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Sonipat News: नाबालिग को बहकाकर ले जाने के मामले में आरोपी की चौथी जमानत याचिका खारिज
Sun, 19 Jul 2026 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 19 Jul 2026 01:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की को बहकाकर ले जाने के मामले में आरोपी त्रिलोक सिंह को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) डॉ. जसबीर सिंह ने आरोपी की नियमित जमानत के लिए दायर चौथी याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव न होने के कारण जमानत देने का आधार नहीं बनता। अभियोजन के अनुसार, राई थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर में आरोपी पर शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहकाकर ले जाने के आरोप हैं।
मामले में 26 नवंबर, 2023 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच के दौरान पीड़िता को 29 नवंबर 2023 को बरामद कर उसका बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया था जबकि आरोपी उत्तराखंड के जिला पिथौरागढ़ के त्रिलोक सिंह (28) को 12 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
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बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश किया जा चुका है और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में मुकदमे के निस्तारण में समय लगने की संभावना को देखते हुए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता, उसके पिता और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी अदालत में दर्ज नहीं हुए हैं। यदि आरोपी को रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है अथवा न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की दूसरी जमानत याचिका पहले ही गुण-दोष के आधार पर खारिज हो चुकी है और उसके बाद परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं आया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल लंबी न्यायिक हिरासत, विशेषकर गंभीर अपराधों में, जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।
अदालत ने मामले की गंभीरता और अभियोजन की आशंकाओं को उचित मानते हुए आरोपी त्रिलोक सिंह की चौथी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश को मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाएगा।
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सोनीपत। शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की को बहकाकर ले जाने के मामले में आरोपी त्रिलोक सिंह को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) डॉ. जसबीर सिंह ने आरोपी की नियमित जमानत के लिए दायर चौथी याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव न होने के कारण जमानत देने का आधार नहीं बनता। अभियोजन के अनुसार, राई थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर में आरोपी पर शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहकाकर ले जाने के आरोप हैं।
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मामले में 26 नवंबर, 2023 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच के दौरान पीड़िता को 29 नवंबर 2023 को बरामद कर उसका बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया था जबकि आरोपी उत्तराखंड के जिला पिथौरागढ़ के त्रिलोक सिंह (28) को 12 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
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बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश किया जा चुका है और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में मुकदमे के निस्तारण में समय लगने की संभावना को देखते हुए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता, उसके पिता और अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी अदालत में दर्ज नहीं हुए हैं। यदि आरोपी को रिहा किया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है अथवा न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की दूसरी जमानत याचिका पहले ही गुण-दोष के आधार पर खारिज हो चुकी है और उसके बाद परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं आया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल लंबी न्यायिक हिरासत, विशेषकर गंभीर अपराधों में, जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।
अदालत ने मामले की गंभीरता और अभियोजन की आशंकाओं को उचित मानते हुए आरोपी त्रिलोक सिंह की चौथी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि इस आदेश को मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाएगा।