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आज के समय की मांग और जरूरत है सीबीसीएस
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:50 PM IST
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सीबीसीएस (च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) आज के समय की मांग और जरूरत है, ताकि शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके। हालांकि इसके लिए आवश्यक है कि शिक्षक, जिन्हें इसे लागू करना है, उन्हें इस पर पूर्ण विश्वास और समझ हो। यह बात गांव खानपुर कलां भक्त फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशा कादियान ने कही। वह च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम और इश्यूज और चैलेंजेज के मुद्दे पर आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी। कार्यशाला स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टरेट-रूसा हरियाणा द्वारा आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों में च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करना है। कार्यशाला का आयोजन सीबीसीएस से जुड़े मुद्दों तथा शंकाओं का निवारण करना था, ताकि आने वाले सत्र से इसे लागू किया जा सके।
इस दौरान मौजूद प्रो. वीके कौल ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा बताए तीन स्तंभों में से नारी शक्ति तथा शिक्षक जैसे दो स्तंभों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा राष्ट्र निर्माण का तीसरा स्तंभ सेना है, जो देश की रक्षा करती है। विवि की छात्राएं आने वाले समय में ज्ञान से देश की रक्षा और उसका विकास करेंगी। वर्तमान शिक्षा प्रणाली शिक्षक केंद्रित है तथा उसमें लचीलापन नहीं है। इन दोनों कमियों को दूर करने तथा शिक्षा प्रणाली को समरूप करने के लिए सीबीसीएस को लागू किया जा रहा है, जो मूल रूप से छात्र-केंद्रित है। इस प्रणाली के लागू होने से छात्राओं को इंटर-डिसिप्लिनरी शिक्षा मिलेगी तथा अपना शैक्षणिक संस्थान बदलने की सुविधा भी मिलेगी। यूजीसी द्वारा सीबीसीएस को लागू करने से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा और विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता को किसी भी प्रकार से नहीं बदला जाएगा। इस मौके पर डॉ. कविता चक्रवर्ती, प्रो. हवा सिंह, प्रो. विमल जोशी, प्रो. संकेत विज तथा निदेशक प्रो. श्वेता हुड्डा आदि उपस्थित थे।
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इस दौरान मौजूद प्रो. वीके कौल ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा बताए तीन स्तंभों में से नारी शक्ति तथा शिक्षक जैसे दो स्तंभों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा राष्ट्र निर्माण का तीसरा स्तंभ सेना है, जो देश की रक्षा करती है। विवि की छात्राएं आने वाले समय में ज्ञान से देश की रक्षा और उसका विकास करेंगी। वर्तमान शिक्षा प्रणाली शिक्षक केंद्रित है तथा उसमें लचीलापन नहीं है। इन दोनों कमियों को दूर करने तथा शिक्षा प्रणाली को समरूप करने के लिए सीबीसीएस को लागू किया जा रहा है, जो मूल रूप से छात्र-केंद्रित है। इस प्रणाली के लागू होने से छात्राओं को इंटर-डिसिप्लिनरी शिक्षा मिलेगी तथा अपना शैक्षणिक संस्थान बदलने की सुविधा भी मिलेगी। यूजीसी द्वारा सीबीसीएस को लागू करने से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा और विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता को किसी भी प्रकार से नहीं बदला जाएगा। इस मौके पर डॉ. कविता चक्रवर्ती, प्रो. हवा सिंह, प्रो. विमल जोशी, प्रो. संकेत विज तथा निदेशक प्रो. श्वेता हुड्डा आदि उपस्थित थे।
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