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Sonipat News: मां ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा की आराधना करने उमड़े श्रद्धालु
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फोटो 32- सोनीपत के कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना
सोनीपत। चैत्र नवरात्र के दूसरे और तीसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी व चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में विधिविधान से दोनों माताओं की पूजा कर खुशहाली की कामना की। नवरात्र को लेकर शहरभर के मंदिरों को लाइटों, रंग-बिरंगी लड़ियों और फूलों से सजाया गया है।
हलवाई हट्टा स्थित श्री देवी चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ, गांव चिटाना स्थित चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ, कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर, माॅडल टाउन स्थित नवदुर्गा माता मंदिर, माता चिंतपूर्णी मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कई मंदिरों व घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया।
पंडित अमित शौनक ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। बाघ पर सवार मां दुर्गा की तीसरी शक्ति देवी चंद्रघंटा के मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी व संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है। मंगलवार को नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा का पूजन होगा।
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पांडवों ने मठ की स्थापना कर श्री चंडी की पूजा कर किया था युद्ध में प्रस्थान
कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर का इतिहास करीब साढ़े पांच हजार वर्ष पुराना है। पुजारी पंडित हनुमान प्रसाद पाठक ने बताया कि सोनीपत के नाम से विख्यात स्वर्णप्रस्थ नगरी में पांडवों ने महाभारत काल के दौरान छोटे से मठ की स्थापना कर श्री चंडी महाकाली की पूजा-अर्चना कर युद्ध में प्रस्थान किया था। इसके बाद मठ को ग्राम देवी के नाम से भी जाना जाने लगा। समय के साथ लोग इन्हें अपनी कुल देवी मानने लगे। कई वर्षों के बाद स्थानीय लोगों ने ही मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। वर्ष 1540 से 1545 तक शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में कामी मार्ग की स्थापना करवाई थी। अब इस मार्ग को कामी रोड के नाम से जाना जाता है। श्री चंडी मां महाकाली मंदिर के प्रति सोनीपत ही नहीं, बल्कि समस्त हरियाणा के साथ दिल्ली, पंजाब व राजस्थान के श्रद्धालुओं में भी काफी आस्था है। मंदिर में मां चंडी महाकाली के स्वरूप की आराधना करने से हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।
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हलवाई हट्टा स्थित श्री देवी चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ, गांव चिटाना स्थित चिटाने वाली माता मंदिर सिद्धपीठ, कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर, माॅडल टाउन स्थित नवदुर्गा माता मंदिर, माता चिंतपूर्णी मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कई मंदिरों व घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया गया।
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पंडित अमित शौनक ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। बाघ पर सवार मां दुर्गा की तीसरी शक्ति देवी चंद्रघंटा के मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान हैं, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी व संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है। मंगलवार को नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा का पूजन होगा।
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पांडवों ने मठ की स्थापना कर श्री चंडी की पूजा कर किया था युद्ध में प्रस्थान
कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर का इतिहास करीब साढ़े पांच हजार वर्ष पुराना है। पुजारी पंडित हनुमान प्रसाद पाठक ने बताया कि सोनीपत के नाम से विख्यात स्वर्णप्रस्थ नगरी में पांडवों ने महाभारत काल के दौरान छोटे से मठ की स्थापना कर श्री चंडी महाकाली की पूजा-अर्चना कर युद्ध में प्रस्थान किया था। इसके बाद मठ को ग्राम देवी के नाम से भी जाना जाने लगा। समय के साथ लोग इन्हें अपनी कुल देवी मानने लगे। कई वर्षों के बाद स्थानीय लोगों ने ही मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। वर्ष 1540 से 1545 तक शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में कामी मार्ग की स्थापना करवाई थी। अब इस मार्ग को कामी रोड के नाम से जाना जाता है। श्री चंडी मां महाकाली मंदिर के प्रति सोनीपत ही नहीं, बल्कि समस्त हरियाणा के साथ दिल्ली, पंजाब व राजस्थान के श्रद्धालुओं में भी काफी आस्था है। मंदिर में मां चंडी महाकाली के स्वरूप की आराधना करने से हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।

फोटो 32- सोनीपत के कामी रोड स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री चंडी मां महाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना