फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   crime

आरोपी कोई गैर-पुलिसवाला होता तो आधी रात को घर से उठा ले जाते

Sun, 01 Nov 2015 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला गोहाना
ब्यूरो/अमर उजाला गोहाना Updated Sun, 01 Nov 2015 12:55 AM IST
विज्ञापन

हम पुलिस पर भरोसा करें भी तो कैसे करें, क्योंकि मेरे लाल को गए 10 दिन हो गए पर पुलिस ने अपने ही दो आरोपी कर्मचारियों को अब तक खुला छोड़ रखा है। क्या कोई गैर-पुलिस वाला मुजरिम होता तो पुलिस आधी रात को घर से न उठा लाती। शनिवार को यह पीड़ा गोविन्दा की मां संजीत और बड़े भाई गौतम की थी।

विज्ञापन


रविवार को गोविन्दा की तेरहवीं है। मां संजीत रह-रहकर बिलख उठती हैं। उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लगातार रोते रहने से वह रुग्ण हो गई हैं।

गोविंदा के भाई गौतम का कहना है कि हमें पैसे का लालच नहीं है। मैं अपने भाई की लाश को बेचने वाला नहीं। पैसे अपने पास ही रखो। मेरी मां, मुझे न तो पैसा चाहिए, न कच्ची या पक्की सरकारी नौकरी।
विज्ञापन


मेरे भाई की आत्मा तब शांत होगी जब उसके गुनहगार सजा पाएंगे। दलित किशोर की मौत के दिन से उसकी बुआ निर्मला और फूफा रामनिवास उसके घर पर हैं। बेटे की मौत से गमगीन मां संजीत को तो अपनी ही सुध नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोटो :31 बेटे की मौत के बाद एक साथ बैठे परिजन

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed