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बांय गांव में टूटा रजवाहा, सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न

Tue, 19 Jan 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 19 Jan 2016 12:03 AM IST
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agriculture news
उपमंडल के गांव बांय के पास खेतों के साथ बना नहरी पानी का रजवाहा टूटने से लगभग 10 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। गेहूं की फसल जलमग्न होने से पीड़ित किसान गढ़ी केसरी निवासी यशपाल त्यागी को काफी आर्थिक नुकसान हुआ  है। यशपाल का आरोप है कि नहरी एवं सिंचाई विभाग को सूचना देने के बावजूद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही कोई कर्मचारी। जिसके चलते उन्हें स्वयं ही जेसीबी मशीन से टूटे रजवाहे को मिट्टी से भरवाया। उसका कहना है  कि विभाग की लापरवाही के कारण उनकी गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। यशपाल ने विभाग से उसकी फसलों का मुआवजा देने की मांग की है। सोमवार की सुबह बांय  गांव के पास खेतों के साथ बना नहरी रजवाहा अचानक टूट गया। रजवाहा टूटते ही उसका सारा पानी यशपाल के गेहूं के खेतों की तरफ बहने लगा। खेत में काम कर  रहे यशपाल को जब रजवाहा टूटने के बारे में पता चला तो उसने तुरंत नहरी एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। किसान द्वारा सूचना देने पर भी  विभाग का कोई भी अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा तो किसान ने खतरे  को भांपते हुए तुरंत अपने आप रजवाहे की मुरम्मत करने में जुट गए। लेकिन  बहाव तेज होने के कारण उसने अपने खर्चे पर जेसीबी को बुलाकर रजवाहे में  मिट्टी भरवाई तब जाकर कई घंटो के बाद पानी का बहाव रुक पाया। किसान यशपाल त्यागी का आरोप है कि यह रजवाहा जगह-जगह से बंद पड़ा है व कई जगह से टूटा भी हुआ है। इसके अलावा विभाग रजवाहे की सफाई व्यवस्था पर भी खास ध्यान नहीं देता। इन सब बातों के बावजूद भी इसमें पानी छोड़ दिया जाता है जिससे हर  साल किसानों की कई एकड़ की फसल जलमग्न होने से खराब हो जाती है। पीड़ित  किसान ने प्रशासन से उनकी खराब फसलों का मुआवजा दिलवाने की मांग की है।  वहीं सूचना के काफी देर बाद विभाग द्वारा भेजे गए नहरी विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि उनके विभाग की तरफ से हर साल सफाई करवाई जाती है जब उनसे रजवाहा जगह-जगह से बंद होने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि पिछली  सरकार ने इसका क्षेत्र घटा दिया था जिसके कारण आगे से रजवाहा बंद पड़ा है।
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क्या कहते हैं एसडीओ
नहरी एवं सिंचाई विभाग के एसडीओ हरी प्रकाश गर्ग ने बताया कि हर महीने की 17 तारीख को पानी छोड़ा जाता है। रजवाहे में कई जगहों पर जानवरों ने अपने बिल  बनाए हैं जिनमें से पानी का रिसाव होता रहता है। पानी के बहाव ने बिल का कटाव ज्यादा कर दिया जिससे रजवाहा टूट गया। सूचना पाते ही उन्होंने तुरंत कर्मचारी को मौके पर भेज दिया था।
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