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यूक्रेन में भय में बीत रहे विद्यार्थियों के दिन और रात
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यूक्रेन में प्रतीक के फंसने के बाद चिंता में बैठी उसकी माता अनुराधा और पिता गौतम। संवाद
- फोटो : Sonipat
गन्नौर शहर के कई मेडिकल छात्र यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। जिसके चलते परिजनों की चिंता बढ़ गई है। कर्नाटक के छात्र की मौत के बाद गन्नौर के छात्रों के परिजनों को भी चिंता सताने लगी है।
गन्नौर के दो भाई ऋषभ वर्ष 2018 और प्रतीक दिसंबर, 2020 में यूक्रेन के विनितशा शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए गए थे। ऋषभ का फाइनल सेमेस्टर है और प्रतीक अभी दूसरे सेमेस्टर का छात्र है। यहां रह रहे उनके परिजनों को उनकी चिंता सता रही है। उनके पिता डॉ. गौतम ने बताया कि वह 24 फरवरी से लगातार अपने बेटों के संपर्क में है। बीच में उनका अपने बेटों से संपर्क टूट गया था। उन्होंने 24 फरवरी को ही बेटे के खाते में पैसे भेजे थे, ताकि उन्हें खाने पीने की कोई दिक्कत न हो।
छोटा बेटा रोमानिया पहुंचा
डॉ. गौतम ने बताया कि उनका छोटा बेटा प्रतीक रोमानिया पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि वह टैक्सी लेकर बॉर्डर तक पहुंचा। उन्होंने इंडिया से 27 फरवरी को टैक्सी बुक थी। वह 18 घंटे का सफर तय कर 28 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गया। लेकिन लंबा जाम होने की वजह से उन्हें 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। अब वह रोमानिया है और पूरी तरह सुरक्षित है।
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स्वाति लीव के लिए हुई रवाना
गन्नौर शहर से मेडिकल छात्रा स्वाति वर्ष 2018 में खारकीव गई थी। वह 25 फरवरी से बंकर में थी। जहां उनके पास खाने की कोई सुविधा नहीं थी। किसी तरह वह 26 फरवरी को अपने फ्लैट में गई और खाना बनाकर खाया और वापस बंकर में आ गई। 28 को वह वापस फ्लैट पर आई और अपना सामान लेकर 1 मार्च को मेट्रो से लिव के लिए निकली है। फिलहाल इंडियन एंबेसी द्वारा उनकी कोई मदद नहीं की जा रही। पिता राजेश ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी समेत सभी छात्रों को सुरक्षित वतन वापस लाए जाए।
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गन्नौर के दो भाई ऋषभ वर्ष 2018 और प्रतीक दिसंबर, 2020 में यूक्रेन के विनितशा शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए गए थे। ऋषभ का फाइनल सेमेस्टर है और प्रतीक अभी दूसरे सेमेस्टर का छात्र है। यहां रह रहे उनके परिजनों को उनकी चिंता सता रही है। उनके पिता डॉ. गौतम ने बताया कि वह 24 फरवरी से लगातार अपने बेटों के संपर्क में है। बीच में उनका अपने बेटों से संपर्क टूट गया था। उन्होंने 24 फरवरी को ही बेटे के खाते में पैसे भेजे थे, ताकि उन्हें खाने पीने की कोई दिक्कत न हो।
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छोटा बेटा रोमानिया पहुंचा
डॉ. गौतम ने बताया कि उनका छोटा बेटा प्रतीक रोमानिया पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि वह टैक्सी लेकर बॉर्डर तक पहुंचा। उन्होंने इंडिया से 27 फरवरी को टैक्सी बुक थी। वह 18 घंटे का सफर तय कर 28 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गया। लेकिन लंबा जाम होने की वजह से उन्हें 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। अब वह रोमानिया है और पूरी तरह सुरक्षित है।
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स्वाति लीव के लिए हुई रवाना
गन्नौर शहर से मेडिकल छात्रा स्वाति वर्ष 2018 में खारकीव गई थी। वह 25 फरवरी से बंकर में थी। जहां उनके पास खाने की कोई सुविधा नहीं थी। किसी तरह वह 26 फरवरी को अपने फ्लैट में गई और खाना बनाकर खाया और वापस बंकर में आ गई। 28 को वह वापस फ्लैट पर आई और अपना सामान लेकर 1 मार्च को मेट्रो से लिव के लिए निकली है। फिलहाल इंडियन एंबेसी द्वारा उनकी कोई मदद नहीं की जा रही। पिता राजेश ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी समेत सभी छात्रों को सुरक्षित वतन वापस लाए जाए।

यूक्रेन में फंसी स्वाति अपनी साथी छात्राओं के साथ। - फोटो : Sonipat