{"_id":"67105c92844a74c07b06b5b4","slug":"consumption-of-medicinal-kheer-will-remove-problems-related-to-bile-sonipat-news-c-197-1-snp1008-126182-2024-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: औषधीय खीर के सेवन से दूर होगी पित्त से जुड़ी समस्याएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: औषधीय खीर के सेवन से दूर होगी पित्त से जुड़ी समस्याएं
Thu, 17 Oct 2024 06:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 17 Oct 2024 06:08 AM IST
विज्ञापन
फोटो 14- सोनीपत के नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर खीर का प्रसाद तैयार करते श्रद्धालु। संवाद
सोनीपत। आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा का महत्व साल की सभी 12 पूर्णिमा तिथियों में सबसे खास होता है।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं और अमृत की वर्षा करते हैं। मां लक्ष्मी इस दिन प्रसन्न मुद्रा में रात को चंद्रमा की रोशनी में धरती पर भ्रमण करने आती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने महारास किया था। उन्होंने बंसी बजाकर गोपियों को अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था।
नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर से आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 16 अक्तूबर रात 8:45 बजे प्रारंभ होकर 17 अक्तूबर को शाम 4:50 बजे तक रहेगी। शरद पूर्णिमा का पर्व बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उपवास रखा। शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास कर गोपियों को ईश्वरीय अमृत पान करवाया था। चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होने के साथ रात को अमृत की वर्षा करते हैं, इसलिए खीर का प्रसाद तैयार कर चांद की रोशनी में रखा जाता है। बर्तन को थाली की जगह पतले कपड़े से ढक दिया जाता है, ताकि चंद्रमा की किरणों का असर दूध व चावल पर पड़ सके। चांद की किरणें अपनी शीतलता से खीर की तासीर को ठंडा करती हैं। इस प्रसाद का सेवन करने से पेट संबंधी रोग, जलन व त्वचा संबंधी बीमारियों सहित कई रोगों से निजात मिलती है। साथ ही पित्त से जुड़ी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
े
विज्ञापन
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं और अमृत की वर्षा करते हैं। मां लक्ष्मी इस दिन प्रसन्न मुद्रा में रात को चंद्रमा की रोशनी में धरती पर भ्रमण करने आती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने महारास किया था। उन्होंने बंसी बजाकर गोपियों को अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था।
नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर से आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 16 अक्तूबर रात 8:45 बजे प्रारंभ होकर 17 अक्तूबर को शाम 4:50 बजे तक रहेगी। शरद पूर्णिमा का पर्व बुधवार को हर्षोल्लास से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उपवास रखा। शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महारास कर गोपियों को ईश्वरीय अमृत पान करवाया था। चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होने के साथ रात को अमृत की वर्षा करते हैं, इसलिए खीर का प्रसाद तैयार कर चांद की रोशनी में रखा जाता है। बर्तन को थाली की जगह पतले कपड़े से ढक दिया जाता है, ताकि चंद्रमा की किरणों का असर दूध व चावल पर पड़ सके। चांद की किरणें अपनी शीतलता से खीर की तासीर को ठंडा करती हैं। इस प्रसाद का सेवन करने से पेट संबंधी रोग, जलन व त्वचा संबंधी बीमारियों सहित कई रोगों से निजात मिलती है। साथ ही पित्त से जुड़ी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
विज्ञापन
े