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Sonipat News: पेरिस पैरालंपिक में धर्मबीर ने जीता सोना, 7 सितंबर को लौटेंगे स्वदेश, दूध-पेड़े से करेंगे स्वागत

Fri, 06 Sep 2024 06:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 06 Sep 2024 06:28 AM IST
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Dharambir won gold in Paris Paralympics, will return home on 7th September, will be welcomed with milk and peda
सोनीपत। पेरिस पैरालंपिक के पुरुष वर्ग की क्लब थ्रो एफ-51 में सोनीपत के गांव भदाना फिलहाल विशाल नगर निवासी भीम अवार्डी धर्मबीर नैन ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला हैं। धर्मबीर के साेना जीतने के बाद देश के साथ जिले एवं परिवार में जश्न का माहौल है। परिजन व खेल प्रेमी आपस में मिठाई बांटकर खुशी मना रहे हैं। बुआ इंद्रावती ने कहा कि बेटे ने नाम रोशन किया है, स्वदेश लौटने पर दूध पेड़े के साथ स्वागत किया जाएगा।
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अमर उजाला से खास बातचीत मां प्रेमवती ने बताया कि वह बेटे के पदक जीतने से बहुत खुश हैं। धर्मबीर ने पदक जीतकर पूरे परिवार व गांव का नाम ऊंचा किया हैं। उन्होंने बताया कि बेटे धर्मबीर का स्वदेश लौटने पर ढोल नगाड़े के साथ स्वागत किया जाएगा। बेटे का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। बुआ इंद्रावती ने बताया कि एक समय ऐसा था जब बेटे का हादसे के कारण कमर से नीचे का हिस्सा निष्क्रिय हो गया था, अब बेटे ने स्वर्ण पदक जीतकर हमारा नाम रोशन किया है। वहीं, पत्नी ज्योति ने बताया कि धर्मबीर सुबह-शाम कड़ा अभ्यास करते थे। उन्होंने सभी चीजों को दरकिनार करके केवल पैरालंपिक में देश को पदक दिलाने के लिए जी तोड़ मेहनत की थी। आज उनकी मेहनत रंग लाई है। धर्मबीर 7 सितंबर को स्वदेश लौटेंगे। इसके बाद धूमधाम से उनका स्वागत किया जाएगा।
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धर्मबीर ने पेरिस में अपने ही एशियाई रिकॉर्ड को तोड़कर स्वर्ण पदक जीता है। पेरिस पैरालंपिक की एफ-51 स्पर्धा में धर्मबीर नैन के पहले चार थ्रो अमान्य रहे। उन्होंने हौसला न हारते हुए स्पर्धा की पांचवीं बारी में 34.92 का स्वर्णिम थ्रो किया। धर्मबीर नैन इससे पहले रियो व टोक्यो पैरालंपिक में पदक नहीं जीत सके थे। उन्होंने पेरिस रवाना होने से पहले कहा था कि इस बार देश को सोना दिलाकर ही लौटूंगा। उन्होंने बताया था कि मैं पेरिस पैरालंपिक के लिए पूरी तरह तैयार हूं। धर्मबीर ने प्रतियोगिता के लिए सुबह शाम कड़ा अभ्यास किया था।
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हौसले से बुलंदी छूने की मिसाल हैं धर्मबीर नैन
मां प्रेमवती व बुआ इंद्रावती ने बताया कि धर्मबीर नैन वर्ष 2012 में नहर में नहाने के लिए गए थे, यहां उन्होंने नहर में छलांग लगाई, लेकिन जलस्तर कम होने से गर्दन सीधा तलहटी से जा टकराई। हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई व आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया था। हादसे में आधा शरीर निष्क्रिय होने के बाद भी धर्मबीर ने हार नहीं मानी। अमित सरोहा को धर्मबीर ने भी अपना गुरु बनाया और प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। अब उन्होंने अपने बुलंद हौसले व मेहनत के दम पर देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला है। परिजनों का कहना है कि वह बहुत खुश हैं। धर्मबीर ने पेरिस में सोना जीतकर देश, प्रदेश व जिले का नाम ऊंचा किया है। 7 सितंबर को देश लौटने पर धर्मबीर का भव्य स्वागत किया जाएगा।
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