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Sonipat News: भारत बाइट कार्यक्रम से नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
Sun, 19 Oct 2025 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 19 Oct 2025 01:49 AM IST
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फोटो 13- सोनीपत के राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में
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सोनीपत। राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में शनिवार को देश में गहन तकनीक एवं अर्ध चालक नवाचार (डीपटेक व सेमी कंडक्टर नवाचार) को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत बाइट कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन अटल इन्क्यूबेशन सेंटर आईआईटी दिल्ली ने नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण फाउंडेशन व उद्योग भागीदार प्रतिनिधियों के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य सेमी कंडक्टर व उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत डीपटेक स्टार्टअप व नवाचार कर्ताओं की मजबूत शृंखला तैयार करना रहा। भारत बाइट कार्यक्रम की शुरुआत एफआईटीटी आईआईटी दिल्ली के प्रबंध निदेशक डॉ. निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन में की गई। इस दौरान भारत में डीपटेक एवं सेमी कंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण विषय पर कार्यशाला आयोजित कर चर्चा की गई।
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कार्यशाला का संचालन एआईसी आईआईटी दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक पांडेय ने किया। उन्होंने बताया कि भारत बाइट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक रणनीति है, जो देश की नवाचार क्षमताओं को उच्च प्रभाव वाले डीपटेक उद्यमों की दिशा में ले जाएगी।
मुख्य वक्ता के रूप में एफआईटीटी आईआईटी दिल्ली के सलाहकार एवं पीएम वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के पूर्व सचिव डॉ. अरविंद मित्रा, एनआईटी, कुरुक्षेत्र से निदेशक प्रो. बीवी रामना रेड्डी, एसटी माइक्रोइ लेक्ट्रॉनिक्स के नवाचार निदेशक मनोज कुमार, आईवी कैप वेंचर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष गुप्ता, गेटवे एजुकेशन के महानिदेशक कर्नल डॉ. ए गर्ग शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने भारत की सेमी कंडक्टर क्षमता, डीपटेक स्टार्टअप्स को पोषित करने की आवश्यकता, अकादमिक संस्थानों, उद्योग व सरकार के बीच सहयोग की अहम भूमिका पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेल ब्लैक गोल्ड था, लेकिन चिप्स डिजिटल डायमंड हैं।
कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय अनुसंधान सुविधा (सीआरएफ) से डॉ. दिनेश कुमार दीक्षित ने सेमी कंडक्टर लैब फैसिलिटी पर विशेष तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने सेमी कंडक्टर निर्माण व परीक्षण में आईआईटी दिल्ली की अत्याधुनिक प्रयोगशाला क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि कैसे यह राष्ट्रीय स्तरीय सुविधा स्टार्टअप व शोधकर्ताओं के लिए एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान कर सकती है। कार्यक्रम में एआईसी आईआईटी दिल्ली के प्रबंधक डॉ. हिमांशु अग्रवाल मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का आयोजन अटल इन्क्यूबेशन सेंटर आईआईटी दिल्ली ने नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण फाउंडेशन व उद्योग भागीदार प्रतिनिधियों के सहयोग से किया गया।
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कार्यक्रम का उद्देश्य सेमी कंडक्टर व उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत डीपटेक स्टार्टअप व नवाचार कर्ताओं की मजबूत शृंखला तैयार करना रहा। भारत बाइट कार्यक्रम की शुरुआत एफआईटीटी आईआईटी दिल्ली के प्रबंध निदेशक डॉ. निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन में की गई। इस दौरान भारत में डीपटेक एवं सेमी कंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण विषय पर कार्यशाला आयोजित कर चर्चा की गई।
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कार्यशाला का संचालन एआईसी आईआईटी दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक पांडेय ने किया। उन्होंने बताया कि भारत बाइट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक रणनीति है, जो देश की नवाचार क्षमताओं को उच्च प्रभाव वाले डीपटेक उद्यमों की दिशा में ले जाएगी।
मुख्य वक्ता के रूप में एफआईटीटी आईआईटी दिल्ली के सलाहकार एवं पीएम वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के पूर्व सचिव डॉ. अरविंद मित्रा, एनआईटी, कुरुक्षेत्र से निदेशक प्रो. बीवी रामना रेड्डी, एसटी माइक्रोइ लेक्ट्रॉनिक्स के नवाचार निदेशक मनोज कुमार, आईवी कैप वेंचर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष गुप्ता, गेटवे एजुकेशन के महानिदेशक कर्नल डॉ. ए गर्ग शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने भारत की सेमी कंडक्टर क्षमता, डीपटेक स्टार्टअप्स को पोषित करने की आवश्यकता, अकादमिक संस्थानों, उद्योग व सरकार के बीच सहयोग की अहम भूमिका पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेल ब्लैक गोल्ड था, लेकिन चिप्स डिजिटल डायमंड हैं।
कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय अनुसंधान सुविधा (सीआरएफ) से डॉ. दिनेश कुमार दीक्षित ने सेमी कंडक्टर लैब फैसिलिटी पर विशेष तकनीकी प्रस्तुति दी। उन्होंने सेमी कंडक्टर निर्माण व परीक्षण में आईआईटी दिल्ली की अत्याधुनिक प्रयोगशाला क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि कैसे यह राष्ट्रीय स्तरीय सुविधा स्टार्टअप व शोधकर्ताओं के लिए एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान कर सकती है। कार्यक्रम में एआईसी आईआईटी दिल्ली के प्रबंधक डॉ. हिमांशु अग्रवाल मौजूद रहे।