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जिले के एक दर्जन गांवों की 1000 एकड़ से ज्यादा जमीन का यूपी संग चल रहा 50 साल पुराना विवाद निपटाने को कराया जाएगा सीमांकन
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यूपी के बागपत में हुई मीटिंग में मौजूद सोनीपत के अधिकारी
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। जिले के एक दर्जन गांवों की एक हजार एकड़ से ज्यादा जमीन को लेकर यूपी के बागपत जिले के किसानों संग 50 साल से चल रहा विवाद अब निपटाने को दोनों प्रदेशों का सीमांकन कराया जाएगा। यमुना खादर के अंदर सोनीपत व यूपी की जमीन का सीमांकन होगा और इसकी रिपोर्ट तैयार कर उसके आधार पर विवाद सुलझाने का प्रयास होगा। यूपी के बागपत जिले में सोनीपत, पानीपत, शामली के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में यह फैसला लिया गया है और सोनीपत व बागपत की जमीन का 25 नवंबर से 2 दिसंबर तक सीमांकन किया जाएगा। हालांकि इस विवाद के बढ़ने पर 1974 में दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों सोनीपत व बागपत की सीमा निर्धारित करके पिलर भी लगवाए गए थे, लेकिन उसके बाद पिलर उखाड़े जाने से विवाद दोबारा से बढ़ गया और इसको लेकर खूनी संघर्ष शुरू हो गए। इसको लेकर लगातार विवाद होता रहता है और इस कारण ही अब अधिकारी सक्रियता दिखा रहे हैं।
हरियाणा व यूपी के बीच यमुना है और इससे ही दोनों प्रदेशों का सीमांकन होता है। यमुना की धार हर बार बरसात में बदल जाती है और इस कारण ही हरियाणा की जमीन यूपी की ओर जाने पर वहां के किसान उसपर कब्जा कर लेते हैं। उस जमीन को लेकर ही काफी समय से विवाद चल रहा है और यह विवाद 1970 से पहले से चल रहा है। इस विवाद के बढ़ने पर कें द्र सरकार ने तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया और दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए। यह अवार्ड 1974 में किया गया और समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन कर दिया गया था। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उसपर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उसपर यूपी के किसान काबित होंगे। उसपर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उसपर कब्जा नहीं दिलवाया गया और यह विवाद लगातार बढ़ता गया। इस विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हुआ है और इसमें काफी मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक यह विवाद नहीं सुलझा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए ही बुधवार को यूपी के बागपत जिले में सोनीपत, पानीपत, शामली के अधिकारियों की मीटिंग हुई। उस मीटिंग में सोनीपत से तहसीलदार विकास मलिक रिकार्ड के साथ शामिल हुए तो चंडीगढ़ से सर्वेयर करतार सिंह भी पहुंचे। उस मीटिंग में फैसला लिया गया कि सोनीपत व बागपत की जमीन का सीमांकन किया जाएगा और यह सीमांकन 25 नवंबर से 2 दिसंबर तक होगा। इसके लिए दोनों जगह के अधिकारी मौजूद रहेंगे और वह एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। उस सीमांकन के आधार पर दोनों प्रदेशों की सीमा पर पिलर लगाए जाएंगे, जिससे यह विवाद आगे नहीं बढ़ सके। इसके साथ ही यह फैसला लिया गया है कि इसमें कोई भी अधिकारी लापरवाही नहीं बरतेगा और इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।
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एक दर्जन गांवों की 1000 एकड़ से ज्यादा जमीन का विवाद
जिले के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर आदि गांवों की जमीन यमुना में यूपी की ओर गई है। जिसको वापस लेने के लिए किसान काफी समय से जद्दोजहद कर रहे है, लेकिन यूपी के किसान उस जमीन पर कब्जा देने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण ही यह विवाद बढ़ता जा रहा है और किसान लगातार अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे है। अब जिस तरह से सीमांकन करने की बात कही जा रही है, उससे कुछ उम्मीद जगी है कि किसानों को अपनी जमीन वापस मिल जाएगी। लेकिन अब देखना होगा कि सीमांकन होता है या नहीं।
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हरियाणा व यूपी के किसानों के बीच चल रहा जमीन का विवाद सुलझाने के लिए बागपत में मीटिंग हुई थी। जिसमें तहसीलदार गए थे और वहां दोबारा से सीमांकन कराने की बात हुई है। उस सीमांकन को कबतक कराया जाता है और किस तरह की स्थिति बनती है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। -विजय सिंह, एसडीएम
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हरियाणा व यूपी के बीच यमुना है और इससे ही दोनों प्रदेशों का सीमांकन होता है। यमुना की धार हर बार बरसात में बदल जाती है और इस कारण ही हरियाणा की जमीन यूपी की ओर जाने पर वहां के किसान उसपर कब्जा कर लेते हैं। उस जमीन को लेकर ही काफी समय से विवाद चल रहा है और यह विवाद 1970 से पहले से चल रहा है। इस विवाद के बढ़ने पर कें द्र सरकार ने तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया और दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए। यह अवार्ड 1974 में किया गया और समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन कर दिया गया था। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उसपर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उसपर यूपी के किसान काबित होंगे। उसपर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उसपर कब्जा नहीं दिलवाया गया और यह विवाद लगातार बढ़ता गया। इस विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हुआ है और इसमें काफी मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक यह विवाद नहीं सुलझा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए ही बुधवार को यूपी के बागपत जिले में सोनीपत, पानीपत, शामली के अधिकारियों की मीटिंग हुई। उस मीटिंग में सोनीपत से तहसीलदार विकास मलिक रिकार्ड के साथ शामिल हुए तो चंडीगढ़ से सर्वेयर करतार सिंह भी पहुंचे। उस मीटिंग में फैसला लिया गया कि सोनीपत व बागपत की जमीन का सीमांकन किया जाएगा और यह सीमांकन 25 नवंबर से 2 दिसंबर तक होगा। इसके लिए दोनों जगह के अधिकारी मौजूद रहेंगे और वह एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। उस सीमांकन के आधार पर दोनों प्रदेशों की सीमा पर पिलर लगाए जाएंगे, जिससे यह विवाद आगे नहीं बढ़ सके। इसके साथ ही यह फैसला लिया गया है कि इसमें कोई भी अधिकारी लापरवाही नहीं बरतेगा और इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।
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एक दर्जन गांवों की 1000 एकड़ से ज्यादा जमीन का विवाद
जिले के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर आदि गांवों की जमीन यमुना में यूपी की ओर गई है। जिसको वापस लेने के लिए किसान काफी समय से जद्दोजहद कर रहे है, लेकिन यूपी के किसान उस जमीन पर कब्जा देने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण ही यह विवाद बढ़ता जा रहा है और किसान लगातार अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे है। अब जिस तरह से सीमांकन करने की बात कही जा रही है, उससे कुछ उम्मीद जगी है कि किसानों को अपनी जमीन वापस मिल जाएगी। लेकिन अब देखना होगा कि सीमांकन होता है या नहीं।
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हरियाणा व यूपी के किसानों के बीच चल रहा जमीन का विवाद सुलझाने के लिए बागपत में मीटिंग हुई थी। जिसमें तहसीलदार गए थे और वहां दोबारा से सीमांकन कराने की बात हुई है। उस सीमांकन को कबतक कराया जाता है और किस तरह की स्थिति बनती है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। -विजय सिंह, एसडीएम