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मुरथल के पराठे की चाहत में जिंदगी गंवा रहे दिल्ली के युवा
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। मुरथल के ढाबों पर पराठे खाने की चाहत दिल्ली के युवाओं की जिंदगी लील रही है। सिंघु बार्डर पर जान गंवाने वाले सभी चार युवक अपने साथियों के साथ मुरथल खाने खाना और जश्न मनाने के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि मुरथल पहुंचने से पहले ही हादसे में उनकी जिंदगी ही चली जाएगी। नेशनल हाईवे पर बने यह ढाबे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के लोगों में मशहूर है। यहीं वजह है यहां प्रतिदिन 50 हजार से अधिक लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें दिल्ली के युवाओं की संख्या सबसे अधिक हैं। दिल्ली से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित मुरथल के ढाबे दिल्ली वालों के बीच खूब फेमस है। खाना खाने की चाहत में आने वाले युवा हादसों का शिकार होकर अपनी जिंदगी तक गवां देते हैं। महज एक सप्ताह में दिल्ली के सात युवाओं की जिंदगी मुरथल के पराठे खाने की चाहत में जा चुकी है। इसकी शुरुआत नव वर्ष को ही हो गई थी।
दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर मुरथल के ढाबे अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। दिल्ली से महज घंटा भर की ड्राइव कर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां के ढाबे 12 तरह के पराठों के लिए फेमस है। हालांकि यहां दर्जनों प्रकार की अन्य डिस भी तैयार की जाती है। जिसके चलते अक्सर देर रात या वीकेंड पर दिल्ली और एनसीआर के लोग ढाबे पर किफायती दाम में दाल-पराठे खाने के लिए आते हैं। मुरथल के ढाबों पर शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। ट्रेडिशनल ढाबों के रूप में शुरू हुए यह ढाबे अब अलग की क्रेज बना चुके हैं। ढाबे पर रोजाना गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रहती है। रोजाना 50 हजार से अधिक लोग यहां आकर खाने का लुत्फ लेते हैं। यहां आकर खाना खाने की चाहत में दिल्ली के लोग रात को ही यहां के लिए निकलते है। ऐसे में कई बार वह हादसों का शिकार हो जाते हैं।
मुरथल पार्टी करने आ रहे थे छह साथी
सिंघु बार्डर के पास हुए हादसे का शिकार हुए सभी छह साथी पार्टी मनाने के लिए मुरथल आ रहे थे। दिल्ली के नांगलोई निवासी विश्व चैंपियन पॉवर लिफ्टर सक्षम यादव के साथी रोहित का रविवार को जन्म दिन था। बताया गया है कि उन्होंने जन्म दिन की पार्टी मुरथल में करने का फैसला किया था। उन्होंने अपने साथी तिमारपुर दिल्ली की संजय बस्ती निवासी टीकम चंद उर्फ टिंकू, सौेरभ, योगेश उर्फ आकाश, हरीश रॉय को भी साथ ले लिया। हालांकि इससे पहले कि वह मुरथल पहुंचकर जश्न मना पाते हादसे में चार साथियों की जिंदगी को ही लील लिया।
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नए साल का जश्न मनाने के दौरान भी तीन को गंवानी पड़ी थी जान
नए वर्ष की शुरुआत ही मुरथल जश्न मनाने आने वाले दिल्ली के युवाओं पर भारी पड़ना शुरू हो गई थी। नए वर्ष पर पहली जनवरी को ही नई दिल्ली की कैलाशपुरी कालोनी निवासी नितेश और रिंकेश की जान चली गई थी। वह अपने साथी कालोनी के ही विनय व चेतन, पालम दिल्ली निवासी शाहरूख खान, सागर पुर दिल्ली निवासी नितिन के साथ अपनी-अपनी बाइक पर मुरथल ढाबे पर नए वर्ष का जश्न मनाने आ रहे थे। राई औद्योगिक क्षेत्र के सामने नितेश और उसके साथी रिंकेश की बाइकों को कार ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों की जान चली गई थी। इसी दिन देर रात कुंडली के पास दिल्ली स्थित पालम कालोनी निवासी सुदीप (31) की हादसे में मौत हो गई थी। वह भी मुरथल खाना-खाने के बाद अपने घर लौट रहा था। उसकी बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी।
कोहरा, तेज रफ्तार, नींद की खुमारी बन रही जानलेवा
हादसों का कारण ज्यादातर कोहरा, तेज रफ्तारी व नींद की खुमारी बन जाती है। रात को हाईवे पर संकेतकों का अभाव भी कहीं न कहीं हादसों को न्यौता देता हैं। कोहरे व संकेतक के अभाव में हाईवे पर तेज गति लोगों के जानलेवा बन जाती है। क्योंकि दिल्ली से निकलते ही नेशनल हाईवे पर वाहन फर्राटा भरने लगते है और इस नेशनल हाईवे पर वाहन काफी तेजी से दौड़ते है। इसलिए थोड़ा भी वाहन अनियंत्रित होते ही हादसा हो जाता है। इसके अलावा नेशनल हाईवे पर जगह-जगह कट बने हुए हैं और इस कारण भी हाईवे पर हादसे बढ़ रहे है।
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सोनीपत। मुरथल के ढाबों पर पराठे खाने की चाहत दिल्ली के युवाओं की जिंदगी लील रही है। सिंघु बार्डर पर जान गंवाने वाले सभी चार युवक अपने साथियों के साथ मुरथल खाने खाना और जश्न मनाने के लिए निकले थे। उन्हें क्या पता था कि मुरथल पहुंचने से पहले ही हादसे में उनकी जिंदगी ही चली जाएगी। नेशनल हाईवे पर बने यह ढाबे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के लोगों में मशहूर है। यहीं वजह है यहां प्रतिदिन 50 हजार से अधिक लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें दिल्ली के युवाओं की संख्या सबसे अधिक हैं। दिल्ली से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित मुरथल के ढाबे दिल्ली वालों के बीच खूब फेमस है। खाना खाने की चाहत में आने वाले युवा हादसों का शिकार होकर अपनी जिंदगी तक गवां देते हैं। महज एक सप्ताह में दिल्ली के सात युवाओं की जिंदगी मुरथल के पराठे खाने की चाहत में जा चुकी है। इसकी शुरुआत नव वर्ष को ही हो गई थी।
दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर मुरथल के ढाबे अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। दिल्ली से महज घंटा भर की ड्राइव कर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां के ढाबे 12 तरह के पराठों के लिए फेमस है। हालांकि यहां दर्जनों प्रकार की अन्य डिस भी तैयार की जाती है। जिसके चलते अक्सर देर रात या वीकेंड पर दिल्ली और एनसीआर के लोग ढाबे पर किफायती दाम में दाल-पराठे खाने के लिए आते हैं। मुरथल के ढाबों पर शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। ट्रेडिशनल ढाबों के रूप में शुरू हुए यह ढाबे अब अलग की क्रेज बना चुके हैं। ढाबे पर रोजाना गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रहती है। रोजाना 50 हजार से अधिक लोग यहां आकर खाने का लुत्फ लेते हैं। यहां आकर खाना खाने की चाहत में दिल्ली के लोग रात को ही यहां के लिए निकलते है। ऐसे में कई बार वह हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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मुरथल पार्टी करने आ रहे थे छह साथी
सिंघु बार्डर के पास हुए हादसे का शिकार हुए सभी छह साथी पार्टी मनाने के लिए मुरथल आ रहे थे। दिल्ली के नांगलोई निवासी विश्व चैंपियन पॉवर लिफ्टर सक्षम यादव के साथी रोहित का रविवार को जन्म दिन था। बताया गया है कि उन्होंने जन्म दिन की पार्टी मुरथल में करने का फैसला किया था। उन्होंने अपने साथी तिमारपुर दिल्ली की संजय बस्ती निवासी टीकम चंद उर्फ टिंकू, सौेरभ, योगेश उर्फ आकाश, हरीश रॉय को भी साथ ले लिया। हालांकि इससे पहले कि वह मुरथल पहुंचकर जश्न मना पाते हादसे में चार साथियों की जिंदगी को ही लील लिया।
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नए साल का जश्न मनाने के दौरान भी तीन को गंवानी पड़ी थी जान
नए वर्ष की शुरुआत ही मुरथल जश्न मनाने आने वाले दिल्ली के युवाओं पर भारी पड़ना शुरू हो गई थी। नए वर्ष पर पहली जनवरी को ही नई दिल्ली की कैलाशपुरी कालोनी निवासी नितेश और रिंकेश की जान चली गई थी। वह अपने साथी कालोनी के ही विनय व चेतन, पालम दिल्ली निवासी शाहरूख खान, सागर पुर दिल्ली निवासी नितिन के साथ अपनी-अपनी बाइक पर मुरथल ढाबे पर नए वर्ष का जश्न मनाने आ रहे थे। राई औद्योगिक क्षेत्र के सामने नितेश और उसके साथी रिंकेश की बाइकों को कार ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों की जान चली गई थी। इसी दिन देर रात कुंडली के पास दिल्ली स्थित पालम कालोनी निवासी सुदीप (31) की हादसे में मौत हो गई थी। वह भी मुरथल खाना-खाने के बाद अपने घर लौट रहा था। उसकी बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी।
कोहरा, तेज रफ्तार, नींद की खुमारी बन रही जानलेवा
हादसों का कारण ज्यादातर कोहरा, तेज रफ्तारी व नींद की खुमारी बन जाती है। रात को हाईवे पर संकेतकों का अभाव भी कहीं न कहीं हादसों को न्यौता देता हैं। कोहरे व संकेतक के अभाव में हाईवे पर तेज गति लोगों के जानलेवा बन जाती है। क्योंकि दिल्ली से निकलते ही नेशनल हाईवे पर वाहन फर्राटा भरने लगते है और इस नेशनल हाईवे पर वाहन काफी तेजी से दौड़ते है। इसलिए थोड़ा भी वाहन अनियंत्रित होते ही हादसा हो जाता है। इसके अलावा नेशनल हाईवे पर जगह-जगह कट बने हुए हैं और इस कारण भी हाईवे पर हादसे बढ़ रहे है।