में पहली बार 'जीरो मैटरनल डेथ' (शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु) पखवाड़ा शुरू हुआ है। स्वास्थ्य विभाग 22 जुलाई तक यह विशेष अभियान चलाएगा। सिविल सर्जन कार्यालय में एक वॉर रूम भी बनाया गया है। पखवाड़े के दौरान जच्चा की मौत होने पर संबंधित चिकित्सक की जवाबदेही तय होगी।
मातृ मृत्यु के मामले छिपाने या लापरवाही बरतने पर प्रशासनिक कार्रवाई होगी। पिछले साल जिले में 76 प्रसूताओं की मौत हुई थी। चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह में एक मौत हो चुकी है।
इस पखवाड़े में मुख्य जोर गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी पर है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान की जाएगी। सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का नियमित फॉलोअप होगा।
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जटिलता के संकेत मिलने पर महिला को तुरंत रेफर किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्टाफ नर्स और चिकित्सा अधिकारी घर-घर संपर्क करेंगे। वे गर्भवती महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ेंगे।
प्रसव के बाद की निगरानी
सामान्य प्रसव के बाद महिला को 36 से 48 घंटे अस्पताल में रखना अनिवार्य है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम 72 घंटे अस्पताल में रहना होगा। आशा कार्यकर्ता और एएनएम प्रसव के बाद 42 दिन तक गृह भ्रमण करेंगी। वे मां और नवजात के स्वास्थ्य की निगरानी करेंगी। हाई रिस्क मामलों में हर दूसरे दिन फॉलोअप होगा। निजी अस्पतालों में नो रिफ्यूजल पॉलिसी लागू की गई है। प्राथमिक उपचार दिए बिना रेफर या डिस्चार्ज करने पर रोक है। ऐसा करने पर निजी अस्पताल संचालकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
वर्जन
रोजाना मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसमें सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी की संख्या का ब्योरा होगा। साथ ही रेफर की गई महिलाओं की जानकारी भी दी जाएगी। -डॉ. नीरज यादव, उप सिविल सर्जन
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सोनीपत। प्रदेश में पहली बार 'जीरो मैटरनल डेथ' (शून्य निवारणीय मातृ मृत्यु) पखवाड़ा शुरू हुआ है। स्वास्थ्य विभाग 22 जुलाई तक यह विशेष अभियान चलाएगा। सिविल सर्जन कार्यालय में एक वॉर रूम भी बनाया गया है। पखवाड़े के दौरान जच्चा की मौत होने पर संबंधित चिकित्सक की जवाबदेही तय होगी।
मातृ मृत्यु के मामले छिपाने या लापरवाही बरतने पर प्रशासनिक कार्रवाई होगी। पिछले साल जिले में 76 प्रसूताओं की मौत हुई थी। चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह में एक मौत हो चुकी है।
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इस पखवाड़े में मुख्य जोर गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी पर है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान की जाएगी। सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना भी इसका लक्ष्य है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का नियमित फॉलोअप होगा।
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जटिलता के संकेत मिलने पर महिला को तुरंत रेफर किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्टाफ नर्स और चिकित्सा अधिकारी घर-घर संपर्क करेंगे। वे गर्भवती महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ेंगे।
प्रसव के बाद की निगरानी
सामान्य प्रसव के बाद महिला को 36 से 48 घंटे अस्पताल में रखना अनिवार्य है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम 72 घंटे अस्पताल में रहना होगा। आशा कार्यकर्ता और एएनएम प्रसव के बाद 42 दिन तक गृह भ्रमण करेंगी। वे मां और नवजात के स्वास्थ्य की निगरानी करेंगी। हाई रिस्क मामलों में हर दूसरे दिन फॉलोअप होगा। निजी अस्पतालों में नो रिफ्यूजल पॉलिसी लागू की गई है। प्राथमिक उपचार दिए बिना रेफर या डिस्चार्ज करने पर रोक है। ऐसा करने पर निजी अस्पताल संचालकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
वर्जन
रोजाना मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसमें सामान्य और सिजेरियन डिलीवरी की संख्या का ब्योरा होगा। साथ ही रेफर की गई महिलाओं की जानकारी भी दी जाएगी। -डॉ. नीरज यादव, उप सिविल सर्जन