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Sonipat News: सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में सोनीपत की काजल ने 76 किलो भार वर्ग में जीता रजत पदक
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-यूक्रेन की पहलवान से स्वर्णिम मुकाबले में 6-8 से हारीं, विश्व चैंपियनशिप के हेवीवेट वर्ग में भारत को पहली बार मिला पदक
फोटो :57: सोनीपत के गांव बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक अकादमी में काजल का मुकाबला देखती पहलवान व प्रशिक्षक। स्रोत प्रशिक्षक
फोटो :58: काजल पहलवान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गांव लाठ की बेटी काजल ने 76 किलो भार वर्ग में रजत पदक जीता। फाइनल में 18 वर्षीय काजल को यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पेयेवा के खिलाफ 6-8 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि स्वर्ण पदक से चूकने के बावजूद काजल ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वह विश्व चैंपियनशिप के हेवीवेट वर्ग में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली पहली पहलवान बनी हैं।
मूलरूप से गांव लाठ हाल सेक्टर-23 सोनीपत निवासी काजल की इस सफलता से सोनीपत के खेल जगत में खुशी की लहर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहीं काजल ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और अथक मेहनत के दम पर सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व मंच पर तिरंगा लहराया जा सकता है। काजल ने रजत जीतकर भी काजल ने देश का मान बढ़ा दिया है। काजल के चाचा कृष्ण पहलवान ने बताया कि बेटी इससे पहले लीग मुकाबलों में दो बार यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पेयेवा को हरा चुकी थी। परिवार को पूरी उम्मीद थी कि बेटी आज सोना ही लेकर आएगी। आज अनास्तासिया अल्पेयेवा का दिन था। उसके बावजूद बेटी की उपलब्धि पर नाज है। वह देश के लिए सोना भी लेकर आएगी।
अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में भी जीता था स्वर्ण
काजल इससे पहले स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने सीनियर रैंकिंग सीरीज और एशियाई चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। भारत केसरी दंगल में भी वह विजेता रही थीं। अंडर-17 और अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के बाद अब सीनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक उनकी उपलब्धियों में एक और बड़ी उपलब्धि है।
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फोटो :57: सोनीपत के गांव बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक अकादमी में काजल का मुकाबला देखती पहलवान व प्रशिक्षक। स्रोत प्रशिक्षक
फोटो :58: काजल पहलवान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गांव लाठ की बेटी काजल ने 76 किलो भार वर्ग में रजत पदक जीता। फाइनल में 18 वर्षीय काजल को यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पेयेवा के खिलाफ 6-8 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि स्वर्ण पदक से चूकने के बावजूद काजल ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वह विश्व चैंपियनशिप के हेवीवेट वर्ग में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली पहली पहलवान बनी हैं।
मूलरूप से गांव लाठ हाल सेक्टर-23 सोनीपत निवासी काजल की इस सफलता से सोनीपत के खेल जगत में खुशी की लहर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहीं काजल ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और अथक मेहनत के दम पर सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व मंच पर तिरंगा लहराया जा सकता है। काजल ने रजत जीतकर भी काजल ने देश का मान बढ़ा दिया है। काजल के चाचा कृष्ण पहलवान ने बताया कि बेटी इससे पहले लीग मुकाबलों में दो बार यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पेयेवा को हरा चुकी थी। परिवार को पूरी उम्मीद थी कि बेटी आज सोना ही लेकर आएगी। आज अनास्तासिया अल्पेयेवा का दिन था। उसके बावजूद बेटी की उपलब्धि पर नाज है। वह देश के लिए सोना भी लेकर आएगी।
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अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में भी जीता था स्वर्ण
काजल इससे पहले स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने सीनियर रैंकिंग सीरीज और एशियाई चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। भारत केसरी दंगल में भी वह विजेता रही थीं। अंडर-17 और अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के बाद अब सीनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक उनकी उपलब्धियों में एक और बड़ी उपलब्धि है।
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