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नहीं चेते तो पानी के लिए तरसेगा सिविल अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Thu, 18 Dec 2014 12:14 AM IST
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पेयजल के 51 लाख रुपये के बिल पर पब्लिक हेल्थ और स्वास्थ्य विभाग में खींचतान चल रही है। पानी का कनेक्शन सिविल अस्पताल में है और पिछले तीन साल से इसका बिल बकाया है। स्वास्थ्य विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अब पब्लिक हेल्थ पानी का कनेक्शन काटने की योजना बना रहा है। अगर ऐसा हुआ तो मरीजों के साथ अस्पताल के क्वार्टरों में रहने वाले लोगों में हाहाकार मच जाएगा।
26 वर्ष पूर्व सामान्य अस्पताल के प्रांगण में जलघर की स्थापना की गई थी। सामान्य अस्पताल में जलापूर्ति का कार्य भी इसी जलघर के जरिए पूरा किया जाता है।
लगभग एक लाख गैलन की क्षमता वाले इस जलघर के रखरखाव का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के पास है। पूरे 24 घंटे अस्पताल में यहीं से जलापूर्ति का काम होता है।
हालांकि पिछले तीन सालों से स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को बिल चुकाने को लेकर आंखें मूंदे बैठा है। खास बात यह है कि जनस्वास्थ्य विभाग अब सभी खर्च खुद ही उठा रहा है। इनमें मोटर मेंटीनेंस, लाइन मेंटिनेंस तथा रिपेयरिंग का काम मजबूरन जनस्वास्थ्य विभाग को पूरा करना पड़ रहा है।
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नहीं दिया जा रहा कोई ध्यान
सामान्य अस्पताल में पानी आपूर्ति का काम पूूरी तरह रामभरोसे चल रहा है। पानी की आपूर्ति के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई है वह प्लास्टिक की बनी है। यह भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।
वहीं सबमर्सिबल के लिए सिर्फ एक मोटर लगाई गई है। जबकि तीन ट्यूबवेल में से दो पूरी तरह खराब पड़े हैं। वर्तमान में इसी ट्यूबवेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ट्यूबवेल लगाए जाने की यहां सबसे ज्यादा जरूरत है जिसकी कीमत लगभग साढ़े चार लाख रुपये है, लेकिन ट्यूबवेल लगाए जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है।
दो सालों में हुआ 51 लाख रुपये का बकाया
सिर्फ दो सालों में बिल बढ़कर 51 लाख तक पहुंच चुका है। 2012-13 तथा 2013-14 से कोई भी बिल जमा नहीं किया गया है। जबकि 2014-2015 के बिल भी जल्द ही तैयार किया जाएगा।
ये थे नियम-
साल 2008 में प्रदेश सरकार की ओर से एक नई नीति बनाई गई थी। इसके तहत जो भी सरकारी संस्थान जल आपूर्ति का प्रयोग खुद के लिए करेगा, उस संस्थान का दायित्व होगा कि जलघर का रखरखाव से लेकर जो खर्च होंगे उसका वहन स्वयं विभाग ही उठाएगा।
हालांकि ठीक तीन महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने जलघर के रखरखाव को लेकर हाथ खड़े कर दिए। उसके बाद से जलघर संचालित करने का जिम्मा जनस्वास्थ्य विभाग ने संभाल रखा है।
दिसंबर माह में ही जल चुकी है मोटर
दिसंबर महीने में ही पूरे 24 घंटे तक अस्पताल में पानी की किल्लत देखी गई थी। इससे मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यदि बकाए बिल को समय रहते नहीं चुकाया गया तो जल्द ही यहां पानी का हाहाकार मच सकता है।
बकाए बिल को लेकर स्वास्थ्य विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। वार्षिक एस्टीमेट बनाकर पिछले दो सालों से विभाग को भेजा जा रहा है। अब तीन साल पूरे होने को है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कभी भी जलापूर्ति की समस्या आ सकती है।
सतीश कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग
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फोटो-8-पानी आपूर्ति के लिए सामान्य अस्पताल के प्रांगण स्थित जलघर
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अब पब्लिक हेल्थ पानी का कनेक्शन काटने की योजना बना रहा है। अगर ऐसा हुआ तो मरीजों के साथ अस्पताल के क्वार्टरों में रहने वाले लोगों में हाहाकार मच जाएगा।
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26 वर्ष पूर्व सामान्य अस्पताल के प्रांगण में जलघर की स्थापना की गई थी। सामान्य अस्पताल में जलापूर्ति का कार्य भी इसी जलघर के जरिए पूरा किया जाता है।
लगभग एक लाख गैलन की क्षमता वाले इस जलघर के रखरखाव का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के पास है। पूरे 24 घंटे अस्पताल में यहीं से जलापूर्ति का काम होता है।
हालांकि पिछले तीन सालों से स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को बिल चुकाने को लेकर आंखें मूंदे बैठा है। खास बात यह है कि जनस्वास्थ्य विभाग अब सभी खर्च खुद ही उठा रहा है। इनमें मोटर मेंटीनेंस, लाइन मेंटिनेंस तथा रिपेयरिंग का काम मजबूरन जनस्वास्थ्य विभाग को पूरा करना पड़ रहा है।
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नहीं दिया जा रहा कोई ध्यान
सामान्य अस्पताल में पानी आपूर्ति का काम पूूरी तरह रामभरोसे चल रहा है। पानी की आपूर्ति के लिए जो पाइप लाइन बिछाई गई है वह प्लास्टिक की बनी है। यह भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।
वहीं सबमर्सिबल के लिए सिर्फ एक मोटर लगाई गई है। जबकि तीन ट्यूबवेल में से दो पूरी तरह खराब पड़े हैं। वर्तमान में इसी ट्यूबवेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ट्यूबवेल लगाए जाने की यहां सबसे ज्यादा जरूरत है जिसकी कीमत लगभग साढ़े चार लाख रुपये है, लेकिन ट्यूबवेल लगाए जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है।
दो सालों में हुआ 51 लाख रुपये का बकाया
सिर्फ दो सालों में बिल बढ़कर 51 लाख तक पहुंच चुका है। 2012-13 तथा 2013-14 से कोई भी बिल जमा नहीं किया गया है। जबकि 2014-2015 के बिल भी जल्द ही तैयार किया जाएगा।
ये थे नियम-
साल 2008 में प्रदेश सरकार की ओर से एक नई नीति बनाई गई थी। इसके तहत जो भी सरकारी संस्थान जल आपूर्ति का प्रयोग खुद के लिए करेगा, उस संस्थान का दायित्व होगा कि जलघर का रखरखाव से लेकर जो खर्च होंगे उसका वहन स्वयं विभाग ही उठाएगा।
हालांकि ठीक तीन महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने जलघर के रखरखाव को लेकर हाथ खड़े कर दिए। उसके बाद से जलघर संचालित करने का जिम्मा जनस्वास्थ्य विभाग ने संभाल रखा है।
दिसंबर माह में ही जल चुकी है मोटर
दिसंबर महीने में ही पूरे 24 घंटे तक अस्पताल में पानी की किल्लत देखी गई थी। इससे मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यदि बकाए बिल को समय रहते नहीं चुकाया गया तो जल्द ही यहां पानी का हाहाकार मच सकता है।
बकाए बिल को लेकर स्वास्थ्य विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। वार्षिक एस्टीमेट बनाकर पिछले दो सालों से विभाग को भेजा जा रहा है। अब तीन साल पूरे होने को है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कभी भी जलापूर्ति की समस्या आ सकती है।
सतीश कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग
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फोटो-8-पानी आपूर्ति के लिए सामान्य अस्पताल के प्रांगण स्थित जलघर