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Sonipat News: सीबीएसई परीक्षा के नियमों में बदलाव से विद्यार्थियाें पर दबाव होगा कम
Sat, 28 Jun 2025 11:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 28 Jun 2025 11:19 PM IST
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फोटो 19- सुमन बाला शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय कन्या विद्यालय, मुरथल अड्डा, सोनीपत।
सोनीपत। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से कक्षा 10वीं की परीक्षा के नियमों में बदलाव से विद्यार्थियों और शिक्षकों काे लाभ होगा। शिक्षकों का मानना है कि कक्षा 10वीं की परीक्षा दो चरणों में होने से विद्यार्थी पाठ्यक्रम का दो चरणों में अभ्यास कर सकेंगे। साथ ही शिक्षकों को भी उन्हें अध्ययन करवाने में सुगमता होगी। अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को अध्ययन का ज्यादा समय मिल सकेगा। यह बदलाव विद्यार्थी और शिक्षक दोनों के हित में होगा।
सीबीएसई के बदलावों के आधार पर वर्ष 2026 से कक्षा 10वीं की परीक्षा दो चरणों फरवरी और मई में ली जाएगी। इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दिशा में उचित कदम माना जा रहा है। सभी विद्यार्थियों को प्रथम चरण की परीक्षा में उपस्थित रहना अनिवार्य रहेगा। दूसरे चरण में विद्यार्थियों के पास विकल्प रहेगा। इससे विद्यार्थियों को अपने अंकों में सुधार करने का मौका भी मिल सकेगा। शिक्षकों ने उदाहरण के तौर पर बताया कि दोनों चरणाें में से जिस चरण में अंक ज्यादा होंगे वह मान्य रहेंगे।
महिला शिक्षकों के लिए एक और सराहनीय कदम
पीजीटी महिला शिक्षक कांता हुड्डा, रितुराज, दर्शना, बिट्टू शर्मा ने बताया कि सरकार व विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से महिला शिक्षकों के लिए एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। महिला शिक्षकों को अब 20 के बजाय 25 आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) मिल सकेंगे। शिक्षण सत्र के दौरान महिला शिक्षक आवश्यकता के समय इन अवकाश का लाभ उठा सकेंगी।
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सीबीएसई के परीक्षा नियमों का बदलाव स्वर्णिम साबित होगा। इस बदलाव से विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी फायदा होगा। वह पाठ्यक्रम का दो भागों में अच्छे से अध्ययन करवा सकेंगे। इससे विद्यार्थी पहले के अपेक्षा अब ज्यादा अंक प्राप्त कर सकेंगे। इससे निजी विद्यालयों के साथ राजकीय विद्यालयों के परीक्षा परिणाम में और सुधार होगा। विद्यार्थी पाठ्यक्रम को दो भागों में बांटकर अध्ययन कर सकेंगे। फैसला सभी के हित में रहेगा। -सुमन बाला शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय कन्या विद्यालय, मुरथल अड्डा।
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नियमों में बदलाव के तहत प्रथम चरण की परीक्षा देना सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है। अगर प्रथम चरण में विद्यार्थी कम अंक पाता है तो उसे दोबारा मौका मिलेगा। वह गलतियों में सुधार कर दूसरे चरण में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियाें का हौसला बढ़ेगा। किसी विषय में कमजोर विद्यार्थी दूसरे चरण में इसका सुधार कर सकेंगे। हालांकि पहले भी दो सेमेस्टर में परीक्षा लागू की गई थी, लेकिन इसे बाद में बंद कर दिया गया था। -विवेक शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय विद्यालय, गांव दातौली।
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परीक्षा देना सभी के लिए जरूरी है। शिक्षक यही कामना करते हैं कि विद्यार्थी बिना किसी तनाव के पाठ्यक्रम को पूरा कर परीक्षा में अच्छे अंकों से कक्षा को उत्तीर्ण करें। सीबीएसई की परीक्षा के नियमों में बदलाव से अगर विद्यार्थी पहले चरण में आशाजनक अंक हासिल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें दोबारा मौका मिलेगा। परीक्षा के तीन माह के अंतराल में शिक्षक भी और बेहतर अध्ययन करवा सकेंगे। यह कदम विद्यार्थियों के कॅरिअर निर्माण में उचित साबित होगा। -किरण दलाल, प्राचार्य, ब्राइट स्कॉलर स्कूल, सोनीपत।
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सीबीएसई के बदलावों के आधार पर वर्ष 2026 से कक्षा 10वीं की परीक्षा दो चरणों फरवरी और मई में ली जाएगी। इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दिशा में उचित कदम माना जा रहा है। सभी विद्यार्थियों को प्रथम चरण की परीक्षा में उपस्थित रहना अनिवार्य रहेगा। दूसरे चरण में विद्यार्थियों के पास विकल्प रहेगा। इससे विद्यार्थियों को अपने अंकों में सुधार करने का मौका भी मिल सकेगा। शिक्षकों ने उदाहरण के तौर पर बताया कि दोनों चरणाें में से जिस चरण में अंक ज्यादा होंगे वह मान्य रहेंगे।
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महिला शिक्षकों के लिए एक और सराहनीय कदम
पीजीटी महिला शिक्षक कांता हुड्डा, रितुराज, दर्शना, बिट्टू शर्मा ने बताया कि सरकार व विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से महिला शिक्षकों के लिए एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। महिला शिक्षकों को अब 20 के बजाय 25 आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) मिल सकेंगे। शिक्षण सत्र के दौरान महिला शिक्षक आवश्यकता के समय इन अवकाश का लाभ उठा सकेंगी।
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सीबीएसई के परीक्षा नियमों का बदलाव स्वर्णिम साबित होगा। इस बदलाव से विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी फायदा होगा। वह पाठ्यक्रम का दो भागों में अच्छे से अध्ययन करवा सकेंगे। इससे विद्यार्थी पहले के अपेक्षा अब ज्यादा अंक प्राप्त कर सकेंगे। इससे निजी विद्यालयों के साथ राजकीय विद्यालयों के परीक्षा परिणाम में और सुधार होगा। विद्यार्थी पाठ्यक्रम को दो भागों में बांटकर अध्ययन कर सकेंगे। फैसला सभी के हित में रहेगा। -सुमन बाला शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय कन्या विद्यालय, मुरथल अड्डा।
नियमों में बदलाव के तहत प्रथम चरण की परीक्षा देना सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है। अगर प्रथम चरण में विद्यार्थी कम अंक पाता है तो उसे दोबारा मौका मिलेगा। वह गलतियों में सुधार कर दूसरे चरण में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियाें का हौसला बढ़ेगा। किसी विषय में कमजोर विद्यार्थी दूसरे चरण में इसका सुधार कर सकेंगे। हालांकि पहले भी दो सेमेस्टर में परीक्षा लागू की गई थी, लेकिन इसे बाद में बंद कर दिया गया था। -विवेक शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय विद्यालय, गांव दातौली।
परीक्षा देना सभी के लिए जरूरी है। शिक्षक यही कामना करते हैं कि विद्यार्थी बिना किसी तनाव के पाठ्यक्रम को पूरा कर परीक्षा में अच्छे अंकों से कक्षा को उत्तीर्ण करें। सीबीएसई की परीक्षा के नियमों में बदलाव से अगर विद्यार्थी पहले चरण में आशाजनक अंक हासिल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें दोबारा मौका मिलेगा। परीक्षा के तीन माह के अंतराल में शिक्षक भी और बेहतर अध्ययन करवा सकेंगे। यह कदम विद्यार्थियों के कॅरिअर निर्माण में उचित साबित होगा। -किरण दलाल, प्राचार्य, ब्राइट स्कॉलर स्कूल, सोनीपत।

फोटो 19- सुमन बाला शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय कन्या विद्यालय, मुरथल अड्डा, सोनीपत।

फोटो 19- सुमन बाला शर्मा, प्राचार्य, पीएमश्री राजकीय कन्या विद्यालय, मुरथल अड्डा, सोनीपत।