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Sonipat News: चेन झपटमारी के आरोपी को दूसरी बार भी नहीं मिली जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। चेन झपटमारी के मामले में गिरफ्तार आरोपी शिव कुमार को अदालत से दूसरी बार भी जमानत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगजीत सिंह ने उसकी दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पिछली याचिका खारिज होने के बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मामले में महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी बाकी है।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने 28 मार्च को शिकायतकर्ता सुनीता के बयान पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि शिव कुमार ने अन्य आरोपी के साथ मिलकर उसकी सोने की चेन झपटी थी।
आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि वह चार महीने से अधिक समय से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है। सह-आरोपी के संबंध में पूरक चालान भी दाखिल किया जा चुका है। आरोपी के किसी अन्य मामले में संलिप्त नहीं होने की भी दलील दी गई।
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राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया। अभियोजन ने बताया कि सह-आरोपी के खिलाफ करीब 53 मामले दर्ज हैं। जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे की कार्यवाही में बाधा डालने की आशंका जताई गई।
अदालत ने पाया कि आरोपी की पिछली जमानत याचिका 12 अगस्त को खारिज हुई थी। इसके बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अदालत ने अपराध की प्रकृति, गंभीरता और लंबित गवाही को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
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सोनीपत। चेन झपटमारी के मामले में गिरफ्तार आरोपी शिव कुमार को अदालत से दूसरी बार भी जमानत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगजीत सिंह ने उसकी दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पिछली याचिका खारिज होने के बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मामले में महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी बाकी है।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने 28 मार्च को शिकायतकर्ता सुनीता के बयान पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि शिव कुमार ने अन्य आरोपी के साथ मिलकर उसकी सोने की चेन झपटी थी।
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आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि वह चार महीने से अधिक समय से हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है। सह-आरोपी के संबंध में पूरक चालान भी दाखिल किया जा चुका है। आरोपी के किसी अन्य मामले में संलिप्त नहीं होने की भी दलील दी गई।
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राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया। अभियोजन ने बताया कि सह-आरोपी के खिलाफ करीब 53 मामले दर्ज हैं। जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे की कार्यवाही में बाधा डालने की आशंका जताई गई।
अदालत ने पाया कि आरोपी की पिछली जमानत याचिका 12 अगस्त को खारिज हुई थी। इसके बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अदालत ने अपराध की प्रकृति, गंभीरता और लंबित गवाही को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।