{"_id":"5727a5004f1c1bc17b5cdc44","slug":"sonepat-news-hindi-news-crime-financer-poison-case-sonepat","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसी ने शहर छोड़ा कोई हो गया भगौड़ा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
किसी ने शहर छोड़ा कोई हो गया भगौड़ा
अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 03 May 2016 12:37 AM IST
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खाया जहर
- फोटो : sonepat
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सेवा, सुरक्षा और सहयोग का हरियाणा पुलिस का नारा सोनीपत में आकर थोड़ा हल्का हो जाता है। खासकर फाइनेंसरों के मामले में। अवैध फाइनेंसरों ने शहर में जाल बुन रखा है, जिसमें एक बार कोई फंस जाता है तो फंसा ही रह जाता है। रविवार देर रात जिस तरह से धोबीवाड़ा में दंपति ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। इस तरह के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
लेकिन अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक परिवार तो फाइनेंसरों से तंग आकर शहर तक छोड़ चुका है। वहीं, एक व्यक्ति ऐसा भी है जो दबाव में झुक तो गया, लेकिन अब चालबाजी के चलते अदालत द्वारा भगौड़ा घोषित किया जा चुका है। अवैध फाइनेंसर शहर में पूरा गिरोह चला रहे हैं। शायद ही ऐसा कोई मोहल्ला होगा, जहां कोई अवैध फाइनेंसर न हो। शहर के लगभग हर एक हिस्से में अवैध फाइनेंसर हैं, जो ब्याज के तौर पर मोटी रकम वसूलते हैं।
केस नंबर 1 : परिवार सहित शहर छोड़ना पड़ा मोहित को
कच्चे क्वार्टर में रंगाई का काम करने वाले मोहित को फाइनेंसर के खिलाफ आवाज उठाना इतना महंगा पड़ा कि उसे सोनीपत ही छोड़ना पड़ गया है। मोहित ने एक फाइनेंसर से 50 हजार रुपये का फाइनेंस करवाया था। पैसे पूरे दे भी दिए थे, लेकिन फाइनेंसर उसकी तरफ और पैसे निकाल रहा था। इसी दौरान फाइनेंसर अपने साथियों के साथ मोहित को उठाकर बहालगढ़ रोड स्थित एक कार्यालय में ले गया, जहां पर उसकी जमकर पिटाई की गई। मोहित ने मामले की शिकायत सिविल लाइन थाना पुलिस को दी। पुलिस के बाद वह पूर्व पार्षद विमल किशोर के पास पहुंचा। विमल किशोर ने लोगों के साथ जुलूस निकालकर थाने के बाहर प्रदर्शन किया, तब जाकर मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन अब मामला अदालत में उलझा है और मोहित परिवार सहित शहर छोड़ चुका है।
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पूर्व पार्षद पर कर दिया था हमला
मोहित की मदद को आगे आने वाले विमल किशोर पर भी अवैध फाइनेंसरों ने ही करवाया था। थाने का घेराव कर मामला दर्ज करवाने के अगले दिन ही 1 जनवरी को दोपहर के समय विमल के कार्यालय में कुछ युवक घुस गए। जिन्होंने विमल की पिटाई की। इस पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया था। आरोपी वो ही फाइनेंसर था, जिसने मोहित की पिटाई की थी। यह मामला भी अब अदालत में विचाराधीन है।
केस नंबर 2 : मकान बेचकर आ गया सड़क पर
अच्छा खास परिवार था हेमंत छाबड़ा का। एक बार तीन लाख रुपये फाइनेंस करवा लिए थे। तील लाख दे भी दिए, इसके बाद भी 10 लाख रुपये देने रह गए थे। हेमंत ने एसपी और उच्चाधिकारियों को शिकायत कर दी। मामला पुलिस चौकी में पहुंचा तो पुलिस ने भी पैसे देकर समझौता करवाने के लिए दबाव दे दिया। हेमंत ने भी अपना मकान बेचकर पैसों का जुगाड़ किया और समझौता कर लिया। लेकिन हेमंत के ब्लैंक चेक जोकि पहले से फाइनेंसर के पास थे, उसने अदालत में केस कर दिया। अब इस मामले में हेमंत के वारंट निकल चुके हैं, लेकिन उसके पास जमानत के भी पैसे नहीं है। इसीलिए भागता फिर रहा है।
केस नंबर 3 : दंपति की हालत में सुधार, अस्पताल से मिली छुट्टी
रविवार देर रात जहरीला पदार्थ निगलने वाले धोबीवाड़ा निवासी दंपति ने अपनी 17 वर्षीय बेटी चारू जहरीला पदार्थ निगल लिया था। चारू की हालत तो देर रात ही सामान्य हो गई थी, लेकिन रूपसिंह और उसकी पत्नी सपना को सोमवार दोपहर बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल पाई है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इस दंपति ने पड़ोस में ही रहने वाले एक फाइनेंसर से ढाई लाख रुपये ले रखे थे। पैसे चुकाने के बाद भी उनकी तरफ पैसे बता कर दबाव दिया जा रहा था। इसी दबाव में इन्होंने जहरीला पदार्थ निगल लिया था।
23 मार्च को निकाली थी लठ रैली
अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ तीन साल पहले नौजवान भारत सभा और भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के संयुक्त बैनर तले लोगों ने अभियान भी चलाया था। फरवरी-मार्च में अभियान के दौरान लठ रैली निकाली गई थी। इस दौरान शहर भर में अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ पर्चे भी बांटे गए थे। इसके बाद तत्कालीन एसपी अरुण नेहरा के निर्देशों पर फिरौती का केस बनाकर अंदर किया था, दो-तीन अवैध फाइनेंसरों को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि इसके बाद से अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आठ हजार देकर लेंगे 10 हजार
फाइनेंसरों का सिस्टम ही कुछ ऐसा होता है कि अगर ये 10 हजार रुपये भी किसी को देते हैं तो तीन माह के भीतर ही इनके पैसे वापस आ जाते हैं और दो हजार रुपये का ब्याज भी मिल जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई फाइनेंसर किसी को 10 हजार रुपये देने की बात कहता है तो उसे 10 की बजाए आठ हजार रुपये देता है और 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 100 दिनों में 10 हजार रुपये पूरे ले लेता है। खास बात ये है कि प्रतिदिन की किस्त में अगर एक किस्त छूट जाए तो उस पर जुर्माना भी वसूला जाता है।
शपथ-पत्र या चेक भी दोगुना पैसों का
अवैध फाइनेंसर पैसे देने से पहले जरूरतमंद से शपथ-पत्र या चैक भी लेते हैं। खास बात ये हैं कि शपथ-पत्र में दोगुना पैसे लिए दिखाए जाते हैं, वो भी सिर्फ ब्याज पर। इसमें फाइनेंस का कोई जिक्र नहीं होता। इसके अलावा चेक भी ले लेते हैं। अधिकतर मामलों में चेक ब्लैंक ही लिए जाते हैं। इसके अलावा पैसे लेने वालों की बाइक या गाड़ी की आरसी अपने पास रखते हुए उनसे गाड़ी बेचने का शपथ-पत्र भी ले लेते हैं।
धोबीवाड़ा में दंपति द्वारा जहरीला पदार्थ निगलने का मामला सामने आया था। हम मामले की जांच कर रहे हैं। रही बात अवैध फाइनेंसरों की तो, लोगों को आगे आना चाहिए। कोई भी अवैध फाइनेंसर अगर किसी को परेशान करता है, तो मुझे शिकायत दे सकता है। शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। राहुल देव, नोडल अधिकारी एवं डीएसपी
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लेकिन अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक परिवार तो फाइनेंसरों से तंग आकर शहर तक छोड़ चुका है। वहीं, एक व्यक्ति ऐसा भी है जो दबाव में झुक तो गया, लेकिन अब चालबाजी के चलते अदालत द्वारा भगौड़ा घोषित किया जा चुका है। अवैध फाइनेंसर शहर में पूरा गिरोह चला रहे हैं। शायद ही ऐसा कोई मोहल्ला होगा, जहां कोई अवैध फाइनेंसर न हो। शहर के लगभग हर एक हिस्से में अवैध फाइनेंसर हैं, जो ब्याज के तौर पर मोटी रकम वसूलते हैं।
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केस नंबर 1 : परिवार सहित शहर छोड़ना पड़ा मोहित को
कच्चे क्वार्टर में रंगाई का काम करने वाले मोहित को फाइनेंसर के खिलाफ आवाज उठाना इतना महंगा पड़ा कि उसे सोनीपत ही छोड़ना पड़ गया है। मोहित ने एक फाइनेंसर से 50 हजार रुपये का फाइनेंस करवाया था। पैसे पूरे दे भी दिए थे, लेकिन फाइनेंसर उसकी तरफ और पैसे निकाल रहा था। इसी दौरान फाइनेंसर अपने साथियों के साथ मोहित को उठाकर बहालगढ़ रोड स्थित एक कार्यालय में ले गया, जहां पर उसकी जमकर पिटाई की गई। मोहित ने मामले की शिकायत सिविल लाइन थाना पुलिस को दी। पुलिस के बाद वह पूर्व पार्षद विमल किशोर के पास पहुंचा। विमल किशोर ने लोगों के साथ जुलूस निकालकर थाने के बाहर प्रदर्शन किया, तब जाकर मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन अब मामला अदालत में उलझा है और मोहित परिवार सहित शहर छोड़ चुका है।
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पूर्व पार्षद पर कर दिया था हमला
मोहित की मदद को आगे आने वाले विमल किशोर पर भी अवैध फाइनेंसरों ने ही करवाया था। थाने का घेराव कर मामला दर्ज करवाने के अगले दिन ही 1 जनवरी को दोपहर के समय विमल के कार्यालय में कुछ युवक घुस गए। जिन्होंने विमल की पिटाई की। इस पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया था। आरोपी वो ही फाइनेंसर था, जिसने मोहित की पिटाई की थी। यह मामला भी अब अदालत में विचाराधीन है।
केस नंबर 2 : मकान बेचकर आ गया सड़क पर
अच्छा खास परिवार था हेमंत छाबड़ा का। एक बार तीन लाख रुपये फाइनेंस करवा लिए थे। तील लाख दे भी दिए, इसके बाद भी 10 लाख रुपये देने रह गए थे। हेमंत ने एसपी और उच्चाधिकारियों को शिकायत कर दी। मामला पुलिस चौकी में पहुंचा तो पुलिस ने भी पैसे देकर समझौता करवाने के लिए दबाव दे दिया। हेमंत ने भी अपना मकान बेचकर पैसों का जुगाड़ किया और समझौता कर लिया। लेकिन हेमंत के ब्लैंक चेक जोकि पहले से फाइनेंसर के पास थे, उसने अदालत में केस कर दिया। अब इस मामले में हेमंत के वारंट निकल चुके हैं, लेकिन उसके पास जमानत के भी पैसे नहीं है। इसीलिए भागता फिर रहा है।
केस नंबर 3 : दंपति की हालत में सुधार, अस्पताल से मिली छुट्टी
रविवार देर रात जहरीला पदार्थ निगलने वाले धोबीवाड़ा निवासी दंपति ने अपनी 17 वर्षीय बेटी चारू जहरीला पदार्थ निगल लिया था। चारू की हालत तो देर रात ही सामान्य हो गई थी, लेकिन रूपसिंह और उसकी पत्नी सपना को सोमवार दोपहर बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल पाई है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इस दंपति ने पड़ोस में ही रहने वाले एक फाइनेंसर से ढाई लाख रुपये ले रखे थे। पैसे चुकाने के बाद भी उनकी तरफ पैसे बता कर दबाव दिया जा रहा था। इसी दबाव में इन्होंने जहरीला पदार्थ निगल लिया था।
23 मार्च को निकाली थी लठ रैली
अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ तीन साल पहले नौजवान भारत सभा और भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के संयुक्त बैनर तले लोगों ने अभियान भी चलाया था। फरवरी-मार्च में अभियान के दौरान लठ रैली निकाली गई थी। इस दौरान शहर भर में अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ पर्चे भी बांटे गए थे। इसके बाद तत्कालीन एसपी अरुण नेहरा के निर्देशों पर फिरौती का केस बनाकर अंदर किया था, दो-तीन अवैध फाइनेंसरों को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि इसके बाद से अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आठ हजार देकर लेंगे 10 हजार
फाइनेंसरों का सिस्टम ही कुछ ऐसा होता है कि अगर ये 10 हजार रुपये भी किसी को देते हैं तो तीन माह के भीतर ही इनके पैसे वापस आ जाते हैं और दो हजार रुपये का ब्याज भी मिल जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई फाइनेंसर किसी को 10 हजार रुपये देने की बात कहता है तो उसे 10 की बजाए आठ हजार रुपये देता है और 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 100 दिनों में 10 हजार रुपये पूरे ले लेता है। खास बात ये है कि प्रतिदिन की किस्त में अगर एक किस्त छूट जाए तो उस पर जुर्माना भी वसूला जाता है।
शपथ-पत्र या चेक भी दोगुना पैसों का
अवैध फाइनेंसर पैसे देने से पहले जरूरतमंद से शपथ-पत्र या चैक भी लेते हैं। खास बात ये हैं कि शपथ-पत्र में दोगुना पैसे लिए दिखाए जाते हैं, वो भी सिर्फ ब्याज पर। इसमें फाइनेंस का कोई जिक्र नहीं होता। इसके अलावा चेक भी ले लेते हैं। अधिकतर मामलों में चेक ब्लैंक ही लिए जाते हैं। इसके अलावा पैसे लेने वालों की बाइक या गाड़ी की आरसी अपने पास रखते हुए उनसे गाड़ी बेचने का शपथ-पत्र भी ले लेते हैं।
धोबीवाड़ा में दंपति द्वारा जहरीला पदार्थ निगलने का मामला सामने आया था। हम मामले की जांच कर रहे हैं। रही बात अवैध फाइनेंसरों की तो, लोगों को आगे आना चाहिए। कोई भी अवैध फाइनेंसर अगर किसी को परेशान करता है, तो मुझे शिकायत दे सकता है। शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। राहुल देव, नोडल अधिकारी एवं डीएसपी