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Sonipat: नाइजीरिया से की गई थी ट्रांसफार्मर निर्माता फैक्टरी के खाते से 1.89 करोड़ की ठगी, पांच गिरफ्तार
Thu, 15 Dec 2022 01:19 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 15 Dec 2022 01:19 AM IST
सार
वारदात को अंजाम देने के लिए 98 बैंक खातों का प्रयोग किया गया था। नोएडा के दिव्यांग अशोक सहित पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। नोएडा से फर्जी आधार कार्ड तैयार करा रखे थे।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के सोनीपत में बहालगढ़ रोड पर महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित ट्रांसफार्मर निर्माता फैक्टरी की ई-मेल व इंटरनेट बैंकिंग खाते को हैक कर 1.89 करोड़ की साइबर ठगी के मामले से पुलिस ने पर्दा उठा दिया है। साइबर ठगी को नाइजीरिया में बैठे साइबर ठग गैंग ने अंजाम दिया था। सोनीपत साइबर थाना पुलिस ने ठगी गैंग को रुपये ट्रांसफर करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों की पहचान मूलरूप से यूपी के इटावा गांव लहरोई फिलहाल नोएडा के सेक्टर-45 निवासी राजपाल उर्फ राजू मूलरूप से हाथरस के गांव सिकंदरा बाल्याण फिलहाल फरीदाबाद की कल्याणपुरी कॉलोनी निवासी लक्ष्मी उर्फ कीर्ति, नोएडा के सेक्टर-62 निवासी निवासी शैलेश, यूपी के जिला बलिया के गांव सलेमपुर चौरा फिलहाल गुरुग्राम के सेक्टर-49 निवासी अशोक यादव व सोनीपत के गांव रोहणा निवासी नरेंद्र के रूप में हुई है।
वारदात को अंजाम देने के लिए 98 बैंक खातों का प्रयोग किया गया था। बैंक खाते खुलवाने के लिए आरोपियों ने नोएडा से अलग-अलग नामों से फर्जी आधार कार्ड तैयार करा रखे थे। अब तक मामले में 50 आरोपियों की पहचान हो चुकी है। आठ राज्यों में फैले इस गैंग में शामिल आरोपियों की तलाश को अलग-अलग टीम गठित की गई हैं।
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महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित ईसीई फैक्टरी से कई राज्यों में विद्युत ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति की जाती है। कंपनी बड़ी-बड़ी फैक्टरियों में प्रयोग होने वाले ट्रांसफार्मर का निर्माण करती है। साइबर ठगों ने 1 अगस्त को फैक्टरी की ई-मेल और इंटरनेट बैंकिंग को हैक कर लिया गया था।
इनको नाइजीरिया के साइबर ठग डेन स्मिथ के गैंग ने हैक कराया था। साइबर ठगों ने फैक्टरी के खाते से 1.89 करोड़ रुपये की ठगी कर ली थी। इस रुपये उत्तर प्रदेश के वाराणसी, लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद, राजस्थान के जयपुर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मध्य प्रदेश के जबलपुर, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के हरिद्वार से निकाले गए थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी होने के एक घंटे के अंदर रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। खाते सीज कराने तक मात्र तीन लाख रुपये ही बचे थे। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद अब साइबर ठगी के रुपये ट्रांसफर कराने के लिए अपने खाते उपलब्ध कराने के पांच आरोपियों को दबोचा है।
बचने को अलग-अलग जगह जाकर रहने लगे आरोपी
साइबर ठगी के आरोपी अपना ठिकाना बदलते रहते थे। ठगी की वारदात करने के बाद वह दूसरे स्थान पर किराये का मकान लेकर रहने लगते थे। मामले में गिरफ्तार आरोपी अशोक यादव दिव्यांग है। अशोक की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के चलते पैर काम नहीं करते हैं। वह बैसाखियों के सहारे कृत्रिम पैरों पर चलता है। दिव्यांग अशोक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले ग्रुप का सरगना है। नरेंद्र कुमार उसका चालक है और फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम वहीं संभालता है। वह खाते खुलवा कर लोगों से उसकी बैंक किट प्राप्त कर लेता था। वहीं जिम्मेदारी के आधार पर खाता धारकों को कमीशन मिलता था। अभी तक पुलिस इनके 98 बैंक खातों की पहचान कर चुकी है।
चेन बनाकर काम करता है गैंग
बैंक साइबर ठगी के लिए चेन बनाकर काम करता है। गैंग के सदस्य आगे किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे बैंक खाते खुलवा कर उसकी किट उपलब्ध कराने का झांस देते है। यह इसके लिए खाता खुलवाने वाले को कमीशन देते थे। वह उसमें से कुछ राशि आगे अन्य को देकर उसका खाता खुलवा लेता और उसका डेबिट कार्ड व अन्य जानकारी गैंग के सदस्यों को देता था। जिसका प्रयोग व साइबर ठगी के रुपये निकालने में करते थे।
आरोपियों से यह हुआ बरामद
साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों से 26 हजार रुपये, 17 मोबाइल फोन, 67 बैंक खातों की चेक बुक, 21 बैंक खातों की पासबुक, 23 बैंक खातों के डेबिट कार्ड, छह पेन कार्ड और 20 आधार कार्ड बरामद किए हैं। इनमें 13 आधार कार्ड फर्जी हैं।
ईसीई फैक्टरी के साथ हुई साइबर ठगी का मामला चौकाने वाला था। मुख्य सरगना डेन स्मिथ नाइजीरिया में बैठा है। उसने गैंग के अलग-अलग ग्रुप बनाकर सभी को अलग-अलग तरीके से गैंग से जोड़ रखा है। गिरफ्तार आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले ग्रुप के हैं। इस गैंग का जाल देश के आठ राज्यों और पांच अन्य देशों में फैला है। अभी तक करीब 50 सदस्यों की पहचान कर ली गई है। -इंस्पेक्टर राजीव सिंह, प्रभारी, साइबर थाना सोनीपत
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आरोपियों की पहचान मूलरूप से यूपी के इटावा गांव लहरोई फिलहाल नोएडा के सेक्टर-45 निवासी राजपाल उर्फ राजू मूलरूप से हाथरस के गांव सिकंदरा बाल्याण फिलहाल फरीदाबाद की कल्याणपुरी कॉलोनी निवासी लक्ष्मी उर्फ कीर्ति, नोएडा के सेक्टर-62 निवासी निवासी शैलेश, यूपी के जिला बलिया के गांव सलेमपुर चौरा फिलहाल गुरुग्राम के सेक्टर-49 निवासी अशोक यादव व सोनीपत के गांव रोहणा निवासी नरेंद्र के रूप में हुई है।
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वारदात को अंजाम देने के लिए 98 बैंक खातों का प्रयोग किया गया था। बैंक खाते खुलवाने के लिए आरोपियों ने नोएडा से अलग-अलग नामों से फर्जी आधार कार्ड तैयार करा रखे थे। अब तक मामले में 50 आरोपियों की पहचान हो चुकी है। आठ राज्यों में फैले इस गैंग में शामिल आरोपियों की तलाश को अलग-अलग टीम गठित की गई हैं।
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महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित ईसीई फैक्टरी से कई राज्यों में विद्युत ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति की जाती है। कंपनी बड़ी-बड़ी फैक्टरियों में प्रयोग होने वाले ट्रांसफार्मर का निर्माण करती है। साइबर ठगों ने 1 अगस्त को फैक्टरी की ई-मेल और इंटरनेट बैंकिंग को हैक कर लिया गया था।
इनको नाइजीरिया के साइबर ठग डेन स्मिथ के गैंग ने हैक कराया था। साइबर ठगों ने फैक्टरी के खाते से 1.89 करोड़ रुपये की ठगी कर ली थी। इस रुपये उत्तर प्रदेश के वाराणसी, लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद, राजस्थान के जयपुर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, मध्य प्रदेश के जबलपुर, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के हरिद्वार से निकाले गए थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी होने के एक घंटे के अंदर रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। खाते सीज कराने तक मात्र तीन लाख रुपये ही बचे थे। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद अब साइबर ठगी के रुपये ट्रांसफर कराने के लिए अपने खाते उपलब्ध कराने के पांच आरोपियों को दबोचा है।
बचने को अलग-अलग जगह जाकर रहने लगे आरोपी
साइबर ठगी के आरोपी अपना ठिकाना बदलते रहते थे। ठगी की वारदात करने के बाद वह दूसरे स्थान पर किराये का मकान लेकर रहने लगते थे। मामले में गिरफ्तार आरोपी अशोक यादव दिव्यांग है। अशोक की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के चलते पैर काम नहीं करते हैं। वह बैसाखियों के सहारे कृत्रिम पैरों पर चलता है। दिव्यांग अशोक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले ग्रुप का सरगना है। नरेंद्र कुमार उसका चालक है और फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम वहीं संभालता है। वह खाते खुलवा कर लोगों से उसकी बैंक किट प्राप्त कर लेता था। वहीं जिम्मेदारी के आधार पर खाता धारकों को कमीशन मिलता था। अभी तक पुलिस इनके 98 बैंक खातों की पहचान कर चुकी है।
चेन बनाकर काम करता है गैंग
बैंक साइबर ठगी के लिए चेन बनाकर काम करता है। गैंग के सदस्य आगे किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे बैंक खाते खुलवा कर उसकी किट उपलब्ध कराने का झांस देते है। यह इसके लिए खाता खुलवाने वाले को कमीशन देते थे। वह उसमें से कुछ राशि आगे अन्य को देकर उसका खाता खुलवा लेता और उसका डेबिट कार्ड व अन्य जानकारी गैंग के सदस्यों को देता था। जिसका प्रयोग व साइबर ठगी के रुपये निकालने में करते थे।
आरोपियों से यह हुआ बरामद
साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों से 26 हजार रुपये, 17 मोबाइल फोन, 67 बैंक खातों की चेक बुक, 21 बैंक खातों की पासबुक, 23 बैंक खातों के डेबिट कार्ड, छह पेन कार्ड और 20 आधार कार्ड बरामद किए हैं। इनमें 13 आधार कार्ड फर्जी हैं।
ईसीई फैक्टरी के साथ हुई साइबर ठगी का मामला चौकाने वाला था। मुख्य सरगना डेन स्मिथ नाइजीरिया में बैठा है। उसने गैंग के अलग-अलग ग्रुप बनाकर सभी को अलग-अलग तरीके से गैंग से जोड़ रखा है। गिरफ्तार आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले ग्रुप के हैं। इस गैंग का जाल देश के आठ राज्यों और पांच अन्य देशों में फैला है। अभी तक करीब 50 सदस्यों की पहचान कर ली गई है। -इंस्पेक्टर राजीव सिंह, प्रभारी, साइबर थाना सोनीपत