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साफियाबाद के चार और मरीजों में हुई डेंगू की पुष्टि
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
Updated Mon, 14 Sep 2015 12:17 AM IST
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दिल्ली बॉर्डर के आसपास सटे गांवों में डेंगू का डंक लोगों पर भारी पड़ता जा रहा है। खासकर गांव साफियाबाद में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या पर फिलहाल कोई नियंत्रण नहीं दिखाई दे रहा। इस गांव में अब फिर से डेंगू के चार नए मामलों की पुष्टि हुई है। साथ ही जिले में अब डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 41 तक पहुंच चुकी है।
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इससे पहले भी इसी गांव से डेंगू के 12 अन्य मामले की पुष्टि की जा चुकी है। वहीं जीटी रोड बेल्ट में स्वास्थ्य विभाग के अभियान के बाद भी बुखार पीड़ित मरीजों में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में डेंगू के संभावित मरीजों का लगातार उपचार चल रहा है।
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गांव साफियाबाद में नीलम और उसकी बेटी हिमांशी, अनुराग और सुमित डेंगू की चपेट में आ चुका है। इन सभी का फिलहाल सरकारी और निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। हालांकि इन सभी मरीजों की हालत में धीरे-धीरे सुधार होता जा रहा है।
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संभावना है कि एक से दो दिनों के अंदर इन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाए। गांव साफियाबाद में पहले भी डेंगू की पुष्टि की जा चुकी है। इसके बाद से इस गांव में मलेरिया विभाग की टीम ने विशेष अभियान चलाकर फॉगिंग के जरिए मच्छरों पर नियंत्रण की कोशिश की, लेकिन बावजूद डेंगू बुखार की चपेट में लोग लगातार आ रहे हैं।
निजी अस्पताल जमकर काट रहे चांदी
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों को निजी अस्पताल की ओर भी दौड़ लगानी पड़ रही है। खुद को बुखार से निजात पाने के लिए मरीजों को अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ रही है। डेंगू बुखार के नाम पर प्लेटलेट्स चढ़ाने को के लिए कई निजी अस्पताल हजारों रुपये वसूल रहे हैं।
मलेरिया विभाग ने की लोगों से अपील
गांव बेगा से लेकर अन्य गांवों में डेंगू के प्रकोप से बचने के लिए मलेरिया विभाग ने लोगों से विशेष रूप से अपील की है। विभाग ने आह्वान किया है कि ऐसे में यदि लोग जागरूक हो जाएं तो मच्छरों का लार्वा बनने से रोका जा सकेगा। मलेरिया विभाग की ओर से कहा गया है कि लोगों को मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसमें आम लोगों की भी भागीदारी महत्वपूर्ण है।
बुखार पीड़ित मरीजों पर नियंत्रण पाने के लिए सभी कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। विभाग के साथ-साथ आम लोग भी यदि जागरूक रहें तो मच्छरों के लार्वा बनने से पहले इसका खात्मा किया जा सकता है।
-बलबीर सिंह, जिला स्वास्थ्य निरीक्षक, मलेरिया विभाग