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एपीसी ने किया 13 विशेष केंद्रों का निरीक्षण, दिए उचित दिशा-निर्देश
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विशेष केंद्र पर निरीक्षण के दौरान बच्चों से बातचीत करते सहायक परियोजना संयोजक रूपेंद्र पूनिया व
- फोटो : Sonipat
समग्र शिक्षा अभियान के तहत चलाए जा रहे विशेष केंद्रों पर दी जाने वाली सुविधाओं को जांचने के लिए सहायक परियोजना संयोजक (एपीसी) रूपेंद्र पूनिया ने अपनी टीम के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने राई खंड में चल रहे 13 विशेष केंद्रों का निरीक्षण करते हुए यहां दी जाने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान सभी केंद्रों पर बच्चों की हाजिरी जांची गई। साथ ही अध्यापकों की दैनिक डायरी, हाजिरी रजिस्टर भी जांचे गए। केंद्रों पर बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए दिशा-निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण के दौरान उनके साथ बलविंद्र शर्मा भी मौजूद रहे।
शिक्षा से वंचित बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले में 34 विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। इनमें सोनीपत व गन्नौर में दो-दो और राई खंड में 30 विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। सहायक परियोजना संयोजक रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन (ओओएससी) यानी जो बच्चे आज तक स्कूल ही नहीं गए। ऐसे बच्चों को शिक्षा की डगर पर लाने के लिए सर्वे करवाया जाता है। इस सर्वे के लिए राजकीय स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाती है। ये अध्यापक सर्वे कर वार्ड अनुसार अपनी रिपोर्ट तैयार कर विभाग में जमा करवाते हैं। जिसके बाद शिक्षा स्वयंसेवक (ईवी) इन बच्चों के घर जाते हैं और इनके परिजनों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए विशेष केंद्रों पर भेजने के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
राजकीय स्कूलों में चलाए जा रहे हैं विशेष केंद्र
एपीसी रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि जिले में चलाए जा रहे सभी 34 विशेष केंद्र प्राथमिक स्कूलों में ही चलाए जा रहे हैं। एक केंद्र पर 25 से 30 बच्चे होते हैं, जिन्हें शिक्षित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर एक शिक्षा स्वयंसेवक की ड्यूटी लगाई जाती है। विशेष केंद्र में आने वाले सभी बच्चों को स्कूल पोशाक, किताबें, खाना व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है। संबंधित स्कूल मुखिया को भी निगरानी करने के लिए कहा जाता है।
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आयु व स्तर अनुसार दिलवाया जाता है दाखिला
रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि विशेष केंद्रों पर 6 से 18 साल तक के ऐसे बच्चे आते हैं, जो कभी स्कूल ही नहीं गए। इन बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है। उसके बाद उनकी आयु व स्तर के अनुसार उनका दाखिला राजकीय स्कूलों मेें करवाया जाता है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के ये बच्चे भी शिक्षा की डगर पर चलते हुए अपने लिए अलग मुकाम बना सकें।
वर्जन
जो बच्चे आज तक स्कूल नहीं गए, उन्हें स्कूल की डगर पर लाने के लिए जिले में विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही किताबें, पोशाक व खाना नि:शुल्क दिए जाता है। विशेष केंद्रों पर व्यवस्था जांचने के लिए एपीसी ने निरीक्षण किया था, अधिकतर स्थानों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं, जहां कमियां मिलीं, उन्हें उचित दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
- नवीन गुलिया, जिला परियोजना संयोजक, सोनीपत
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शिक्षा से वंचित बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले में 34 विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। इनमें सोनीपत व गन्नौर में दो-दो और राई खंड में 30 विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। सहायक परियोजना संयोजक रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन (ओओएससी) यानी जो बच्चे आज तक स्कूल ही नहीं गए। ऐसे बच्चों को शिक्षा की डगर पर लाने के लिए सर्वे करवाया जाता है। इस सर्वे के लिए राजकीय स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाती है। ये अध्यापक सर्वे कर वार्ड अनुसार अपनी रिपोर्ट तैयार कर विभाग में जमा करवाते हैं। जिसके बाद शिक्षा स्वयंसेवक (ईवी) इन बच्चों के घर जाते हैं और इनके परिजनों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए विशेष केंद्रों पर भेजने के लिए तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
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राजकीय स्कूलों में चलाए जा रहे हैं विशेष केंद्र
एपीसी रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि जिले में चलाए जा रहे सभी 34 विशेष केंद्र प्राथमिक स्कूलों में ही चलाए जा रहे हैं। एक केंद्र पर 25 से 30 बच्चे होते हैं, जिन्हें शिक्षित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर एक शिक्षा स्वयंसेवक की ड्यूटी लगाई जाती है। विशेष केंद्र में आने वाले सभी बच्चों को स्कूल पोशाक, किताबें, खाना व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है। संबंधित स्कूल मुखिया को भी निगरानी करने के लिए कहा जाता है।
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आयु व स्तर अनुसार दिलवाया जाता है दाखिला
रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि विशेष केंद्रों पर 6 से 18 साल तक के ऐसे बच्चे आते हैं, जो कभी स्कूल ही नहीं गए। इन बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है। उसके बाद उनकी आयु व स्तर के अनुसार उनका दाखिला राजकीय स्कूलों मेें करवाया जाता है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के ये बच्चे भी शिक्षा की डगर पर चलते हुए अपने लिए अलग मुकाम बना सकें।
वर्जन
जो बच्चे आज तक स्कूल नहीं गए, उन्हें स्कूल की डगर पर लाने के लिए जिले में विशेष केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही किताबें, पोशाक व खाना नि:शुल्क दिए जाता है। विशेष केंद्रों पर व्यवस्था जांचने के लिए एपीसी ने निरीक्षण किया था, अधिकतर स्थानों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं, जहां कमियां मिलीं, उन्हें उचित दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
- नवीन गुलिया, जिला परियोजना संयोजक, सोनीपत