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एशियन गेम्स: सुनील ने 13 साल बाद ग्रीको रोमन कुश्ती में दिलाया पदक, वर्ष 2010 में 2 पहलवानों ने जीते थे कांस्य
Wed, 04 Oct 2023 10:55 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 04 Oct 2023 10:55 PM IST
सार
फतेहपुर के ज्ञानेंद्र और जुआं के नीरज पदक नहीं जीत सके। एशियन गेम्स में वर्ष 2010 में दो पहलवानों ने कांस्य पदक जीते थे। सुनील मलिक की मां अनीता देवी का कहना है कि हमें बेटे की उपलब्धि पर गर्व है।
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सुनील
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सोनीपत के गांव डबरपुर के पहलवान सुनील ने चीन के हांगझोऊ में चल रहे एशियन गेम्स में देश के लिए पहला कांस्य पदक जीता है। ग्रीको रोमन वर्ग में उन्होंने 13 साल बाद पदक दिलाया है। इससे पहले ग्वांग्झू एशियाई खेलों में देश के दो पहलवानों ने कांस्य पदक जीते थे।
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गांव डबरपुर निवासी सुमित मलिक ने बताया कि उनके छोटे भाई सुनील ने 87 किलोग्राम भारवर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुनील ने किर्गिस्तान के अताबेक अतीसबेकोव को 2-1 के अंतर से हराकर देश की झोली में पदक डाला है। इससे पहले वह इसी वर्ष अगस्त में रोमानिया कप में गोल्ड, अप्रैल में कजाकिस्तान के अस्ताना में हुई सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके है।
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वहीं दिल्ली में वर्ष 2020 में हुई सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण जीता था। सुनील मलिक की मां अनीता देवी का कहना है कि हमें बेटे की उपलब्धि पर गर्व है। किसान परिवार से संबंध रखने वाले सुनील मलिक जब कक्षा पांचवीं में थे तभी से उन्होंने पहलवानी में हाथ आजमाना शुरू किया था।
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एशियन गेम्स में सुनील के कांस्य पदक जीतने पर सोनीपत के गांव डबरपुर में खुशी मनाते परिजन। स्रोत-परिजन
उन्होंने सबसे पहले निडानी में कुश्ती की तैयारी शुरू की। इसके बाद वह खरखौदा के प्रताप अकादमी में प्रशिक्षण लिया। यहां के बाद रोहतक में मेहर सिंह अखाड़े में कुश्ती की तैयारी करते रहे। सुनील इससे पहले भी वर्ष 2018 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण, 2019 में हुई विश्व रैंकिंग सीरीज में रजत व वर्ष 2019 में हुई सीनियर एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ा चुके हैं।
उनके पिता अश्वनी मलिक का निधन हो चुका है। वह दिल्ली एमसीडी में कार्यरत थे। उनके निधन के बाद सुनील मलिक के बड़े भाई सुमित मलिक ने परिवार की जिम्मेदारी को संभाला है। सुनील के छोटे भाई नितिन नेवी में हैं।
13 साल के सूखे को किया समाप्त
सुनील मलिक ने एशियन गेम्स कुश्ती के ग्रीको रोमन वर्ग में 13 साल के सूखे को खत्म किया है। इससे पहले वर्ष 2010 में ग्वांग्झू में 60 किलो भारवर्ग के पहलवान रविंद्र सिंह व 66 किलो में उत्तर प्रदेश के पहलवान सुनील राणा ने कांस्य पदक दिलाए थे। उसके बाद वर्ष 2014 व 2018 में ग्रीको रोमन में कोई पदक नहीं मिल सका।
गांव में आने पर होगा स्वागत
सुनील मलिक के बड़े भाई सुमित ने बताया कि उन्हें अपने भाई की उपलब्धि पर गर्व है। गांव में आने पर भाई का जोरदार स्वागत किया जाएगा।
ज्ञानेंद्र व नीरज पहले दौर में बाहर
प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे सोनीपत के गांव फतेहपुर के ज्ञानेंद्र ईरान के पहलवान व जुआं के नीरज उज्बेकिस्तान के पहलवान से हारकर बाहर हो गए हैं।