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गोपाल कृष्ण ने 86 साल की उम्र में हिम्मत व खानपान बेहतर रखकर कोरोना को हराया
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सोनीपत। जहां कोरोना का कहर लगातार बढ़ने से हर कोई परेशान दिख रहा है। वहीं ऐसे भी सकारात्मक मामले सामने आ रहे हैं, जहां उम्र के आखिरी पड़ाव में होने के बावजूद कोरोना से जंग जीती है। ऐसे ही गन्नौर की जैन गली में रहने वाले 86 साल के गोपाल कृष्ण हैं जो कोरोना पॉजिटिव होने का पता चलने के बाद भी हिम्मत नहीं हारे और कोरोना के डर को खुद से दूर रखा। इस तरह वह हिम्मत व खानपान बेहतर रखकर कोरोना को हरा सके।
उनका मानना है कि अगर कोरोना पॉजिटिव होने के बाद हम नकारात्मक सोच रखते हैं और खानपान बेहतर नहीं रखते हैं तो शरीर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे बीमारी बढ़ने की आशंका रहती है या बीमारी से ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। गन्नौर की जैन गली में रहने वाले गोपाल कृष्ण के बेटे विनोद की अप्रैल के शुरुआत में तबीयत खराब होने पर कोरोना जांच कराई गई थी तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। विनोद को तबीयत खराब होने के कारण बीपीएस मेडिकल कालेज खानपुर में भर्ती करा दिया गया था। जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों की जांच की गई तो गोपाल कृष्ण की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिली। उनकी उम्र 86 साल होने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई। उसके बावजूद खुद गोपाल कृष्ण ने हिम्मत नहीं हारी और उनके अंदर कोरोना का डर नहीं दिखाई दिया। उनको होम आइसोलेट कर दिया गया और सभी दवाइयां उपलब्ध कराई गई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मिली सभी दवाइयां खाई तो खानपान का विशेष ध्यान रखते थे। वह स्वाद के अनुसार खिचड़ी, दलिया, सब्जी-रोटी, फल खाते थे और घर में नियमित आराम करते थे। कृष्ण गोपाल बताते हैं कि जब उनको कोरोना होने के बारे में बताया गया तो उन्होंने टेंशन नहीं लेते हुए परिवार वालों से जल्द ही ठीक होने की बात कही थी और वह दस दिन बाद ही ठीक हो गए। वह इस बारे में ज्यादा सोचते भी नहीं थे कि उनको कोरोना हुआ था। वह नियमित गर्म पानी पीने के साथ ही ऑक्सीजन का स्तर जरूर जांच लेते थे, जिसकी उनको स्वास्थ्य विभाग से सलाह दी गई थी। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि किसी भी बीमारी में जितनी टेंशन लेते है, वह उतनी ही ज्यादा दर्द पैदा करती है।
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उनका मानना है कि अगर कोरोना पॉजिटिव होने के बाद हम नकारात्मक सोच रखते हैं और खानपान बेहतर नहीं रखते हैं तो शरीर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे बीमारी बढ़ने की आशंका रहती है या बीमारी से ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। गन्नौर की जैन गली में रहने वाले गोपाल कृष्ण के बेटे विनोद की अप्रैल के शुरुआत में तबीयत खराब होने पर कोरोना जांच कराई गई थी तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। विनोद को तबीयत खराब होने के कारण बीपीएस मेडिकल कालेज खानपुर में भर्ती करा दिया गया था। जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों की जांच की गई तो गोपाल कृष्ण की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिली। उनकी उम्र 86 साल होने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई। उसके बावजूद खुद गोपाल कृष्ण ने हिम्मत नहीं हारी और उनके अंदर कोरोना का डर नहीं दिखाई दिया। उनको होम आइसोलेट कर दिया गया और सभी दवाइयां उपलब्ध कराई गई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मिली सभी दवाइयां खाई तो खानपान का विशेष ध्यान रखते थे। वह स्वाद के अनुसार खिचड़ी, दलिया, सब्जी-रोटी, फल खाते थे और घर में नियमित आराम करते थे। कृष्ण गोपाल बताते हैं कि जब उनको कोरोना होने के बारे में बताया गया तो उन्होंने टेंशन नहीं लेते हुए परिवार वालों से जल्द ही ठीक होने की बात कही थी और वह दस दिन बाद ही ठीक हो गए। वह इस बारे में ज्यादा सोचते भी नहीं थे कि उनको कोरोना हुआ था। वह नियमित गर्म पानी पीने के साथ ही ऑक्सीजन का स्तर जरूर जांच लेते थे, जिसकी उनको स्वास्थ्य विभाग से सलाह दी गई थी। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि किसी भी बीमारी में जितनी टेंशन लेते है, वह उतनी ही ज्यादा दर्द पैदा करती है।
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