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Sonipat News: कृषि वानिकी से बढ़ेगी हरियाली, किसानों को होगी अतिरिक्त आय
Fri, 20 Jun 2025 01:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:07 AM IST
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फोटो 08: सोनीपत के खुबडू के पास वन विभाग की पौधशाला में तैयार पौधे। स्रोत वन विभाग
सोनीपत। धरती पर हरियाली बढ़ने से ही पर्यावरण संतुलित हो सकता है। आमजन व किसान पर्यावरण संरक्षण की कवायद में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिलचस्पी लें इस मंशा के साथ छायादार के अलावा फलदार वृक्षों के पौधे भी ज्यादा तैयार किए जाएंगे। फलदार वृक्ष बढ़ने से हरियाली बढ़ने के साथ किसान की अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन जाएगा।
किसी भी क्षेत्र में संतुलित पर्यावरण के लिए 33 फीसदी भूभाग में हरियाली जरूरी है। वन विभाग संरक्षित वन क्षेत्र को सत फीसदी हरित आवरण में तब्दील करने में भी सफल हो जाए तब भी संतुलित पर्यावरण के लिए वृक्षों का जरूरी अनुपात पूरा नहीं होता है। इस वजह से किसानों से लेकर आमजन को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहभागी बनाने की कोशिश की जा रही है।
कृषि वानिकी उसी कवायद का हिस्सा है। खासतौर से योजना के तहत किसान अपने खेत के मेड़ों पर सफेदा के पेड़ तैयार करेंगे। इसकी लकड़ी बेचकर किसान दोहरी आमदनी करेंगे। साथ ही फसल को भी नुकसान नहीं होगा। इसके साथ ही कृषि वानिकी से संबंधित अन्य फलदार वृक्षों के पौधे भी पौधशालाओं में तैयार किए जाएंगे।
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पौधशालाओं में आम, सगौन, शीशम, पाकड़, अर्जुन के परंपरागत वृक्षों के अलावा फलदार वृक्षों के पौधे तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य के अनुरूप पौधे तैयार करने के लिए वन विभाग की नर्सरियों को भी उच्चीकृत किया जा रहा है। लक्ष्य से तीस फीसदी अधिक पौधे तैयार किए जाएंगे।
पर्यावरण संतुलन के लिए हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आम लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसानों के लिए अलग पहल की गई है। इस बार लक्ष्य के अनुरूप पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण की ठोस कार्य योजना बनाई गई है। -रेनू बाला, उप वन संरक्षक अधिकारी, सोनीपत।
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किसी भी क्षेत्र में संतुलित पर्यावरण के लिए 33 फीसदी भूभाग में हरियाली जरूरी है। वन विभाग संरक्षित वन क्षेत्र को सत फीसदी हरित आवरण में तब्दील करने में भी सफल हो जाए तब भी संतुलित पर्यावरण के लिए वृक्षों का जरूरी अनुपात पूरा नहीं होता है। इस वजह से किसानों से लेकर आमजन को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहभागी बनाने की कोशिश की जा रही है।
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कृषि वानिकी उसी कवायद का हिस्सा है। खासतौर से योजना के तहत किसान अपने खेत के मेड़ों पर सफेदा के पेड़ तैयार करेंगे। इसकी लकड़ी बेचकर किसान दोहरी आमदनी करेंगे। साथ ही फसल को भी नुकसान नहीं होगा। इसके साथ ही कृषि वानिकी से संबंधित अन्य फलदार वृक्षों के पौधे भी पौधशालाओं में तैयार किए जाएंगे।
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पौधशालाओं में आम, सगौन, शीशम, पाकड़, अर्जुन के परंपरागत वृक्षों के अलावा फलदार वृक्षों के पौधे तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य के अनुरूप पौधे तैयार करने के लिए वन विभाग की नर्सरियों को भी उच्चीकृत किया जा रहा है। लक्ष्य से तीस फीसदी अधिक पौधे तैयार किए जाएंगे।
पर्यावरण संतुलन के लिए हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। आम लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसानों के लिए अलग पहल की गई है। इस बार लक्ष्य के अनुरूप पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण की ठोस कार्य योजना बनाई गई है। -रेनू बाला, उप वन संरक्षक अधिकारी, सोनीपत।