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कोरोना के कारण मानसिक अवसाद से बचाने के लिए 50 युवा रोज 21-21 लोगों को भेजेंगे हैप्पी लाइफ का संदेश
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सोनीपत। कोरोना के कारण लोगों को मानसिक दबाव और अवसाद से बचाने के लिए 50 युवा रोजाना 21-21 लोगों को हैप्पी लाइफ का संदेश भेजेंगे। डिजिटल द्रोणाचार्य संस्था की तरफ से आओ फीलगुड करें, नया साल है आया अभियान के तहत यह मैसेज भेजे जाएंगे। संस्था का मकसद लोगों को नई स्फूर्ति व ऊर्जा प्रदान करना है। मैसेज के माध्यम से युवाओं का आत्मबल बढ़ाकर पुराने साल की बंदिशों से उत्पन्न तनाव से बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा।
कोरोना संक्रमण के चलते लोगों के खानपान, यात्रा, शिक्षा, संवाद व व्यवहार में कई तरह के बदलाव हुए हैं। इनके कारण लोग बंदिशों में घिरे होने का अनुभव करने लगे। अब युवा उनको समझाने का प्रयास करेंगे कि प्रकृति ने जीवनयापन का जो तरीका प्रदान किया है, उसको आदत बनाकर आगे बढ़े। इससे हम अपने बच्चों को एक संक्रमण मुक्त जीवनशैली सौंप सकेंगे। भले ही कोरोना खत्म हो जाए, उसके बावजूद सुरक्षा के उपायों का पालन करना स्वास्थ्य वर्धक ही रहेगा। ऐसे में लोगों को कोरोना काल के लाभ बताकर जागरूक किया जाएगा। जिससे नया साल पूरे उत्साह और उल्लास के साथ शुरू हो सके। डिजिटल द्रोणाचार्य संस्था के युवाओं ने लोगों को सकारात्मक संदेश देने के लिए कोरोना को मुख्य आधार बनाया है। इसके अलग-अलग विषय पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही आग्रह किया जाएगा कि मैसेज प्राप्त करने वाले इसी क्रम में अपने से आगे 21 लोगों को इसे भेजकर नए साल में नए विचारों व नई ऊर्जा के साथ काम में जुट जाएं।
इन बातों की दी जाएगी सीख
लोगों को बताया जाएगा कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करें, प्रदूषण में कमी करें, स्वच्छ वातावरण, लोगों में सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। युवाओं को परिवारों के साथ मिल-बैठकर समय बिताने का अवसर मिलना और रुपया कमाने की भाग दौड़ छोड़कर अपनी व अपनों की जिंदगी बचाने को महत्व बताया जाएगा। नए साल की प्राथमिकताओं में लोगों को सफाई पर ध्यान देने, पौष्टिक भोजन करने और अपनों के साथ रहने को प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। लोगों को संक्रमण से बचाव के तरीकों को लगातार अपनाना होगा। इनमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं आने देनी है।
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वर्जन
संस्था के 50 सदस्यों को सकारात्मक संदेश भेजने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अभियान 7 जनवरी से शुरू किया जाएगा। समय की जरूरत है कि लोगों में सकारात्मक भाव जागृत किए जाएं। जिससे आने वाले साल में पूरी ऊर्जा से कार्य करें और लोग पिछले साल की नकारात्मकता से बाहर आ सकें। इसके लिए गोष्ठियों का आयोजन भी फरवरी में शुरू करेंगे।
- गौरी कपूर, संस्थापक, डिजिटल द्रोणाचार्य।
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कोरोना संक्रमण के चलते लोगों के खानपान, यात्रा, शिक्षा, संवाद व व्यवहार में कई तरह के बदलाव हुए हैं। इनके कारण लोग बंदिशों में घिरे होने का अनुभव करने लगे। अब युवा उनको समझाने का प्रयास करेंगे कि प्रकृति ने जीवनयापन का जो तरीका प्रदान किया है, उसको आदत बनाकर आगे बढ़े। इससे हम अपने बच्चों को एक संक्रमण मुक्त जीवनशैली सौंप सकेंगे। भले ही कोरोना खत्म हो जाए, उसके बावजूद सुरक्षा के उपायों का पालन करना स्वास्थ्य वर्धक ही रहेगा। ऐसे में लोगों को कोरोना काल के लाभ बताकर जागरूक किया जाएगा। जिससे नया साल पूरे उत्साह और उल्लास के साथ शुरू हो सके। डिजिटल द्रोणाचार्य संस्था के युवाओं ने लोगों को सकारात्मक संदेश देने के लिए कोरोना को मुख्य आधार बनाया है। इसके अलग-अलग विषय पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही आग्रह किया जाएगा कि मैसेज प्राप्त करने वाले इसी क्रम में अपने से आगे 21 लोगों को इसे भेजकर नए साल में नए विचारों व नई ऊर्जा के साथ काम में जुट जाएं।
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इन बातों की दी जाएगी सीख
लोगों को बताया जाएगा कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करें, प्रदूषण में कमी करें, स्वच्छ वातावरण, लोगों में सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। युवाओं को परिवारों के साथ मिल-बैठकर समय बिताने का अवसर मिलना और रुपया कमाने की भाग दौड़ छोड़कर अपनी व अपनों की जिंदगी बचाने को महत्व बताया जाएगा। नए साल की प्राथमिकताओं में लोगों को सफाई पर ध्यान देने, पौष्टिक भोजन करने और अपनों के साथ रहने को प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। लोगों को संक्रमण से बचाव के तरीकों को लगातार अपनाना होगा। इनमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं आने देनी है।
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संस्था के 50 सदस्यों को सकारात्मक संदेश भेजने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अभियान 7 जनवरी से शुरू किया जाएगा। समय की जरूरत है कि लोगों में सकारात्मक भाव जागृत किए जाएं। जिससे आने वाले साल में पूरी ऊर्जा से कार्य करें और लोग पिछले साल की नकारात्मकता से बाहर आ सकें। इसके लिए गोष्ठियों का आयोजन भी फरवरी में शुरू करेंगे।
- गौरी कपूर, संस्थापक, डिजिटल द्रोणाचार्य।