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द्विपक्षीय औपचारिक बातचीत से बच रही केंद्र सरकार : एसकेएम
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कुंडली बॉर्डर पर मुख्य मंच से किसानों को संबोधित करते वक्ता। संवाद
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि आंदोलन कर रहे किसानों की लंबित मांगों को लेकर सरकार द्विपक्षीय औपचारिक बातचीत से बच रही है। ऐसा करके सरकार किसानों को मोर्चों पर डटे रहने को बाध्य कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि उनके पास किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, जबकि पिछले साल औपचारिक वार्ता के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर मौन धारण किया था। इससे सरकार की असलियत सामने आ गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने वीरवार को कहा कि लंबित मांगों को लेकर जब तक सरकार बातचीत करने के लिए टेबल पर नहीं बैठती तब तक समाधान निकलने वाला नहीं है। मांगों के संबंध में किसी औपचारिक वार्ता के बिना भारत सरकार उन्हें मोर्चों पर बने रहने के लिए मजबूर कर रही है और गतिरोध बना हुआ है। किसान सरकार द्वारा सकारात्मक कार्रवाई और उनकी जायज मांगों को पूरा किए जाने के लिए आज भी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हैं।
एसकेएम नेता ने कहा कि जहां सरकार कह रही है कि उसके पास प्रदर्शनकारी किसानों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह कहकर सरकार किसानों का अपमान कर रही है। इतना ही नहीं सरकार द्वारा नागरिकों के मूल अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष की बड़ी कीमत को नकारने से किसान वर्ग अपमानित महसूस करता है। उन्हें याद दिलाते हैं कि पिछले साल औपचारिक वार्ता के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर मौन धारण किया था। उनके पास सभी आंदोलन के वीर शहीदों का रिकॉर्ड हैं और शहीदों के परिजनों के पुनर्वास की मांग पूरी करने के लिए सरकार का इंतजार रहा है।
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एसकेएम ने संज्ञान लिया कि हरियाणा सरकार के प्रतिनिधि बार-बार कह रहे हैं कि जब हजारों किसानों के खिलाफ दर्ज सैकड़ों मामले वापस लेने की बात आती है तो वे केंद्र के निर्देशों पर कार्रवाई करेंगे। जाहिर है कि भाजपा की राज्य सरकारें इस मामले पर केंद्र की कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं और किसी भी मामले में दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे स्थानों पर मामलों को सीधे केंद्र सरकार को वापस लेना होगा। एसकेएम ने कहा कि उनकी लंबित मांगों में शामिल इस मांग को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जाए।
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संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने वीरवार को कहा कि लंबित मांगों को लेकर जब तक सरकार बातचीत करने के लिए टेबल पर नहीं बैठती तब तक समाधान निकलने वाला नहीं है। मांगों के संबंध में किसी औपचारिक वार्ता के बिना भारत सरकार उन्हें मोर्चों पर बने रहने के लिए मजबूर कर रही है और गतिरोध बना हुआ है। किसान सरकार द्वारा सकारात्मक कार्रवाई और उनकी जायज मांगों को पूरा किए जाने के लिए आज भी धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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एसकेएम नेता ने कहा कि जहां सरकार कह रही है कि उसके पास प्रदर्शनकारी किसानों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह कहकर सरकार किसानों का अपमान कर रही है। इतना ही नहीं सरकार द्वारा नागरिकों के मूल अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष की बड़ी कीमत को नकारने से किसान वर्ग अपमानित महसूस करता है। उन्हें याद दिलाते हैं कि पिछले साल औपचारिक वार्ता के दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर मौन धारण किया था। उनके पास सभी आंदोलन के वीर शहीदों का रिकॉर्ड हैं और शहीदों के परिजनों के पुनर्वास की मांग पूरी करने के लिए सरकार का इंतजार रहा है।
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एसकेएम ने संज्ञान लिया कि हरियाणा सरकार के प्रतिनिधि बार-बार कह रहे हैं कि जब हजारों किसानों के खिलाफ दर्ज सैकड़ों मामले वापस लेने की बात आती है तो वे केंद्र के निर्देशों पर कार्रवाई करेंगे। जाहिर है कि भाजपा की राज्य सरकारें इस मामले पर केंद्र की कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं और किसी भी मामले में दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे स्थानों पर मामलों को सीधे केंद्र सरकार को वापस लेना होगा। एसकेएम ने कहा कि उनकी लंबित मांगों में शामिल इस मांग को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जाए।