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सरकारी स्कूलों में क्लर्क का खेल: फर्जी बिलों से रिश्तेदारों के खाते में डालता रहा पेमैंट, ₹1.34 करोड़ का गबन

Sat, 19 Jul 2025 05:37 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 19 Jul 2025 05:37 PM IST
सार

फर्जी बिलों से भुगतान का खेल चार साल से चल रहा रहा था। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आय व्यय का मिलान होता है, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों में फर्जीबाड़ा चलता रहा यह बात हैरान करने वाली है। डिटेल में पढ़ें खबर...

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Corruption case in two government schools of Sonipat
स्कूल में भ्रष्टाचार का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले के दो सरकारी स्कूलों में 1.34 करोड़ रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लिपिक ने फर्जी बिल तैयार कर अपने परिचितों के बैंक खातों में ई-सैलरी पोर्टल के माध्यम से भुगतान की रकम ट्रांसफर कर दी। संदेह होने पर स्कूल की प्रधानाचार्य ने पुराने ऑडिट का मिलान किया तो पूरा मामला उजागर हो गया। लिपिक के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। आरोपी लिपिक अब डाइट संस्थान में कार्यरत है।

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गांव अकबरपुर बारोटा में स्थित पीएमश्री वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में तैनात रहे लिपिक मनोज आनंद पर गबन का आरोप है। पीएमश्री माध्यमिक विद्यालय स्कूल की प्राचार्य भारती ने पुलिस को बताया की स्कूल में तैनात लिपिक मनोज आनंद स्कूल से तबादला होकर डाइट संस्थान में गए थे। इसी दौरान छतेहरा बहादुरपुर स्कूल में इंचार्ज शिवराज 31 मई को सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद उनकी डीडी पावर भी भारती को मिल गई।
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इस बीच स्कूल में तैनात क्लर्क को मनोज आनंद ने बताया कि उन्होंने सेवानिवृत्त इंचार्ज शिवराज का लीव इन कैशमेंट का बिल बना दिया था। उसे खजाना कार्यालय में भेजकर पास करा देना। जिस पर क्लर्क ने विश्वास में आकर उसे भेज दिया। बाद में पता लगा कि बिल शिवराज के नाम से नहीं किसी महेंद्र मलिक के नाम से बनाया गया है। उस नाम का कोई व्यक्ति उनके स्कूल में कार्यरत नहीं था। इसके बाद जब मामले में पता किया गया तो पीएमश्री वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में 20 फर्जी बिल मिले और 32 लाख का घोटाला सामने आया।
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इसके अलावा सोनीपत के गांव छतेहरा बहादुरपुर के सरकारी स्कूल में 31 फर्जी बिल बनाए गए और एक करोड़ 2 लाख का गबन किया गया था। विभागीय जांच में परत दर परत मामला खुलता गया। लिपिक मनोज आनंद ने ई-सेलरी पोर्टल के माध्यम से कुल 51 फर्जी बिलों का भुगतान किया। जिन खातों में भुगतान की रकम ट्रांसफर हुई वह सभी लिपिक के रिश्तेदार एवं करीबी लोगों के हैं। प्रधानाचार्य भारती ने पूरी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी। शुक्रवार को इसकी शिकायत कुंडली थाना पुलिस को दी गई है। कुंडली थाना पुलिस लिपिक मनोज आनंद के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

चार साल होता रहा फर्जी भुगतान 

फर्जी बिलों से भुगतान का खेल चार साल से चल रहा रहा था। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आय व्यय का मिलान होता है, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों में फर्जीबाड़ा चलता रहा यह बात हैरान करने वाली है। ऐसे में सवाल बड़े अफसरों पर भी उठते हैं। आरोपी लिपिक ने जुलाई 2021 से जून 2025 के बीच फर्जी बिल बनाए। महिमा, दिव्या, निशांत अरोड़ा, भूपेन्द्र कुमार, तृप्ता, संजय कुमार, पूनम और कृष्णा के बैंक खातों में फर्जी बिलों के भुगतान की धनराशि ऑनलाइन ट्रांसफर की गई। अकबरपुर बारोटा स्कूल में भी 20 फर्जी सैलरी एरियर बिल बनाए गए और 32 लाख 96 हजार 909 रुपये की सरकारी रकम का गबन किया गया।

प्रिंसिपल की ओर से शिकायत दी गई है कि लिपिक ने करोड़ रुपये से ऊपर का घोटाला किया है। शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। -रविंद्र कुमार पुलिस प्रवक्ता, सोनीपत

लाखों रुपये के भुगतान का संदेह होने के बाद रिकॉर्ड की जांच की गई तो नौ लाख रुपये के फर्जी बिलों का भुगतान कोषागार अधिकारी को सूचना देकर रुकवा दिया गया है। - भारती, प्रधानाचार्य पीएम श्री माध्यमिक विद्यालय स्कूल



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शिक्षक के सेवानिवृत्त होने से उजागर हुआ मामला

प्राचार्य भारती ने बताया कि राजकीय माध्यमिक विद्यालय छतेहरा बहादुरपुर से शिक्षक एवं स्कूल के इंचार्ज शिवराज 31 मई को सेवानिवृत्त हुए। इसके उपरांत 18 जून को छतेहरा बहादुरपुर विद्यालय की डीडीओ पावर उनको दी गई। पहली जुलाई को विद्यालय में आने के बाद लिपिक मंजीत को पूर्व लिपिक मनोज आनंद ने फोन के माध्यम से संदेश दिया कि उसने शिवराज सेवानिवृत्त अध्यापक का लीव इनकैशमेंट का बिल बनाकर जेनरेट कर दिया है। यह लीव इन कैशमेंट का बिल खजाना कार्यालय से पास होने बाद मनोज आनंद का पुनः फोन आने पर कि उक्त बिल कि ईपीएस को डोंगल वेरिफाई करने बारे कहा गया व व्हाट्सएप के माध्यम से छतेहरा बहादुरपुर विद्यालय के ई-सैलरी की आईडी पासवर्ड व ईपीएस नंबर भेजे गए। जिस पर पाया गया कि वह बिल विद्यालय से सेवानिवृत्त शिवराज का न होकर महेंद्र मलिक के नाम से लीव इनकैशमेंट बिल बनाया गया है। उसी गलत बिल की ईपीएस को डोंगल वेरिफाई करने के बारे में घटना का विवरण दिया। इस पर लिपिक मंजीत से छतेहरा बहादुरपुर का पोर्टल खुलवाया तो पाया कि एक लीव इनकैशमेंट का बिल महेंद्र मलिक नामक व्यक्ति के नाम से जनरेट किया गया है, जिसकी कुल राशि नौ लाख नौ हजार थी। यहीं से पूरा मामला खुलता चला गया।
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