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Sonipat News: पानीपत के लिए... शादी के बाद भी नहीं छोड़ी पढ़ाई, जेआरएफ में नैंसी देश में अव्वल
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- शादी के दो साल बाद भी नहीं थमी पढ़ाई, रोजाना 14 से 16 घंटे की मेहनत से हासिल की सफलताफोटो 36: नैंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर। गांव ठरू निवासी 27 वर्षीय नैंसी ने यूजीसी-सीएसआईआर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। मूल रूप से पानीपत की रहने वाली नैंसी शिव नादर विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा से फिजिक्स में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोधकार्य अंतिम वर्ष में है। अब उनका लक्ष्य प्रोफेसर बनना है।
नैंसी की शादी दो साल पहले ठरू निवासी अमित से हुई थी। शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। वह छात्रावास में रहकर पीएचडी और जेआरएफ की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल से फिजिक्स में एमएससी की थी। एमएससी में प्रवेश परीक्षा में भी उन्होंने प्रथम रैंक हासिल की थी।
शोधकार्य के लिए गई थीं जर्मनी
पीएचडी के दौरान नैंसी को शोधकार्य के लिए जर्मनी जाने का अवसर मिला। वह करीब चार साल से जेआरएफ की तैयारी कर रही थीं। ऑनलाइन कोचिंग के साथ उन्होंने स्वअध्ययन पर जोर दिया। विश्वविद्यालय में सुबह नौ से शाम पांच बजे तक कक्षाओं और शोधकार्य के बाद वह लाइब्रेरी में तैयारी करती थीं। परीक्षा के दौरान कई बार उनका पढ़ाई का समय 14 से 16 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच गया।
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नैंसी का कहना है कि शादी के बाद परिवार का सहयोग मिलने से पढ़ाई और शोध जारी रखना आसान हुआ। उनका लक्ष्य शोध के क्षेत्र में आगे बढ़कर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनना है।
सफलता में सास-ससुर विशेष योगदान
नैंसी अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग को देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से ससुर अशोक कुमार और सास सरोज बाला का आभार जताया। उनका कहना है कि ससुराल में पढ़ाई को लेकर उन्हें पूरा सहयोग मिला। परिवार ने जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर। गांव ठरू निवासी 27 वर्षीय नैंसी ने यूजीसी-सीएसआईआर जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। मूल रूप से पानीपत की रहने वाली नैंसी शिव नादर विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा से फिजिक्स में पीएचडी कर रही हैं। उनका शोधकार्य अंतिम वर्ष में है। अब उनका लक्ष्य प्रोफेसर बनना है।
नैंसी की शादी दो साल पहले ठरू निवासी अमित से हुई थी। शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। वह छात्रावास में रहकर पीएचडी और जेआरएफ की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल से फिजिक्स में एमएससी की थी। एमएससी में प्रवेश परीक्षा में भी उन्होंने प्रथम रैंक हासिल की थी।
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शोधकार्य के लिए गई थीं जर्मनी
पीएचडी के दौरान नैंसी को शोधकार्य के लिए जर्मनी जाने का अवसर मिला। वह करीब चार साल से जेआरएफ की तैयारी कर रही थीं। ऑनलाइन कोचिंग के साथ उन्होंने स्वअध्ययन पर जोर दिया। विश्वविद्यालय में सुबह नौ से शाम पांच बजे तक कक्षाओं और शोधकार्य के बाद वह लाइब्रेरी में तैयारी करती थीं। परीक्षा के दौरान कई बार उनका पढ़ाई का समय 14 से 16 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच गया।
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नैंसी का कहना है कि शादी के बाद परिवार का सहयोग मिलने से पढ़ाई और शोध जारी रखना आसान हुआ। उनका लक्ष्य शोध के क्षेत्र में आगे बढ़कर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनना है।
सफलता में सास-ससुर विशेष योगदान
नैंसी अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग को देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से ससुर अशोक कुमार और सास सरोज बाला का आभार जताया। उनका कहना है कि ससुराल में पढ़ाई को लेकर उन्हें पूरा सहयोग मिला। परिवार ने जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी की।