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छात्र मिलन से दिया सद्भावना और स्वच्छता का संदेश
alumni association
Updated Mon, 30 Nov 2015 12:18 AM IST
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मोतीलाल नेहरू खेलकूद विद्यालय के पूर्व छात्रों का मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल नरवीर सिंह ने किया। मंच का संचालन ले कर्नल प्रवीण ग्रेवाल और संजय अहलावत ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर पूर्व शिक्षिका मोहिनी घोष ने राष्ट्रवाद और अधिकारों के बारे में पूर्व छात्रों को संबोधित किया। कार्यक्रम में स्कूल के छात्र संघ प्रवक्ता राजेश वशिष्ठ ने सभी पूर्व छात्रों का आभार व्यक्त किया और कहा कि आज बड़ा खुशी का दिन है कि इसी स्कूल के छात्र जो आज बड़े- बड़े पदों पर विराजमान है, सभी एक जगह इकट्ठे हैं। कार्यक्रम में मनु मलिक, एचएस अंटाल, एमपी सिंह आदि ने कहा कि छात्र मिलन से सद्भावना और स्वच्छता का संदेश दिया है। इस मौके पर भूतपूर्व छात्रों में से कुछ सेना में थे जो शहीद हो गए, उनकी याद में भारतीय सेना के तीनों अंगों से मिलकर कर्नल राजीव ओहाल्यान के नेतृत्व में एक वार मेमोरियल बनाया और टैंक भेंट किया गया। कार्यक्रम में कर्नल राजेश मलिक ने कहा कि अगर सरकार विद्यालय को लेकर थोड़ा गंभीरता दिखाए तो छात्रसंघ कंधे से कंधा मिलाकर अपना दायित्व निभाएगा। इसके अलावा डॉ. अमित मलिक, प्रमोद सहवाग, कुलदीप दहिया, राजेश कात्याल आदि ने विद्यालय में छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु रूपरेखा पेश की। ताकि इस विद्यालय की ख्याति को दोबारा प्राप्त किया जा सके। इस मौके पर सतीश शर्मा, मांझी फिल्म के लेखक महेंद्र जाखड़, धाविका सरिता मलिक, चित्रा सरवारा, बिहार से जितेंद्र राणा आदि ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हंसी-खुशी और पुरानी यादों में बीता कार्यक्रम
पूर्व छात्र मिलन समारोह पूरी तरह से हंसी-खुशी के माहौल में बीता। पुराने छात्र आपस में मिलकर पुरानी यादें ताजा करते दिखे। कर्नल रैंक के अधिकारी भी अपने पुराने दोस्तों से बिना किसी औपचारिकता के आत्मीयता से मिले। हालांकि अधिकतर अधिकारी ऐसे थे जोकि ज्यादा समय तक कार्यक्रम में नहीं रहे। जबकि विजय नेहरा, अभिनेता रणदीप हुड्डा, संजय कुंडू कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए।
क्या बोले पूर्व छात्र
========================
वर्ष 1984 के बैच में बारहवीं स्कूल से पास की थी। काफी अच्छा लग रहा है अपने पुराने दोस्तों से मिलकर। कोई अधिकारी बन गया है तो कोई बिजनेसमैन। मैं हर बार कोशिश करता हूं कि समारोह में पहुंच जाउं सिर्फ इसीलिए ताकि पुरानी यादें ताजा हो सकें
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-कुलदीप दहिया, उप जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत
1999 बैंच का छात्र रहा हूं, उसके बाद दिल्ली से एलएलबी की थी। अबकी बार जींद से विधानसभा चुनाव लड़ा था कांग्रेस के टिकट पर। मेरी स्कूल से भावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसीलिए हमेशा यही सोच रहती है कि जो भी बच्चा स्कूल में आए उसकी सहायता करें।
प्रमोद सहवाग, कांग्रेस नेता
1991 में बारहवीं पास की थी। इसके बाद फुटबाल की राष्ट्रीय टीम का सदस्य भी रहा। सेना में जाने के बाद उत्तर भारत में उग्रवाद कम करने में सहयोग दिया। मैं हर बार यहां आता हूं, मुझे अपने स्कूल से पूरा लगाव है। पुराने दोस्तों से मिलकर यादें ताजा हो जाती हैं।
-कर्नल एवं पूर्व फुटबाल खिलाड़ी राजेश मलिक पत्नी शालिनी के साथ।
मैं भी पूर्व में फुटबाल खिलाड़ी रह चुका हूं, नेशनल टीम में भी रहा हूं, लेकिन एक समय जब कॅरियर के चुनाव का आया तो डॉक्टरी का पेशा चुना। क्योंकि शिक्षा ही एक ऐसी चीज है, जो कोई भी छीन नहीं सकता। वैसे भी उस समय खेलों में कॅरियर नहीं बनता था।
-डॉ. अमित मलिक, न्यूरोसर्जन, डीएल कपूर अस्पताल, दिल्ली
बास्केटबॉल का खिलाड़ी रहा हूं राष्ट्रीय टीम में। मेरा मानना है जो करना है देश के लिए करना है। शहीद मेमोरियल बनाने की प्रेरणा यूं मिली ताकि हम उन शहीदों को याद कर सकें, जो कभी हमारे साथी रहे हैं। हमारे बच्चे देखें कि किस तरह से देश पर जान न्यौछावर करने वाले लोग अमर हो जाते हैं।
-कर्नल एवं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी बॉस्केटबॉल राजीव ओहल्याण
हमेशा से ही सफाई के लिए मैं बेहद गंभीर था। अब केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान से प्रेरित हूं। इसीलिए एक डस्टबिन बनाया है जो कई प्रकार के कूड़े को स्वयं ही डिस्पोज कर देता है। इसका व्यवसायिक उत्पादन भी किया जा रहा है।
-राजेश कत्याल, उद्योगपति
अमेरिका में 100 करोड़ का बिजनेस था, लेकिन देश में कुछ करने के लिए वहां से वापस आ गए। ऐसी मशीनें बना रहे हैं, जो पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हैं और कपड़ों में से अलग-अलग तरह के कीटाणुओं का खात्मा करती है। मेडिकल स्टाफ के कपड़ों के लिए यह मशीनें बनाई जा रही हैं।
-शशिभूषण बाल्याण, उद्योगपति
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हंसी-खुशी और पुरानी यादों में बीता कार्यक्रम
पूर्व छात्र मिलन समारोह पूरी तरह से हंसी-खुशी के माहौल में बीता। पुराने छात्र आपस में मिलकर पुरानी यादें ताजा करते दिखे। कर्नल रैंक के अधिकारी भी अपने पुराने दोस्तों से बिना किसी औपचारिकता के आत्मीयता से मिले। हालांकि अधिकतर अधिकारी ऐसे थे जोकि ज्यादा समय तक कार्यक्रम में नहीं रहे। जबकि विजय नेहरा, अभिनेता रणदीप हुड्डा, संजय कुंडू कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए।
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क्या बोले पूर्व छात्र
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वर्ष 1984 के बैच में बारहवीं स्कूल से पास की थी। काफी अच्छा लग रहा है अपने पुराने दोस्तों से मिलकर। कोई अधिकारी बन गया है तो कोई बिजनेसमैन। मैं हर बार कोशिश करता हूं कि समारोह में पहुंच जाउं सिर्फ इसीलिए ताकि पुरानी यादें ताजा हो सकें
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-कुलदीप दहिया, उप जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत
1999 बैंच का छात्र रहा हूं, उसके बाद दिल्ली से एलएलबी की थी। अबकी बार जींद से विधानसभा चुनाव लड़ा था कांग्रेस के टिकट पर। मेरी स्कूल से भावनाएं जुड़ी हुई हैं, इसीलिए हमेशा यही सोच रहती है कि जो भी बच्चा स्कूल में आए उसकी सहायता करें।
प्रमोद सहवाग, कांग्रेस नेता
1991 में बारहवीं पास की थी। इसके बाद फुटबाल की राष्ट्रीय टीम का सदस्य भी रहा। सेना में जाने के बाद उत्तर भारत में उग्रवाद कम करने में सहयोग दिया। मैं हर बार यहां आता हूं, मुझे अपने स्कूल से पूरा लगाव है। पुराने दोस्तों से मिलकर यादें ताजा हो जाती हैं।
-कर्नल एवं पूर्व फुटबाल खिलाड़ी राजेश मलिक पत्नी शालिनी के साथ।
मैं भी पूर्व में फुटबाल खिलाड़ी रह चुका हूं, नेशनल टीम में भी रहा हूं, लेकिन एक समय जब कॅरियर के चुनाव का आया तो डॉक्टरी का पेशा चुना। क्योंकि शिक्षा ही एक ऐसी चीज है, जो कोई भी छीन नहीं सकता। वैसे भी उस समय खेलों में कॅरियर नहीं बनता था।
-डॉ. अमित मलिक, न्यूरोसर्जन, डीएल कपूर अस्पताल, दिल्ली
बास्केटबॉल का खिलाड़ी रहा हूं राष्ट्रीय टीम में। मेरा मानना है जो करना है देश के लिए करना है। शहीद मेमोरियल बनाने की प्रेरणा यूं मिली ताकि हम उन शहीदों को याद कर सकें, जो कभी हमारे साथी रहे हैं। हमारे बच्चे देखें कि किस तरह से देश पर जान न्यौछावर करने वाले लोग अमर हो जाते हैं।
-कर्नल एवं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी बॉस्केटबॉल राजीव ओहल्याण
हमेशा से ही सफाई के लिए मैं बेहद गंभीर था। अब केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान से प्रेरित हूं। इसीलिए एक डस्टबिन बनाया है जो कई प्रकार के कूड़े को स्वयं ही डिस्पोज कर देता है। इसका व्यवसायिक उत्पादन भी किया जा रहा है।
-राजेश कत्याल, उद्योगपति
अमेरिका में 100 करोड़ का बिजनेस था, लेकिन देश में कुछ करने के लिए वहां से वापस आ गए। ऐसी मशीनें बना रहे हैं, जो पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हैं और कपड़ों में से अलग-अलग तरह के कीटाणुओं का खात्मा करती है। मेडिकल स्टाफ के कपड़ों के लिए यह मशीनें बनाई जा रही हैं।
-शशिभूषण बाल्याण, उद्योगपति