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ग्राउंड रिपोर्टः आंदोलन लंबा खिंचा तो युवा किसानों को रोके रखना चुनौती  

Sun, 03 Jan 2021 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 Jan 2021 05:20 AM IST
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Challenge to stop young farmers if the movement is prolonged
किसानों का आंदोलन - फोटो : पीटीआई

कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों व सरकार के बीच लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन उसके बावजूद कोई फैसला अभी तक नहीं हो सका है और किसानों का आंदोलन लंबा होता जा रहा है। इससे किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। बुजुर्ग किसान किसी तरह से शांत है, लेकिन युवा किसान बार-बार उग्र हो रहे हैं और वह कभी एनएच 44 से गांवों के रास्ते व केजीपी-केएमपी को रोक रहे हैं तो दिल्ली में घुसने का प्रयास कर रहे हैं।

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ऐसे में युवा किसानों को शांत रखना किसान संगठनों के नेताओं के लिए बड़ी चुनौती है। जिसके लिए उनको बैठक तक करनी पड़ रही है। नेताओं ने खुद कहा कि सरकार के कारण आंदोलन लंबा होने से युवाओं का धैर्य जवाब दे रहा है, लेकिन सभी से शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। 
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नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर किसान डटे हुए है। वहां किसान लगातार बढ़ते जा रहे है और इतनी ठंड के बीच भी किसान का हौसला कम नहीं हो रहा है। इस बीच किसानों व सरकार के बीच लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन उसका हल कोई नहीं निकल रहा है। किसानों को अभी तक 37 दिन हो चुके हैं।

आंदोलन लंबा होने के साथ ही सरकार से बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकलता देख अब किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। बॉर्डर पर डटे किसानों में करीब 40 प्रतिशत युवा शामिल हैं। युवा किसानों का गुस्सा बढ़ा तो सबसे पहले नेशनल हाईवे 44 को केजीपी-केएमपी गोल चक्कर के पास से रोक दिया, जिससे आसपास के दस से ज्यादा गांव के लोग भी बाहर नहीं आ सकते थे। 

उन गांवों के सरपंचों ने किसान नेताओं के सामने आपत्ति जताई  तो नेशनल हाईवे 44 से पत्थर हटाने की सहमति बनी। उसके बाद युवा किसानों ने खुद ही केजीपी व केएमपी पर जाम लगा दिया और प्रशासन को संगठनों के नेताओं से बात करके जाम  खुलवाना पड़ा। अब संयुक्त किसान मोर्चा की सहमति के बिना ही जयपुर हाईवे से दिल्ली में जाने का प्रयास किया गया और उसको लेकर वहां काफी हंगामा हुआ। किसान नेता कहते है कि  युवाओं का धैर्य जवाब देने लगा है, लेकिन उनको समझाया जा रहा है और शांति व्यवस्था के साथ आंदोलन चलाने की अपील की गई है।


ये बोले किसान...
सरकार का जिस तरह का रवैया अभी तक है, उसको देखते हुए ऐसे में युवा किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। यह केवल युवा किसानों की बात नहीं है, बल्कि ऐसे में कोई भी होता तो वह भी धैर्य खोने लगता। युवा साथियों से बात की गई है कि संयुक्त किसान मोर्चा चाहता है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहे।  
योगेंद्र यादव, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा

हम लोगों को शुरुआत में लगता था कि आंदोलन कुछ दिन का रहेगा और सरकार मांगों को मान लेगी। सरकार अड़ी हुई है तो किसान भी हर हाल में कृषि कानून रद्द कराकर रहेंगे। अब चाहे एक महीने की जगह एक साल लग जाए। जिस तरह से किसानों ने शांति के साथ आंदोलन को चलाया हुआ है, वह तारीफ के काबिल है और युवा किसानों को लगातार शांति के साथ आंदोलन चलाने के लिए कहा जा रहा है। 
दर्शनपाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा

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