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नियम 134ए के पात्र विद्यार्थियों को दाखिला न मिलने से गुस्साए अभिभावकों ने किया प्रदर्शन
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मॉडल टाउन स्थित बीईओ कार्यालय पर मांगों को लेकर नारेबाजी करते अभिभावक। संवाद
- फोटो : Sonipat
नियम 134ए के तहत मूल्यांकन परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिलने से गुस्साए अभिभावकों ने मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंच प्रदर्शन किया।
छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी के नेतृत्व में पहुंचे अभिभावकों ने सरकार, शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। अभिभावकों ने मांग की कि मूल्यांकन परीक्षा पास करने वाले सभी विद्यार्थियों को नियम-134ए के तहत अलॉट किए गए स्कूलों में दाखिले दिलवाए जाएं। इस दौरान अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अपनी मांग रखी।
छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी ने बताया कि शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र के बीच में नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। 5 दिसंबर 2021 को हुई मूल्यांकन परीक्षा का परिणाम 16 दिसंबर को जारी किया गया, जिसमें 3118 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इन विद्यार्थियों ने नए स्कूल में जाने के लिए पुराने स्कूलों से एसएलसी निकला लिए, लेकिन इन्हें नए स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया। शिक्षा विभाग के तीन बार दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद अधिकतर निजी स्कूलों ने दाखिले नहीं दिए। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी तक 1165 विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाया था, जबकि 622 विद्यार्थियों के दाखिले निरस्त कर दिए थे। 1028 विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ दाखिले के लिए भटकते रहे।
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अभिभावकों ने प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों और सीएम विंडो पर शिकायत दी, लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ। जिसके बाद अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस बीच सरकार ने निजी स्कूलोें के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए नियम 134ए को ही खत्म कर दिया। इस मामले में उच्च न्यायालय ने अभिभावकोें के पक्ष में फैसला दिया है। प्रवेश कुमारी का कहना है कि केस जीतने के बाद भी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जिससे अभिभावकों में रोष है। प्रवेश कुमारी ने कहा कि जब तक पात्र विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
पहले दाखिल बच्चे पढ़ते रहेंगे
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने कहा कि नियम-134ए के तहत जिन बच्चों का दाखिला हो चुका है, वे इस नियम के तहत ही निजी स्कूलों में नि:शुल्क पढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल संचालक उनसे फीस की मांग करता है या स्कूल से निकालता है तो इसकी शिकायत शिक्षा अधिकारियों को दें। उन्होंने कहा कि पात्र विद्यार्थियों से अगर शिक्षा का अधिकार छीना गया तो वे चुप नहीं रहेंगे।
नियम-134ए को सरकार ने खत्म कर दिया है। इस नियम के तहत भविष्य में दाखिले नहीं होंगे। हालांकि जिन बच्चों के दाखिले हो चुके हैं, वे पढ़ते रहेंगे। अगर कोई स्कूल उन्हें नि:शुल्क पढ़ाने से मना करता है तो इसकी शिकायत कार्यालय में दें। तुरंत कार्रवाई की जाएगी। बिजेंद्र नरवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
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छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी के नेतृत्व में पहुंचे अभिभावकों ने सरकार, शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। अभिभावकों ने मांग की कि मूल्यांकन परीक्षा पास करने वाले सभी विद्यार्थियों को नियम-134ए के तहत अलॉट किए गए स्कूलों में दाखिले दिलवाए जाएं। इस दौरान अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अपनी मांग रखी।
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छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी ने बताया कि शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र के बीच में नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। 5 दिसंबर 2021 को हुई मूल्यांकन परीक्षा का परिणाम 16 दिसंबर को जारी किया गया, जिसमें 3118 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इन विद्यार्थियों ने नए स्कूल में जाने के लिए पुराने स्कूलों से एसएलसी निकला लिए, लेकिन इन्हें नए स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाया। शिक्षा विभाग के तीन बार दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ाने के बावजूद अधिकतर निजी स्कूलों ने दाखिले नहीं दिए। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी तक 1165 विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाया था, जबकि 622 विद्यार्थियों के दाखिले निरस्त कर दिए थे। 1028 विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ दाखिले के लिए भटकते रहे।
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अभिभावकों ने प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों और सीएम विंडो पर शिकायत दी, लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ। जिसके बाद अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस बीच सरकार ने निजी स्कूलोें के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए नियम 134ए को ही खत्म कर दिया। इस मामले में उच्च न्यायालय ने अभिभावकोें के पक्ष में फैसला दिया है। प्रवेश कुमारी का कहना है कि केस जीतने के बाद भी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। जिससे अभिभावकों में रोष है। प्रवेश कुमारी ने कहा कि जब तक पात्र विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
पहले दाखिल बच्चे पढ़ते रहेंगे
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने कहा कि नियम-134ए के तहत जिन बच्चों का दाखिला हो चुका है, वे इस नियम के तहत ही निजी स्कूलों में नि:शुल्क पढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल संचालक उनसे फीस की मांग करता है या स्कूल से निकालता है तो इसकी शिकायत शिक्षा अधिकारियों को दें। उन्होंने कहा कि पात्र विद्यार्थियों से अगर शिक्षा का अधिकार छीना गया तो वे चुप नहीं रहेंगे।
नियम-134ए को सरकार ने खत्म कर दिया है। इस नियम के तहत भविष्य में दाखिले नहीं होंगे। हालांकि जिन बच्चों के दाखिले हो चुके हैं, वे पढ़ते रहेंगे। अगर कोई स्कूल उन्हें नि:शुल्क पढ़ाने से मना करता है तो इसकी शिकायत कार्यालय में दें। तुरंत कार्रवाई की जाएगी। बिजेंद्र नरवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।